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इंग्लैंड क्रिकेटर मोइन अली ने कहा, ‘धर्म पहले, क्रिकेट बाद में’

कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी, कलियुग वर्ष ५११६

कितने हिन्दू क्रिकेट खिलाडी अपने धर्म को पहला स्थान देते है ?

मोइन अली इंग्लैंड के नए क्रिकेट स्टार हैं। वो अपने खेल ही नहीं बल्कि निजी पहचान के कारण भी ध्यान खींचते हैं। उनके लिए दाढ़ी उनके धर्म का और निजता का सवाल है। साथ ही वह अपनी सफलता को धर्म से जोड़ते हैं।

मोइन कहते हैं, ”मेरा धर्म सबसे पहले है और अपने धर्म के लिए मैं जो कुछ करता हूं, उससे मुझे प्रेम है। कभी-कभी क्रिकेटर सिर्फ अपने क्रिकेट में ही मग्न रहते हैं। मगर निजी तौर पर क्रिकेट मेरे लिए दूसरे नंबर पर है और मेरा धर्म पहले नंबर पर। यानी मैं इंसान के बतौर क्या अच्छा कर सकता हूं।”

तो क्या उन्हें लगता है कि धर्म ने उन्हें एक बेहतरीन क्रिकेटर के रूप में बदलने में मदद की है। मोइन इससे पूरी तरह सहमत हैं।

वो कहते हैं, ”हालांकि मेरा धर्म पहले आता है पर इसकी वजह से मेरे क्रिकेट पर जबर्दस्त असर पड़ा है। जब मैं खेलता हूं तो ज्यादा शांत रह पाता हूं। हर दिन को मैं उसी तरह कुबूल करता हूं जैसा वह मुझे मिला है। और मुझे लगता है कि शायद इसीलिए मैं अच्छा क्रिकेट खेल पाता हूं।”

मोइन की दाढ़ी पर भी उठते रहते हैं सवाल

मोइन अली एक पाकिस्तानी परिवार में जन्में हैं और उन्होंने इंग्लैंड क्रिकेट में अपनी जगह बनाई। इस वजह से कई बार उनसे राजनीति पर भी सवाल पूछे जाते हैं।

वह कहते हैं, ”कभी-कभी जब हम इंटरव्यू के लिए जाते हैं तो वो पूछ लेते हैं कि फलस्तीन को लेकर आपका क्या ख्याल है।” हालांकि राजनीति की वजह से उन्हें पिछली गर्मियों में लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ा था जब एक टेस्ट मैच के दौरान उनके हाथों में गजा के समर्थन वाला रिस्टबैंड नजर आया था।

मोइन बताते हैं, ”वह मामला बेवजह ही तूल पकड़ गया। ऐसा मैंने कभी नहीं सोचा था। मैं मानवता का हिमायती हूं। ये कोई राजनीतिक बात नहीं थी बल्कि इसके पीछे मानवीय सोच थी।”

फिरकी गेंदबाज मोइन अली का कहना है, ”मैं इस बात की फिक्र नहीं करता कि लोग क्या कहते हैं। मेरे ख्याल से यह पूरी तरह निजी मामला है, एक धार्मिक बात है। और इसकी किसी से भी तुलना करना अजीब बात ही होगी।”

स्त्रोत : अमर उजाला

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