गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का संदेश
शिष्य की आध्यात्मिक प्रगति करवाना तथा धर्म ग्लानि होने पर धर्म की पुनर्स्थापना करना, गुरुतत्त्व का कार्य है । आदिगुरु महर्षि व्यास ने कलियुग आरंभ होने के पूर्व ही वेदों का ४ भागों में विभाजन कर धर्म की व्यवस्था बिठाई । जगद्गुरु भगवान श्रीकृष्ण ने कौरवों का विनाश कर युधिष्ठिर के नेतृत्व में धर्मराज्य की स्थापना की । जगद्गुरु आदि शंकराचार्यजी ने अवैदिक मतों का खंडन कर सनातन धर्म की पुनर्रचना की । चाणक्य ने सम्राट चंद्रगुप्त के ध्वज के तले भारत को एकजुट कर राष्ट्र-संस्थापना की । स्वामी विवेकानंद ने सात समुद्र पार हिन्दू धर्म पुर्नस्थापना का प्रयत्न किया ।
गुरुपरंपरा ने धर्मसंस्थापना के लिए यह अपूर्व योगदान दिया है । आज की स्थिति में भारत में सनातन धर्म की पुनर्स्थापना करने हेतु धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना, यह गुरुतत्त्व को कालानुसार अपेक्षित कार्य है । इस धर्मसंस्थापना के कार्य में योगदान देना, यही इस गुरुपूर्णिमा की वास्तविक गुरुदक्षिणा होगी !








