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मुजफ्फनगर दंगे पर बनी हिन्दू विरोधी फिल्म की स्क्रीनिंग को अखिल भारतीय विधार्थी परिषद ने रुकवाया

दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में शनिवार को डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘मुजफ्फरनगर अभी बाकी है’ के प्रदर्शन को भारतीय जनता पार्टी की छात्र शाखा अखिल भारतीय विधार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विरोध किया है ।

विरोध इस कदर बढ गया कि कॉलेज की फिल्म सोसाइटी की ओर से रखी गई फिल्म की स्क्रीनिंग को एक घंटे के बाद ही बंद करना पड़ा। हालात को काबू में करने के लिए कॉलेज प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी।

कॉलेज के ही पूर्व छात्र नकुल साहनी की इस फिल्म पर एबीवीपी की आपत्ति इस बात को लेकर है कि यह हिंदू विरोधी है और इसमें हिंदूवादी संगठनों व संप्रदाय की छवि को गलत तरीके से दिखाया गया है।

बता दें कि कुछ माह पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के ही श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज की नाटक सोसाइटी के एक नाटक को भी एबीवीपी के विरोध को झेलना पड़ा था।

बहुसंख्य समुदाय के लोगों को दोषी दिखाए जाने पर आपत्ति

फिल्म की विषय पर आपत्ति दर्ज कराने वाले संदेश किराड़ किरोड़ीमल कॉलेज में राजनीति विज्ञान के दूसरे वर्ष के छात्र हैं। फिल्म स्क्रीनिंग के कुछ देर बाद ही उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संगठन (डूसू) में इसकी शिकायत की।

संदेश का कहना है कि फिल्‍म में कई आपत्तिजनक चीजें दिखाई गई हैं। इसमें कुछ बड़ी राजनीतिक हस्तियों और बहुसंख्य हिन्दू समुदाय को इस दंगे को भड़काने का दोषी दिखाया गया है।

संदेश की आपत्ति के बाद फिल्म स्क्रीनिंग के आयोजकों ने उनसे फिल्म पूरी होने के बाद अंत में अपनी आपत्ति दर्ज कराने को कहा लेकिन इस दौरान ही वहां कुछ और लोग आ गए और हंगामा होने लगा। कॉलेज के प्रिंसिपल दिनेश खट्टर फिलहाल दिल्ली में नहीं हैं।

सूचना मिलते के बाद उन्होंने तुरंत ही स्क्रीनिंग रोकने का आदेश दिया ओर सोमवार को सभी पक्षों के साथ बैठकर बात करने की बात कही। प्रिंसिपल का कहना है कि बातचीत के बाद ही तय किया जाएगा कि फिल्म की स्क्रीनिंग करनी है या नहीं।

‘दंगा पीड़ितों के अनुभव पर बनी है फिल्म’

सिर्फ एबीवीपी ही नहीं दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संगठन (डूसू) के अध्यक्ष मोहित नागर ने भी इस स्क्रीनिंग का विरोध किया। उन्होंने बताया कि कॉलेज के छात्रों का कहना था कि हिन्दू संप्रदाय की छवि को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

वहीं फिल्म सोसाइटी से जुड़े छात्रों का कहना है कि फिल्म की स्क्रीनिंग के एक घंटा बीतने पर ही हंगामा शुरू हो गया। फिल्म में मुजफ्फरनगर दंगों के पीड़ितों के इंटरव्यू को रिकॉर्ड किया गया है। इसमें हिंदू संगठनों से लेकर अन्य धर्मों के लोग भी शामिल हैं।

असल में दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में हर हफ्ते यहीं के छात्रों की बनाई फिल्मों की स्क्रीनिंग होती है। पुलिस का कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने इस बारे में कोई औपचारिक शिकायत नहीं लिखवाई है।

सोमवार को कॉलेज प्रशासन और फिल्म सोसाइटी के अधिकारियों की इस बारे में मीटिंग होने की बात कही जा रही है।

स्त्रोत : अमर उजाला

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