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दिल्ली – बवाना महापंचायत में मुहर्रम जुलूस पर ‘प्रतिबंध’ का फैसला, बाहरी दिल्ली में तनाव

कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वादशी, कलियुग वर्ष ५११६

पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों के बाद राजधानी के दूसरे हिस्सों में तनाव की स्थिति बनती दिख रही है। उत्तरी पूर्वी दिल्ली के बवाना में हुई महापंचायत में जाट समुदाय के नेताओं ने अपने इलाके में मुहर्रम के जुलूस को रास्ता ना देने का फैसला किया है।

इस महापंचायत को बीजेपी के स्थानीय विधायक घुग्गन सिंह और कांग्रेस पार्षद देविंदर पोनी का भी समर्थन हासिल है। दोनों नेता बैठक में मौजूद रहे।

महापंचायत में उपस्थित कई जाट नेताओं के बीच सभा में घुग्गन सिंह ने कहा, ‘मुसलमान अपने घर में कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अधिकार नहीं है कि वे दूसरों को परेशान करें। इलाके के युवाओं को मैं बधाई देता हूं कि उन्होंने यह कदम (बवाना मार्केट में मुहर्रम के जुलूस को रोकने का) उठाया है।’

बवाना में हुई इस महापंचायत में दो हजार से ज्यादा स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। कई सारे वक्ताओं ने भड़काऊ भाषण दिए और कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोग कई सालों से महिलाओं को निशाना बनाते रहे हैं।

इस इलाके में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की ज्यादातर आबादी जेजे कॉलोनी में रहती है। कॉलोनी के लोगों ने मुहर्रम जूलुस को जाट समुदाय के इलाकों से ना ले जाने का फैसला किया है। अल्पसंख्यक समुदाय के स्थानीय नेताओं में से एक ने कहा, ‘पुलिस को हमने अपने निर्णय के बारे में बता दिया है, ताकि मुहर्रम के जुलूस को लेकर कोई विवाद ना पैदा हो। हम लोग शांति से रहना चाहते हैं।’

गौरतलब है कि वार्षिक जुलूस में शिया मुसलमान इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं। इमाम हुसैन पैगंबर मोहम्मद के पोते थे। मुहर्रम मंगलवार को मनाया जाएगा।

स्त्रोत : आज तक

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