‘टीवी ९’ पर चर्चासत्र में ‘असली एवं नकली साधु-संत’ इस विषयपर विवाद !
मुंबई : टीवी ९ समाचार प्रणाल पर पाखंडी बाबाओंके संदर्भ में आयोजित चर्चासत्र में हिन्दू जनजागृति समिति के मुंबई जनपद के समन्वयक वैद्य श्री. उदय धुरी वक्तव्य कर रहे थे।
उस समय उन्होंने यह बताया कि, जबतक पाखंडी एवं नकली बाबाओंके संदर्भ में परिवाद प्रविष्ट नहीं किया जाता, तबतक कुछ भी करना असंभव होता है। संतोंका आचरण उच्च प्रती का तथा नैतिक ही होना आवश्यक है। ऐसा होगा, तो ही उनके भक्त उच्च प्रती के साधक बन सकते हैं।

वैद्य श्री. धुरीद्वारा बताएं गए अन्य सूत्र
१. आज प्रत्येक क्षेत्र में पाखंडीपन चल रहा है। वैद्यकीय क्षेत्र में ९५ प्रतिशत लोग कट-प्रॅक्टिस करते हैं, अधिवक्ता, प्रसारमाध्यमोंके क्षेत्र में भी यही स्थिती है।
२. अखाडोंने आगे आकर कुंभपर्व की अनिष्ट प्रथाओंको हटाना चाहिए। हिन्दू संगठन के लिए नेतृत्व करना चाहिए तथा अखाडे का ‘अखंड’ यह नाम अबाधित रखना चाहिए।
३. स्वयं का आचरण अतिशय शुद्ध, अतिशय पवित्र, अतिशय उच्च प्रती का बनाने के लिए दिया गया साधन अर्थात धर्म है।
४. गणेशोत्सव में विकृत पद्धति से नृत्य करना सर्वथा अनुचित है।
स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात









