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#KargilVijayDiwas : वो जांबाज, जो घर तो लौटे लेकिन तिरंगे में लिपटकर !

देश विजय दिवस के उपलक्ष्य में अपने वीर सपूतों को याद कर गौरांवित हो रहा है। हम ऐसे ही वीरों की अंतिम कसम को याद कर उन्हें नमन कर रहे हैं। वर्ष-१९९९ में कारगिल युद्ध के दौरान वीरों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को सबक सिखाया था।

करीब दो माह तक लगातार युद्ध कर पाकिस्तानी सेना को छठीका का दूध याद दिला दिया था। पाकिस्तानी ऊंची पहाड़ियों से बम बरसा रहे थे, लेकिन हमारे वीरों ने जान की परवाह किए बगैर दुर्गम पहाड़ियों को पार किया और दुश्मन सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

लड़ाई पर जाने से पहले वीरों ने अपने परिवार वालों से कहा था कि दुश्मन को खदेड़कर ही घर लौटेंगे। हुआ भी ऐसा ही। उन्होंने दुश्मन सेना को कारगिल से खदेड़ दिया और घर भी लौटे, लेकिन तिरंगे में लिपटकर।

मनोज ने खाई थी तिरंगा लहराने की कसम

मुजफ्फरनगर की गांधी कॉलोनी में २९ अगस्त १९६९ को जन्मे मेजर मनोज तलवार सच्चे देशभक्त थे। ११ जून १९९९ को १९ हजार फीट ऊंची चोटी टूरटोक लद्दाख में वह सैनिकों का नेतृत्व करते हुए ऊपर चढ़े थे। चोटी से पाक सेना बम बरसा रही थी, लेकिन मेजर के कदम नहीं डगमगाए। उन्होंने कसम खाई थी कि चोटी पर तिरंगा लहराकर ही लौटूंगा। १३ जून को उन्होंने तिरंगा लहराया, लेकिन दुश्मनों की गोलियों का सामना करते हुए वह शहीद हो गए।

उनके पिता पीएल तलवार ने बताया कि जब मनोज से अंतिम बार बात हुई थी तो उन्होंने लड़ाई की बात बताई थी। बेटे ने कहा था कि वह तभी लौटेगा, जब दुश्मनों को खदेड़ देगा। पीएल तलवार ने कहा कि लड़ाई में शहीद हुआ हर जवान मेरे बेटे की तरह था। उनका जज्बा हिमालय की चोटी से भी ऊपर था। बेटे की आवाज कड़क थी और दिल में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी। पीएल तलवार की आंखों में एक दर्द आज भी साफ झलकता है। वह है शहीद की प्रतिमा हटाने का।

पीएल तलवार कहते हैं कमिश्नरी आवास चौराहे के बीचों बीच मनोज की प्रतिमा लगी थी, लेकिन एमडीए के अधिकारी और ठेकदार ने सौंदर्यीकरण के नाम पर उसे हटा दिया है। अब प्रतिमा को सड़क के किनारे फुटपाथ पर लगवा दिया है। इससे वह बेहद आहत हैं।

‘दुश्मन को खदेड़कर ही चैन मिलेगा’

सीएसएम यशवीर सिंह १२ जून १९९९ में तोलोलिंग पहाड़ी पर पाकिस्तानी सेना से युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे। उनकी पत्नी मुनेश आज भी अपने पति के आखिरी शब्दों को याद कर भावुक हो जाती हैं। मुनेश ने बताया कि जब पति से अंतिम बार बात हुई थी तो वह कुछ परेशान थे।

उन्होंने बताया था कि दुश्मन ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया है। हमें उन्हें खदेड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसे पूरा करना ही मेरा धर्म है। परिवार की कुशलता को लेकर भी यशवीर चिंतित थे। शहीद यशवीर का परिवार रोहटा रोड पर रहता है।

मुनेश ने बताया कि पति की शहादत के बाद फाजलपुर क्षेत्र के सैकड़ों युवक सेना में भर्ती हुए। अब भी सैकड़ों युवक भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। मुनेश चार साल से लगातार रोहटा रोड बाईपास पर सीएनजी पेट्रोल पंप के लिए प्रयास कर रही हैं, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली है।

स्त्रोत: अमर उजाला

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