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हिन्दू विचार से चलनेवाला राज्य बनना आवश्यक : श्री. तपन घोष, अध्यक्ष, हिन्दू संहती संगठन

पश्चिम बंगाल के ‘हिन्दू संहती संगठन’ के अध्यक्ष श्री. तपन घोष एक कार्यक्रम के उपलक्ष्य में पुणे आए थे। इस समय यहां के हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. अभिजीत देशमुख एवं श्री. विवेक गुप्ता ने उनसे भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने धर्मांधोंकी बढती कट्टरता, उसका भारत पर होनेवाला विपरीत परिणाम, हिन्दुओं में धर्मप्रेम उत्पन्न करना तथा ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित करने की दिशा में जो मार्गदर्शन किया, उसे प्रस्तुत कर रहे हैं . . .

श्री. तपन घोष

१. जिहादीयोंकी बढती कट्टरता को रोक लगी, तो ही हिन्दुओंकी स्थिति में परिवर्तन होगा !

केंद्र अथवा राज्यों में चाहे किसी की भी सरकार हो, परंतु कुछ मूलभूत समस्याओंपर नियंत्रण प्राप्त करना चाहिए। उदा. जब तक धर्मांधोंकी बढती जनसंख्या तथा कट्टरता को नहीं रोका जाएगा, तब तक केंद्र अथवा राज्य में चाहे किसी की भी सरकार हो, हिन्दुओंकी स्थिति में परिवर्तन नहीं होगा। दूसरी बात यह कि अब केंद्र में आए भाजपा के शासन से हिन्दुओंकी स्थिति परिवर्तित होगी, ऐसा नहीं है; परंतु वर्ष २०१४ में जनता ने जो मत प्रदान किया, वह भाजप को नहीं, अपितु मोदीजी को किया है। जनता को मोदीजी से अपेक्षाएं हैं। मोदीजी उन्हें पूरा कर सकेंगे अथवा नहीं यह देखने के लिए मोदीजी को और एक वर्ष देना पडेगा। हमें कभी यह न भूलें कि देश में अनेक स्थानोंपर हिन्दूविरोधी शक्तियां छिपी हैं। इस का ताजा उदाहरण है, पुणे के एफ.टी.आइ.आइ संस्था के विद्यार्थियोंद्वारा श्री. गजेंद्र चौहान की नियुक्ति के विरुद्ध चलाया गया आंदोलन ! इस से स्पष्ट होता है कि एक फिल्म इन्स्टिट्यूट के विद्यार्थियों में भी विपरीत धर्मनिरपेक्षता का भूत जाकर बैठा है। पिछले वर्षभर में पश्चिम बंगाल में होनेवाले गो-तस्करी की मात्रा साधारण २५ से ३० प्रतिशत न्यून हो गई है; परंतु अब तक वह पूरी तरह रुकी नहीं है। केंद्र में भाजपा एवं प्रधानमंत्री मोदी मिल कर देश चला रहे हैं। यदि भाजपा का विचार किया, तो भाजपा मुसलमानोंका तुष्टिकरण करता रहेगा; परंतु यदि मोदीजी का विचार किया, तो अब भी आशा रखने में कोई आपत्ति नहीं है।

२. पश्‍चिम बंगाल में आतंकवादियोंका केंद्र स्थापित होने में स्थानीय कट्टरपंथियोंका सहभाग

इस देश में आतंकवाद है; परंतु देश का प्रत्येक जिहादी इन संगठनोंसे संलग्न नहीं है। विशेष कर ग्रामवासी जिहादीयोंको कट्टरता की जो सीख दी जाती है, उदा. हिन्दू अर्थात काफिर हिन्दू अर्थात शत्रु इस सीख से हिन्दुओंको कष्ट होता है। आतंकवादी जहां भी रहते हैं वहां वे मुंह छिपाकर सज्जनता का ढोंग कर रहते हैं; इस लिए वे स्थानीय हिन्दुओंको कष्ट नहीं देते। वे छिप कर उनकी सिद्धता करते हैं। सर्वसाधारण हिन्दू ऐसे मुसलमानोंसे नहीं, अपितु स्थानीय मुसलमानोंसे त्रस्त हैं। यह इस्लामिक आतंकवाद नहीं, अपितु इस्लामिक विस्तारवाद है। ये दोनों बातें अलग हैं। अनेक गावों में इस्लाम का जो विस्तार हो रहा है, शासन उसे रोकने में असमर्थ है। इस स्थिति को कौन रोकेगा ? इस लिए जनता में इस संदर्भ में जागृति उत्पन्न होना आवश्यक है; इस लिए इस्लामिक आतंकवाद अस्तित्व में है; परंतु इस्लामिक विस्तारवाद के कारण देश के अंतर्गत जो छोटे पाकिस्तान स्थापित हो रहे हैं, उनके कारण पश्चिम बंगाल में अस्वस्थता है। वहां आतंकवादियोंका तल ही स्थापित हो गया है। वे वहां सिद्धता कर बाहर उसका उपयोग करते हैं। बंगाल के लोग स्थानीय मुसलमानोंके कारण दुखी हैं। सीधे दाऊद, लादेन नहीं, अपितु स्थानीय धर्मांध मुसलमान अपने शत्रु हैं।

३. मुसलमानोंके लिए परिवार नियोजन कर लेना आवश्यक !

यह लडाई सैकडों वर्षपूर्व से है। इस लडाई में हम चाहे सफल हों अथवा विफल हमने इस लडाई में भूमि एवं अपनी जनता गंवार्इं हैं। एक तो अपनी जनता की मृत्यु हुई अथवा वह धर्मपरिवर्तित हुर्इ। यदि भूमि के संदर्भ में विचार किया, तो केवल छोटा हिन्दुस्थान शेष रह गया है। यह लडाई बडी है। इस लडाई के लिए हिन्दुओंको सिद्ध करना तथा उनकी मानसिक सिद्धता करना आवश्यक है। धार्मिक जनसंख्या के आधार पर वर्ष १९४७ में पाकिस्तान अलग राष्ट्र बना। जहां मुसलमान बहुसंख्यक एवं हिन्दू अल्पसंख्यक हुए, वहां पाकिस्तान की स्थापना हुई। इस लिए मुसलमानोंकी जनसंख्या रोकना शासन का दायित्व है। मोदी शासन को चाहिए कि मुसलमानोंद्वारा परिवार नियोजन करा लें। इस के लिए देश में इस्लाम का विस्तारीकरण रोकने हेतु अपनी सरकार पर दबाव तंत्र का उपयोग कर हिन्दुओंकी जनसंख्या न्यून न हो, इस हेतु ध्यान देना चाहिए।

४. समाज में धर्मनिष्ठा उत्पन्न करने हेतु भी हिन्दू धर्मगुरु शिष्योंको प्रेरित करें !

हिन्दुओं में स्वधर्म के प्रति आस्था एवं अन्याय के विरुद्ध प्रतिकार करने की मानसिकता उत्पन्न होना आवश्यक है। कथाकार तथा प्रवचनकारोंको हिन्दुओं में धर्म के विषय में आस्था उत्पन्न होने हेतु प्रयत्न करने चाहिए। रामकृष्ण परमहंस ने बताया था कि जितने व्यक्ति उतने ही ईश्‍वरप्राप्ति के मार्ग हैं। इन मार्गोंद्वारा आप ईश्‍वर तक पहुंच सकते हैं; परंतु वर्तमान में इन तत्त्वोंका अयोग्य प्रकार से उपयोग किया जा रहा है। रामकृष्ण परमहंस ने यह वाक्य केवल हिन्दू धर्म के संप्रदायोंके संदर्भ में कहे थे। उदा. शैव, वैष्णव, शाक्त। यह वाक्य इस्लाम, ईसाई तथा यहुदियोंके लिए नहीं थे; परंतु दुर्भाग्यवश रामकृष्ण मिशनद्वारा इस वाक्य का मिथ्या प्रयोग कर जनता में भ्रम उत्पन्न किया जा रहा है, जो अत्यंत लज्जाजनक बात है। ऐसी घटनाओंके कारण जनता में धर्म के प्रति आस्था उत्पन्न करना असंभव है। कुरान में कहा गया है कि रमजान पूरा होनेपर आप चाहे वहां जाकर हत्या करें। रामकृष्ण मिशन के लोगोंद्वारा ऐसा बताया जा रहा है कि सभी धर्मोंकी सीख एक ही है। अतः रामकृष्ण मिशन को अपराधी मानना चाहिए। यह भगवा धर्मनिरपेक्षतावाद है। तिस्ता सेटलवाड समान लोगोंद्वारा सर्वधर्मसमभाव इत्यादि बातें बताए जाने से उतनी हानि नहीं होगी, जितनी भगवे वस्त्र धारण करनेवाली व्यक्ति के तथाकथित सर्वधर्मसमभाव के उपदेश से। इस भगवी धर्मनिरपेक्षता के लिए रामकृष्ण मिशन को फटकारना चाहिए एवं तत्पश्चात सभी धर्मगुरुओंको धर्म के प्रति निष्ठा उत्पन्न करने हेतु शिष्योंको प्रेरित करना चाहिए। सामाजिक हिन्दू संगठनोंको हिन्दुओंपर होनेवाले अत्याचारोंके विरुद्ध प्रतिकार करने हेतु आगे आना चाहिए एवं समाज को भी उन को समर्थन देना चाहिए।

५. हिन्दू धर्म ही मानवधर्म है !

हम कहते हैं कि हमें ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित करना है; परंतु यह ‘हिन्दू राष्ट्र’ ही है। जब तक भारत में एक भी हिन्दू रहेगा, तब तक इसको हिन्दू राष्ट्र ही कहना पडेगा। यह हिन्दुओंका देश है। प्रश्‍न ऐसा है कि यह ‘हिन्दू राष्ट्र’ है; परंतु हिन्दू राज्य नहीं है। हमें हिन्दू राज्य बनाना पडेगा। हिन्दू विचार से चलनेवाला राज्य चाहिए। हिन्दू धर्म ही मानवधर्म है ! हिन्दू राज्य में सर्वत्र न्याय का वातावरण होगा एवं हिन्दुओंपर अन्याय नहीं होगा।

६. अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन सुंदर एवं शुभ !

हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा आयोजित अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन सुंदर एवं शुभ घटना है। देश के सुशिक्षित लोगोंके लिए ‘हिन्दू राष्ट्र’ एक नई संज्ञा है। इस अधिवेशन के कारण यह संज्ञा सर्वत्र फैल गई।

 – श्री. तपन घोष, अध्यक्ष, हिन्दू संहती, पश्चिम बंगाल

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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