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इस्लाम कबूलने पर महापंचायत बोली, करेंगे गांव से बहिष्कार

हिसार: दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हिसार के भगाना गांव के करीब १०० दलित परिवारों के द्वारा इस्लाम धर्म अपनाने की खबर ने पूरे हिसार जिले में हड़कंप मचा दिया है। गांव की महापंचायत इस्लाम कबूल करने वाले दलित परिवारों के विरोध में उतर आई है।

पंचायत का कहना है कि अगर दलित परिवार फिर से हिन्दू बनकर गांव लौटते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा नहीं तो उनका गांव से बहिष्कार किया जाएगा। रविवार को दिनभर भगाना गांव में अफरा तफरी का माहौल रहा। हिन्दू महासभा के पदाधिकारियोंं ने भी गांव पहुंच इस्लाम कबूल करने वाले परिवारोंं के दो लोगों से बात कर उन्हेंं समझाने का प्रयास किया।

महासभा ने कहा कि समस्या का समाधान धर्म परिवर्तन नहीं है। सभी परिवारों को दोबारा हिन्दू धर्म में लौट आना चाहिए। वहीं दूसरी ओर गांव में तनाव के माहौल को देखते हुए प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी है। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

इससे पहले शनिवार  करीब सौ दलित परिवार दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और धर्म परिवर्तन का ऐलान कर दया। धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों का कहना है कि हिन्दू धर्म में होते हुए भी लोग उनके साथ समानता का व्यवहार नहीं करते थे। इस कारण उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाने का निर्णय लिया।

गौरतलब है कि हिसार के भगाना में २१ मई २०१२ को गांव के दलितों का दबंगों से विवाद हो गया था। दबंगों ने उनका बहिष्कार कर दिया था। दबंगों ने गांव के खेल मैदान में दलित परिवारों के बच्चों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

इसके बाद गांव के करीब सभी दलित परिवार पलायन कर गए थे। और दबंगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर हिसार के मिनी सचिवालय के समक्ष धरने पर बैठ गए। करीब दो साल तक चला धरना हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की पहल पर खत्म हुआ था। और दलित परिवारों को सुरक्षा और सुविधा का आश्वासन देकर गांव वापस भेजा था। इसे बावजूद दलित परिवारों के कुछ लोग जंतर-मंतर पर धरना दे रहे थे।

स्त्रोत : राजस्थान पत्रिका

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