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‘दत्तपीठ – चिक्कमंगलुरू’ : राज्यशासन धर्मादाय आयुक्त के अहवाल अनुसार निर्णय लें ! – सर्वोच्च न्यायालय

कर्नाटक के चिक्कमंगलुरू के दत्तात्रय पीठ का प्रकरण

नई देहली : सर्वोच्च न्यायालयद्वारा कर्नाटक शासन को कुछ दशकोंसे हिन्दू एवं मुसलमान के वाद को कारणभूत सिद्ध चिक्कमंगलुरू के वादग्रस्त गुरु इनाम दत्तात्रेय पीठ के प्रकरण में वर्ष २०१० में धर्मादाय आयुक्तोंद्वारा दिए गए संपूर्ण अहवाल का अभ्यास कर उचित निर्णय लेने का आदेश दिया गया है।

इस आदेश से धार्मिक दृष्टि से अतिसंवेदनशील प्रकरणोंपर हल निकालने का दायित्व कांग्रेस के सिद्धारामय्या शासन पर आया है।

१. वर्ष २०१० में धर्मादाय आयुक्त ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार इस धार्मिक स्थल के विषय में दोनोंही धर्मोंके प्रमुख एवं संबंधित व्यक्तियोंसे जानकारी संग्रहित कर एक अहवाल प्रस्तुत किया था।

२. सर्वोच्च न्यायालयद्वारा अप्रैल २०१५ को वादी-प्रतिवादियोंको इस अहवाल की प्रतियां दे कर आपत्तियोंकी प्रविष्टि करने को कहा गया है।

३. इस अहवाल के विरुद्ध आवेदक सय्यद गौस मोइद्दीन ने न्यायालय में ऐसा परिवाद किया कि आयुक्त ने गुरु दत्तात्रेय संवर्धन समिति की आपत्तियोंपर अधिक प्रधानता से ध्यान दिया।

हिन्दू एवं मुसलमान के वाद को कारणभूत सिद्ध चिक्कमंगलुरू के वादग्रस्त गुरु इनाम दत्तात्रेय पीठ

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A Report on HJS’ ‘Dattapeetham Campaign’ : Fight for religious right
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स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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