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श्री क्षेत्र त्र्यंबकेश्‍वर में ‘नकली रुद्राक्ष’द्वारा श्रद्धालुओंको फंसानेका षडयंत्र !

‘सिंहस्थ पर्व – नासिक !’ में ‘नकली रुद्राक्ष’ बेचकर श्रद्धालुओंको फंसाया जा रहा है !

  • पौधे के सूखी लता पर नकली रुद्राक्ष चिपकाकर चालू है बिक्री !
  • प्लास्टिक के रुद्राक्षों पर, शिवपिंडी के चिन्ह मुद्रित कर श्रद्धालुओं को फंसाया जाना !
  • नकली एकमुखी रुद्राक्ष बेचे जाते हैं ५०० रुपए में !
  • १० रुपए की वैजयंतीमाला १०० रुपए में !
यंत्र के सांचेद्वारा बनाये गये चिन्ह, ऐसा स्पष्ट रूप से दिखता है !

नासिक : ‘श्री क्षेत्र त्र्यंबकेश्‍वर’ एवं ‘सिंहस्थ-पर्व’ में १२ ज्योर्तिलिंगों में से एक भगवान श्री त्र्यंबकेश्‍वर के दर्शन करने हेतु देशभर से श्रद्धालु त्र्यंबकेश्‍वर में एकत्रित हो रहे हैं।

भावपूर्ण दर्शन होने के उपरांत भगवान श्री त्र्यंबकेश्‍वर के प्रसाद के रूप में श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा से रुद्राक्ष खरीदते हैं। किंतु भोले-भाले श्रद्धालुओंको फंसाकर उन्हें नकली रुद्राक्ष बेचने का धक्कादायक मामला यहां हो रहा है और यह प्रकार दैनिक सनातन प्रभात के पत्रकारोंके ध्यान में आया है।

१. रुद्राक्ष लेने के लिए दुकान में जानेपर गले में पहनी जानेवाली रुद्राक्ष की माला १५० से ३५० रुपए तक बेची जाती है। १५० रुपए की माला कुछ दुकानदार ३०० रुपए में बेच रहे हैं। इस में अधिकांश रुद्राक्ष माला लाल एवं भूरे रंग में रंगी दिखती हैं। कुछ रुद्राक्ष हल्के भूरे रंग की, तो कुछ गहरे लाल एवं गुलाबी लाल रंग में दिखते हैं। इस कारण रुद्राक्ष के असलीपन के संदर्भ में शंका होती है।

२. १० रुपए में मिलनेवाली वैजयंती माला १०० रुपए में बेची जा रही है। इस प्रकार अधिक पैसे लेकर श्रद्धालुओंको लूटा जा रहा है।

३. दुकानदारोंको रुद्राक्ष के असलीपन के बारे में पूछनेपर हर एक दुकानदार कोई भी ठोस कारण न देते हुए रुद्राक्ष नेपाल से आया है, ऐसे बताते हैं।

४. सब से अधिक गंभीर बात यह है कि रुद्राक्ष असली दिखे इसलिए पौधे की सुकी हुर्इ डाल को फेविक्विक लगाकर उसके अंतिम भाग पर रुद्राक्ष चिपकाया जाता है एवं नेपाल, हिमाचल प्रदेश का रूद्राक्ष बताया जाता है। इसी कारण श्रद्धालु पूर्ण रूप से फंसे जा रहे हैं।

५. एक सूखे डाली को गोलाकार एकमुखी रुद्राक्ष दिखाकर गोविंद नामक विक्रेता ने उस का मूल्य ५०० रुपए बताया। दुकान में बिकनेवाले रुद्राक्ष माला का मूल्य १०० रुपए बताया गया।

६. इस से भी आगे अश्चर्य की बात है कि, किसी चपटे वस्तु पर नाग, शिवपिंडी आदि शुभचिन्ह बनाकर उसे लाठी से चिपकाकर वह असली रुद्राक्ष होने का दावा किया जाता है। वास्तव में वे चिन्ह स्पष्ट रूप से यंत्र के सांचेद्वारा बनाया गया है ऐसा दिखता है। ऐसे रुद्राक्ष ३० रुपए में बेचे जा रहें हैं।

७. यह सब सार्वजनिक रूप में हो रहा है फिर भी जिला प्रशासन इस ओर पूर्णतः अनदेखी कर रहा है।

असली रूद्राक्ष कैंसे पहचाने ?

  • असली रुद्राक्ष मछली के समान चपटे आकार का होता है !
  • उसपर प्राकृतिक रूप से ॐ तथा अन्य शुभचिन्ह होते हैं !
  • उस का मूल्य ४ सहस्र से ४० सहस्र रुपए तक होता है !
  • असली रुद्राक्ष का दर्शन दुर्लभ होता है !

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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