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वैदिक शिक्षा को बढावा देने के लिए स्वतंत्र समिति गठन करेगी भारत सरकार

वेदों की शिक्षा से ही आज समाज का हो रहा अध:पतन रूक सकता है, इसलिए सरकार ने उठाया यह कदम काफी महत्त्वपूर्ण है ! अब वैदिक शिक्षा को बढावा देने के लिए हर तरह से सरकार को प्रयास करने चाहिए, एेसी हिन्दुआें की अपेक्षा है !- सम्पादक, हिन्दूजागृति

नई देहली : सरकार वैदिक शिक्षा, इसके अध्ययन की विधा को बढ़ावा देने और इस प्राचीन धरोहर को जीवित बनाए रखने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसमें वैदिक शिक्षा मंडल के गठन का विषय भी शामिल है। बता दें कि, वैदिक मंत्रोच्चार को यूनेस्को धरोहर घोषित किया जा चुका है। स्मृति ईरानी के मानव संसाधन विकास मंत्रालय का दायित्व संभालने के दौरान वैदिक शिक्षा मंडल के प्रस्ताव पर विचार शुरू हुआ था।

यह पूछने पर कि, वैदिक शिक्षा मंडल का मुद्दा क्या पीछे पडा है,  इसपर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह ठंडे बस्ते में नहीं गया है और इस पर चर्चा जारी है। पूर्व चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी के नेतृत्व वाली समिति ने वैदिक अध्ययन को लेकर अलग मंडल बनाने का सुझाव दिया था। हाल ही में एक समारोह को संबोधित करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि दुनिया के अनेक विश्वविद्यालयों में संस्कृत पुस्तकों, स्मृतियों और ग्रंथों का अध्ययन किया जा रहा है। सरकार संस्कृत समेत सभी भारतीय भाषाओं को पोषित करने की नीति को बढ़ा रही है और नई शिक्षा नीति पर परिचर्चा में संस्कृत एवं इससे जुड़े विषयों को पोषित करने का किसी ने विरोध नहीं किया है।

इस विषय पर देशभर से वेद विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षाविद मानव संसाधन विकास मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। इन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में भी ज्ञापन दिया है। अधिकारी ने कहा कि जो लोग अलग प्रणाली में पढ़ते हैं और वेदों की पढ़ाई करते हैं, उनकी वेद भूषण या दूसरे नाम से जो डिग्री होती है, उसे मान्यता मिलनी चाहिए। इस बात पर सभी सहमत हैं लेकिन यह वैदिक शिक्षा मंडल के रूप में सामने आएगा या नहीं, इसका फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी कई ऐसे संस्थान चल रहे हैं, जो सीबीएसई से मान्यता प्राप्त नहीं हैं और वेद पढ़ाते हैं, उनके लिए एक नयी व्यवस्था बनाने पर चर्चा की गई है।

शिक्षाविदों ने बदलते माहौल में बच्चों को नैतिक मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणपत्रों को मान्यता देने, अनुभवी गुरुओं को शिक्षा पद्धति से जोड़ने और देश के प्रत्येक जिले में वैदिक पाठशाला स्थापित करने का सुझाव दिया है । इस उद्देश्य के लिये मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबद्ध महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्यालय को प्रस्तावित वैदिक शिक्षा मंडल के लिए शीर्ष संस्थान बनाए जाने पर भी जोर दिया गया है। महर्षि संदीपनी राष्‍ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्‍ठान (एम।एस।आर।वी।वी।पी।), उज्‍जैन, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत एक स्‍वायत्‍त संगठन है। इसकी स्‍थापना नई दिल्‍ली में जनवरी १९८७ में वेद पाठशालाओं की स्‍थापना तथा उन्‍हें सहायता प्रदान करके वैदिक अध्‍ययनों के परिरक्षण, संरक्षण तथा विकास हेतु की गई है।

इसके मुख्‍यालय को मई, १९९३ में उज्‍जैन में स्‍थानांतरित कर दिया गया था। अखिल भारतीय वेद विद्या परिषद के संयोजक पंडित धीरज पाठक ने कहा, ‘वैदिक शिक्षा को आधुनिक संदर्भ में बढावा देने के लिए वैदिक शिक्षा मंडल बिना देरी किए स्थापित किया जाए। इसमें शिक्षकों के वेतनमान एवं छात्रों की डिग्री को अन्य संकायों के समकक्ष बनाया जाए।’ शिक्षाविद एवं वेद विद्या गुरुकुल के संस्थापक पी के मित्तल ने कहा कि देश की संस्कृति को आगे बढ़ाने और दुनिया में इसके महत्व को स्थापित करने के लिए वेद परंपराओं के संरक्षण की जरूरत है जो धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है।

स्त्रोत : एनडीटीव्ही

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