‘सिंहस्थ पर्व – नासिक !’
विश्वशांति, मानवकल्याण तथा धार्मिक जीवन, धर्मस्थलोंकी रक्षा, मठ-मठाधिपति आदि को स्वतंत्रता प्रदान करने की मांग

श्री क्षेत्र त्र्यंबकेश्वर-नासिक : भारत साधु समाज की ओर से नासिक के सिंहस्थपर्व के निमित्त १५ सितंबर से विश्वशांति, मानवकल्याण तथा धार्मिक जीवन, धर्मस्थलोंकी रक्षा, मठ-मठाधिपति आदि की स्वतंत्रता की रक्षा, साथ ही मूल्यहीन राजनीति और प्रशासन में फैला भ्रष्टाचार, व्यसनाधीनता, महिलाओंपर हो रहे बलात्कार आदि को नियंत्रित करने हेतु विशेष आध्यात्मिक एवं सामाजिक जागृति अभियान का प्रारंभ किया जानेवाला है।
समस्त साधुसंतोंने पत्रकारवार्ता में ऐसी जानकारी दी कि, जातियां और धर्म के नामपर शासकीय कोष और आरक्षण की सुविधा देने की अपेक्षा सर्व निर्धन लोगोंको वह समान रूप में दी जानी चाहिए; चाहे उसकी जाति अथवा धर्म कौन सा भी हो। विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा अनिवार्य करना, साथ ही महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, बिहार आदि राज्यों में धर्मादाय कानून में सुधार कर शासकीय नियंत्रण हटाया जाने का विचार किया जाए। यह करते समय धर्माचार्योंका महत्त्व अबाधित रहे।
गंगासागर, त्र्यंबकेश्वर के श्री पंच अग्नि अखाडे में आयोजित पत्रकार वार्ता में भारत साधु समाज के संस्थापक महामंत्री धर्माचार्य स्वामी हरिनारायणानंद, राष्ट्रीय मंत्री श्री महंत जन्मेजय शरणजी, महंत श्री नारायणगिरी महाराज, श्री पंच अग्नि अखाडे के अध्यक्ष प.पू. गोपालानंद ब्रह्मचारी महाराज, श्री तपोनिधि पंचायती आनंद अखाडे के महंत श्री सागरानंद सरस्वती महाराज और श्री गोविंदानंद महाराज उपस्थित थे।
स्वामी हरिनारायणानंद ने कहा कि, इस विशेष अभियान का उद्घाटन १५ सितंबर को द्वारका और बद्री पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज सरस्वतीजी के करकमलोंद्वारा होनेवाला है। इस समय निम्बार्काचार्य श्रीजी महाराज, साधु अखाडे के आचार्य महामंडलेश्वर सर्वश्री अवधेशानंदगिरीजी महाराज, स्वामी विशोकानंद महाराज, स्वामी शिवेंद्रपुरीजी महाराज, स्वामी पुण्यानंदजी महाराज, ब्रह्मर्षि रामकृष्णानंदजी महाराज, मंगल पीठाधीश्वर महंत माध्वाचार्यजी महाराज, उदासीन बडे अखाडे के अध्यक्ष श्री महंत महेश्वरदासजी महाराज, रामानुजाचार्य पीठाधीश्वर स्वामी रंगरमानुजाचार्य एवं कबीरपंथ संप्रदायाचार्य श्री महंत गुरुप्रसाद गोस्वामी आदि धर्माचार्य सम्मिलीत होनेवाले हैं।
सार्वजनिक और सामान्य जीवन में अयोग्य मार्ग का अवलंब कर करोडपति होने और सत्ताप्राप्ति करने के लिए स्पर्धा करने की होड लगी है। इसपर नियंत्रण करने के लिए विचार किया जाएगा; क्यों कि ये बातें लोकराज्य के मर्मपर प्रहार कर रही हैं। जिन्होंने स्वच्छ और दक्ष प्रशासन देने का आवाहन किया था; उनका पतन हो गया है। ऐसे स्वार्थी राजनेताओं तथा विवेकशून्य प्रशासनपर रोक लगाना आवश्यक है।
स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात








