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हिन्दू जनजागृति समिति तथा सनातन संस्था के संयुक्त तत्त्वाधान से कुंभनगरी नाशिक में भव्य प्रदर्शनी !

‘सिंहस्थ पर्व – नासिक !’

अनेक साधु-महंतोंका एकत्रित लाभ प्रदान करनेवाली पर्वणी !

भारत ‘जगदगुरु’ पद पर विराजमान होगा ! यह प्रदर्शनी देखकर यह प्रतीत होता है कि, पूरे विश्व में भारत उनके संस्कारोंद्वारा, साथ ही सनातन संस्थाद्वारा किए गए प्रयासोंद्वारा पुनः जगदगुरु पद पर विराजमान होगा। उसकेद्वारा विश्व में शांति का संदेश पहुंचेगा। इस प्रदर्शनी के कारण धर्मजागृति के कार्य को प्रोत्साहन प्राप्त होगा। साथ ही इस से भारतीय संस्कृति की रक्षा, पूरे विश्व के लिए हितकारक तथा शांति के एवं विकास का रहेगा – श्री महंत रामकिशोरशास्त्रीजी महाराज

प्रदर्शनस्थल पर बायीं ओर से श्री. सुनील घनवट, अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अनी अखाडा के उप श्री महंत रामकिशोरशास्त्रीजी महाराज, चित्रकुट के श्री दिव्य जीवनदासजी महाराज, पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळे, अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अनी अखाडा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत कृष्णदासजी महाराज, अखाडा के महामंत्री महंत वैष्णवदासजी महाराज, श्री रामस्वरूपदासजी महाराज (पिछली ओर), श्री जगदीशदासजी महाराज, श्री पवनदासजी महाराज, श्री रामदासजी महाराज तथा नागा अमरदासजी महाराज

नाशिक (महाराष्ट्र) : सिंहस्थपर्व के उपलक्ष्य में सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति के संयुक्त तत्त्वाधान से आयोजित की गई राष्ट्ररक्षा एवं धर्मशिक्षा की यह प्रदर्शनी देखने हेतु ४ सितम्बर को सायंकाल के समय संत-महंतोंकी उपस्थिती थी !

१३ अखाडों में से सब से बडा अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अनी अखाडे के सर्व प्रमुख महंतोंकी उपस्थिती प्राप्त हुई !

भारत के कुल मिलाकर १३ अखाडों में से सब से बडा साथ ही अखाडोंका राजा माने जानेवाले अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अनी अखाडे के सर्व प्रमुख महंतोंकी उपस्थिती इस प्रदर्शनी को प्राप्त हुई। उस समय इस अखाडा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत रामकृष्णदासजी महाराज, अखाडे के महामंत्री महंत वैष्णवदासजी महाराज, महंत कमलदासजी महाराज, महंत दिव्य जीवनदासजी महाराज, नागा अमरदासजी महाराज, अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अनी अखाडे के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत कृष्णदासजी महाराज, उप श्री महंत रामकिशोरशास्त्रीजी महाराज, अखाडे के महामंत्री महंत वैष्णवदासजी महाराज इत्यादि उपस्थित थे। हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळे ने इन सभी साधु-महंतों को प्रदर्शनी की जानकारी प्रदान की, साथ ही उन सभी का आदर भी किया।

उस समय सनातन की पू. (कु.) स्वाती खाड्ये की वंदनीय उपस्थिती थी।

सिंहस्थपर्व के समय अखाडोंके कार्य के कारण ये सभी साधु-महंत व्यस्त रहते हैं। अतः उन्हें एकत्रितरूप से देखना दुर्मिल रहता है; अपितु इन सभी साधु-महंतोंको एकत्रित रूप से देखने की पर्वणी इस प्रदर्शनी के कारण प्राप्त हुई।

सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति का हिन्दू संस्कृति रक्षा का कार्य प्रशंसनीय ! – श्री महंत कृष्णदासजी महाराज

सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति का हिन्दू संस्कृति रक्षा का कार्य प्रशंसनीय है। यह कार्य देखकर मैं प्रसन्न हूं। इस प्रदर्शनीद्वारा कथन की गई बातोंको समाज ने अपनाना चाहिए तथा वे बातें अन्योंको भी बताना चाहिए।

सनातन संस्था के प्रयासोंद्वारा भारत पुनः जगद्गुरु पद पर विराजमान होगा ! – अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अनी अखाडे के उप श्री महंत रामकिशोरशास्त्रीजी महाराज

भारत जगदगुरु पद पर विराजमान होगा। यह प्रदर्शनी देखकर यह प्रतीत होता है कि, पूरे विश्व में भारत उनके संस्कारोंद्वारा, साथ ही सनातन संस्थाद्वारा किए गए प्रयासोंद्वारा पुनः जगद्गुरु पद पर विराजमान होगा। उसकेद्वारा विश्व में शांति का संदेश पहुंचेगा। इस प्रदर्शनी के कारण धर्मजागृति के कार्य को प्रोत्साहन प्राप्त होगा। साथ ही इस से भारतीय संस्कृति की रक्षा एवं विकास होगा ।

सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति साधु-संतोंका कार्य कर रही है, अतः यह कार्य अवर्णनीय है ! – महामंत्री महंत वैष्णवदासजी महाराज

सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति हिन्दू संस्कृति के लिए, साथ ही हिन्दू संस्कृति के उत्थान हेतु जो कार्य कर रही है, वह कार्य प्रशंसनीय है। जो लोग आज अपनी हिन्दू संस्कृति से दूर गए हैं, उनके लिए यह कार्य उपयुक्त है। जो कार्य साधु-संत करते हैं, वह कार्य सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति साधकोंके रूप में कर रही हैं। यह कार्य अवर्णनीय है। संत अपने घर का त्याग कर हिन्दू धर्मरक्षा का कार्य करते हैं, उसी प्रकार आप भी कर रहे हैं। इस कार्य के कारण हिन्दू संस्कृति के तितर-बितर लोगोंको पुनः इस संस्कृति की ओर लाने का आप का यह योगदान अत्यंत महान है।

भारतीय संस्कृति को उसका गतवैभव पुनः लौटानेवाली प्रदर्शनी ! – महंत दिव्य जीवनदासजी महाराज

प्रदर्शनी अत्यंत सुंदर तथा उत्तम है। इस प्रदर्शनीद्वारा भारतीय संस्कृति का तथा अध्यात्म का दर्शन होता है। विश्व में भारतीय संस्कृति को गतवैभव पुनः लौटानेवाली यह प्रदर्शनी है। सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा अध्यात्म विश्वविद्यालय के रूप में गुरुकुल शिक्षापद्धति का किया गया पुनरुज्जीवन का कार्य प्रशंसनीय है। वास्तव में इस कार्य की जितनी भी प्रशंसा करें, उतनी अल्प ही है।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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