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सिंहस्थ पर्व (नासिक) – साधुओंके हाथ में शस्त्र धारण करने का महत्त्व !

राष्ट्र की रक्षा हेतु साधु कार्यरत रहते हैं तथा प्रत्यक्ष लडकर राष्ट्र की रक्षा करने के अनेक उदाहरण इतिहास में हैं !

शस्त्र हाथ में पकडे साधु

पृथ्वीराज चौहान ने देश की रक्षा हेतु नागा साधुओंकी सहायता ली तथा नागा साधुओंने उसकी सेना होकर उस समय मुघल आक्रमकोंसे राज्य की रक्षा की।

औरंगजेब सेना की हिन्दू सेना साधुओंके पक्ष में आई तथा हिन्दू सेना का विजय हुआ।

साधु हिमालय में निवास करते हैं, किंतु राष्ट्र की रक्षा हेतु वे कार्यरत रहते हैं तथा प्रत्यक्ष लडकर राष्ट्र की रक्षा करने के अनेक उदाहरण इतिहास में हैं। क्षात्रधर्म के प्रतीक के रूप में आज भी नागा साधुओंके हाथ में शस्त्र हैं तथा उनका प्रदर्शन करते हुए वे शोभायात्रा का आयोजन करते हैं।

साधुओंद्वारा हिन्दू राजाओंकी सहायता करने के कारण उन्होंने उन्हें छत्रचामरें प्रदान की, उनके हाथी, घोडे, ऊंट पर सवाद्य शोभायात्राएं निकाली थी।

आज भी सन्यस्थ होते हुए भी साधु शोभायात्राओंद्वारा स्नान के लिए आते हैं।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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