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‘पंचगव्य चिकित्सा’ से ‘गोमाता’ को भारत में पुनः प्रतिष्ठा मिलेगी – पू. दादा गुरुजी, उत्तराखंड

पुष्कर (राजस्थान) में ‘तृतीय पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन’

पू. दादा गुरुजी, उत्तराखंड
पू. दादा गुरुजी, उत्तराखंड

पुष्कर (राजस्थान) : भारतभूमि विश्व का आध्यात्मिक नेतृत्व करती है एवं गोमाता उसके लिए भारत का प्रतिनिधित्व करती है !

आज पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन के उपलक्ष्य में पूरे देश से ‘गोसेवा’ का पवित्र संकल्प लेकर एकत्रित आए युवकोंको देख कर मुझे आनंद हो रहा है। उनके माध्यम से ‘गाय’ को भारत में पुनः प्रतिष्ठा मिलेगी, उत्तराखंड के पू. दादा गुरुजी ने ऐसा प्रतिपादन किया।

वे यहां ६ दिसंबर तक चलनेवाले तृतीय पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

इस समारोह का आरंभ स्व. राजीव दीक्षित की प्रतिमापूजन एवं दीपप्रज्वलन से हुआ।

इस अवसर पर व्यासपीठ पर सूर्ययोगी पू. उमाशंकरजी (पुडुचेरी) एवं गव्यसिद्धाचार्य श्री. निरंजनभाई वर्मा उपस्थित थे। इस सम्मेलन हेतु पूरे देश से ५०० से अधिक गोप्रेमीयोंकी उपस्थिती हैं।

तृतीय पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन के उद्घाटन समारोह में उपस्थित गोप्रेमी

इस समय सूर्ययोगी पू. उमाशंकरजी ने कहा कि, पंचगव्य चिकित्सा से शरीर का संतुलन रखा जाता है। पंचगव्य चिकित्सा में जो कुछ संशोधन हो रहा है, उससे विश्वकल्याण हेतु अनेक बातें सामने आएंगी।

इस अवसर पर उपस्थित संतोंके शुभहाथों पंचगव्य चिकित्सा से संबंधित विविध साहित्य का विमोचन किया गया। तत्पश्चात महर्षि वाग्भट गोशाला एवं अनुसंधान केंद्र के कर्नाटक प्रभारी गव्यसिद्धाचार्य श्री. दामोदर भाई, राजस्थान प्रभारी गव्यसिद्धाचार्य श्री. अजीत शर्मा एवं गव्यसिद्धाचार्य श्री. नीतेश ओझाद्वारा पंचगव्य चिकित्सा करते समय आए अनुभव सभी के सामने प्रस्तुत किए गए।

ऐसे हुआ, तृतीय पंचगव्य महासम्मेलन का आरंभ ….

४ दिसंबर को सवेरे ५.३० बजे श्री. निरंजनभाई वर्मा का मार्गदर्शन आरंभ हुआ। तदुपरांत बिना अन्न-जल के केवल सूर्य की ऊर्जा पर जीवित रहने में सक्षम सूर्ययोगी पू. उमाशंकरजी ने उपस्थित लोगोंद्वारा सूर्ययोग के कुछ प्रयोग करवाए तदुपरांत महासम्मेलन स्थल से पुष्कर के ब्रह्मदेव के मंदिर तक एक जनजागृति फेरी निकाली गई। तत्पश्चात मुख्य उद्घाटन समारोह का आरंभ हुआ।

पंचगव्य चिकित्सा का प्रसार करनेवाले साहित्य का प्रकाशन

मान्यवरोंद्वारा, निम्न दिए अनुसार ‘साहित्य सामग्री’ का प्रकाशन किया गया…

१. अ. भा. पंचगव्य चिकित्सक संघ की वार्षिक पत्रिका ‘गव्यसिद्ध’

२. जयपुर की श्रीमती अनिता शर्मा संकलित ‘गोसान्निध्य में दिनचर्या’ लघुग्रंथ

३. गो-संस्कृति को समर्पित ‘पाक्षिक शंखनाद का विशेषांक’

४. पू. निरंजनभाई वर्मा के मार्गदर्शन पर आधारित ‘पंचगव्य चिकित्सा व्याख्यान संग्रह की डीवीडी एवं एम.पी ३’

५. ‘शरीर के १२ अंगोंपर पंचगव्य का होनेवाला परिणाम’, वैदिक एवं ‘आधुनिक रूप में गोमाता एवं क्षीरमंथन : सृष्टि के सबसे बडे शोध’ पर आधारित भित्तिपत्रक

गोसंवर्धन के संदर्भ में सनातन संस्था गोप्रेमियों के साथ ! – श्री. निरंजनभाई वर्मा

उद्घाटन समारोह में श्री. निरंजनभाई वर्मा के मार्गदर्शन के अनुसार सनातन संस्था के वैद्य श्री. मेघराज पराडकरद्वारा संकलित ‘पंचगव्य उत्पाद बनाएं’ ग्रंथ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर श्री. निरंजनभाई वर्मा ने कहा कि, सनातन संस्था देश की अग्रणी संस्था है, जो गोसंवर्धन के कार्य में निरंतर हमारे साथ है। इस ग्रंथ का प्रकाशन करने के विषय में हम सभी संस्था के आभारी हैं एवं आनेवाले दिनों में संस्था पंचगव्य से संबंधित और भी कुछ ग्रंथोंका विमोचन करेगी। ये ग्रंथ भी लोगोंके लिए लाभदायी सिद्ध होंगे।

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हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा जून, वर्ष २०१५ में रामनाथी, गोवा में
आयोजित ‘तृतीय अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन’ में
गव्यसिद्धाचार्य श्री. निरंजनभाई वर्माद्वारा
‘गोमाता’ संबंधी प्रस्तुत किये गये विचार
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स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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