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उज्जैन : सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से ‘राष्ट्र एवं धर्म’ विषयक प्रदर्शनी का आयोजन

सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से ‘राष्ट्र एवं धर्म’ विषयक प्रदर्शनी

सनदी लेखापाल – श्री. प्रशांत शर्मा एवं नगराध्यक्ष – श्री. सोनु गेहलोत तथा अन्योंको जानकारी देते हुए सनातन के श्री. हेमंत जुवेकर

उज्जैन (मध्यप्रदेश) : कार्तिक मास के अवसर पर शहर में क्षिप्रा नदी के तट पर प्रशासनद्वारा कार्तिक मेले का आयोजन किया गया है।

इस मेले में सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति के संयुक्त तत्त्वावधान में राष्ट्र एवं धर्म विषयक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है।

यह प्रदर्शनी २४ दिसम्बर तक खुली रहेगी।

इस प्रदर्शनी का अनावरण ४ दिसम्बर को नगराध्यक्ष श्री. सोनु गेहलोत तथा सनदी लेखापाल (सीए) श्री. प्रशांत शर्मा के हाथों दीपप्रज्वलनद्वारा किया गया। प्रदर्शनी का अवलोकन करने के पश्चात नगराध्यक्ष श्री. गेहलोत ने वक्तव्य दिया कि, ‘सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति समय की आवश्यकता के अनुसार कार्य कर रही है।’ प्रदर्शनी का आयोजन अत्यंत अच्छी तरह से किया गया है।

उज्जैन में संपन्न होनेवाले कुंभमेले में भी इस प्रकार की प्रदर्शनी का आयोजन करें। इस कार्य में सहायता करने के लिए मैं सिद्ध हूं।’

सनदी लेखापाल श्री. शर्मा ने कहा कि, ‘आज सर्व समाज पाश्चात्त्य संस्कृति का अनुकरण कर रहा है। संस्कृति के संदर्भ में कोई भी जानकारी नहीं देता। सनातन संस्थाद्वारा आयोजित ‘धर्मशिक्षण अभियान’ प्रशंसनीय है। इस कार्य में सहयोग देने की मेरी आंतरिक इच्छा है।’

इस प्रदर्शनी के लिए श्री. गेहलोत तथा श्री. शर्मा के साथ उज्जैन नगरपालिका का भी सहयोग प्राप्त हुआ।

क्षणिकाएं

१. इस प्रदर्शनी हेतु नगरपालिका निगम ने नि:शुल्क स्थल, बिजली, पटल तथा आसंदियां (कुर्सियां) उपलब्ध करवार्इं, साथ ही कुंभमेले में भी इस प्रकार की प्रदर्शनी आयोजित करने की विनती भी की !

२. उज्जैन के श्री शिव शक्ति धाम के महंत तथा संस्थापक स्वामी कमलेश महाराज को कुछ अडचन के कारण कार्यक्रम के लिए उपस्थित रहना असभंव था; इसलिए उन्होंने सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा आयोजित प्रदर्शनी के लिए अपने आशीर्वाद भेजे !

३. पाश्चात्त्य संस्कृति तथा हिन्दू संस्कृति की तुलना बतानेवाले फलक श्रद्धालुओंके आकर्षण के केंद्र सिद्ध हुए !

४. बडनगर, उज्जैन के श्री. राहुल शर्मा तथा उनके मित्र मेला देखने आए थे। प्रदर्शनी में भ्रमण करने के पश्चात उन्हें तीव्र सुंगध की अनुभूति आई। अतः उन्होंने उत्स्फूर्त रूप से कार्य का परिचय कर, अनेक ग्रंथ भी खरीदे !

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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