कार्तिक कृष्ण पक्ष एकादशी, कलियुग वर्ष ५११६
महिलाओको मार्गदर्शन करते हुए श्रीमती रामतीर्थकर
परभणी (महाराष्ट्र) – कोजागरी पूर्णिमाके निमित्त स्वातंत्र्यवीर सावरकर विचारदर्शन प्रतिष्ठानद्वारा आयोजित ‘मां, आप जिजाऊ हो,’ इस विषयपर आयोजित व्याख्यानमें बोलते हुए अधिवक्ता श्रीमती अपर्णा रामतीर्थकरने प्रतिपादित किया कि मांके अंदर परिवारको एकत्रित बनाए रखनेकी कला होती है । भारतीय स्त्रीको स्त्रीसमान दिखना चाहिए एवं रहना चाहिए ! यदि हिन्दू स्त्रीका अस्तित्व रहेगा, तो ही हिन्दू धर्म एवं हिन्दूस्थान टिकेगा । ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय गीतसे कार्यक्रमकी परिसमाप्ति की गई ।
स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात








