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एेतिहासिक किले प्रेरक हैं तथा उन्हें वारिस के रूप में संजोना आवश्यक है ! – बाबासाहेब पुरंदरे

हमें इस वारिस को इस पद्धति से संजोना चाहिए कि इस के कारण विश्व हमारी ओर देखें – बाबासाहेब पुरंदरे

पुणे (महाराष्ट्र) : ८ अगस्त को दुर्ग फाउंडेशनद्वारा आयोजित दुर्ग छायाचित्र प्रदर्शनी एवं दुर्ग फाउंडेशन के जालस्थल का उद्घाटन शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे के शुभहाथों किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे ने अपना मत व्यक्त करते हुए कहा कि दुर्ग / किले अपना समृद्ध इतिहास है। इन किलोंका उपयोग कर छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपराजित स्वराज स्थापित किया। हिन्दवी स्वराज्य नष्ट करने हेतु सुलतान भीषण प्रचंड सेना लेकर युद्ध करने हेतु आया; परंतु सह्याद्रि के किले एवं सैनिकोंने उसे पराजित किया। ऐसे किलोंने अनेक लोगोंको प्रेरित किया। चाकण के किले ने राजगुरु समान क्रांतिकारियोंको खडा किया।

इन किलों का जतन करना आवश्यक है एवं उस पर लिख कर अथवा कूडा डाल कर उसे खराब नहीं करना चाहिए। हमें इस वारिस को इस पद्धति से संजोना चाहिए कि इस के कारण विश्व हमारी ओर देखें।

इस अवसर पर ज्येष्ठ इतिहास संशोधक डॉ. पांडुरंग बलकवडे, शिवापट्टण केंद्र स्थापित करनेवाले वास्तुविशारद कैलास सोनटक्के इत्यादि मान्यवर उपस्थित थे।

इस अवसर पर डॉ. पांडुरंग बलकवडे ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिन्दवी स्वराज्य के माध्यम से सुराज्य स्थापित किया। विश्व के लिए वंदनीय छत्रपति शिवाजी महाराज की कीर्ति सर्वत्र फैलने तथा भारत के स्वराज्य का सुराज्य में रूपांतर होने हेतु पू. बाबासाहेब पुरंदरे नागरिकोंको आदर्श बना रहे हैं, जिस से सहस्त्रों युवक प्रेरित हो रहे हैं।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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