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AIPMT परिक्षा : चीफ जस्टिस ने कहा – एक दिन हिजाब न पहना तो खत्म नहीं होगी आस्‍था

नई दिल्ली – सर्वाेच्च न्यायालय ने कहा है कि अगर कोई एक दिन बिना हिजाब पहने परीक्षा देने चला जाए तो उसकी आस्था खत्म नहीं हो जाएगी। सर्वाेच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट (AIPMT) में हिजाब पहनकर परीक्षा देने की मांग करती एक पीआईएल पर सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने यह पीआईएल खारिज कर दी। बता दें कि एआईपीएमटी शनिवार को ही होनी है। इसमें देशभर के ५० शहरों से ६.३५ लाख स्टूडेंट्स हिस्सा लेंगे।

एआईपीएमटी इससे पहले ३ मई को हुई थी। लेकिन हरियाणा में पेपर लीक हो गया। बड़े पैमाने पर नकल का मामला भी सामने आया। इसके बाद १५ जून को सर्वाेच्च न्यायालय ने परीक्षा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने २५ जुलाई को दोबारा टेस्ट कराने का आदेश दिया था। इस मामले में पीआईएल स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया ने दायर की थी जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हुई।

कोर्टरूम में क्या हुआ ?

पिटीशनर्स के वकील संजय हेगड़े ने अपनी दलील में कहा कि ड्रेस कोड से जुड़े सीबीएसई के सारे निर्देश मंजूर हैं लेकिन यह शर्त मंजूर नहीं है कि लडकियां हिजाब पहनकर नहीं आ सकतीं। हिजाब पहनना जरूरी धार्मिक प्रथा है। ऐसा नहीं हुआ तो लडकियों को परीक्षा में नहीं बैठने पर मजबूर होना पड़ेगा।

– वकील के इतना कहते ही बेंच ने कहा- Oh, come on! Please.

बेंच ने आगे कहा – आस्था एक ऐसी चीज है जो किसी खास तरह के कपड़े को पहनने से काफी अलग है। अगर आप एक दिन बिना हिजाब के परीक्षा सेंटर चले जाएंगे तो आपकी आस्था खत्म नहीं हो जाएगी।

– सर्वाेच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि एआईपीएमटी सर्वाेच्च न्यायालय के ही कहने पर दोबारा हो रही है। हमने पहले यह परीक्षा रद्द की थी क्योंकि बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई थी। सीबीएसई ने अब कुछ दिशा-निर्देश इसलिए दिए हैं ताकि परीक्षा बिना किसी गड़बड़ी के हो। हम इतने छोटे मुद्दे पर दखल नहीं देंगे।

– बेंच का रुख देखते हुए वकील हेगड़े ने खुद ही पीआईएल वापस ले ली।

क्या है मामला ?

CBSE ने एक ऑर्डर में कहा था कि २५ जुलाई को होने वाली एआईपीएमटी में स्कार्फ या फुल स्लीव्स वाले कपड़े पहन कर आने पर रोक रहेगी। मुस्लिम स्टूडेंट्स के लिए ड्रेस कोड लागू किए जाने पर कई मुस्लिम ऑर्गनाइजेशंस ने नाराजगी जाहिर की थी। इनका कहना था कि स्कार्फ और फुल स्लीव पहनने पर रोक गलत है और इससे उनकी धार्मिक आस्था को चोट पहुंचती है।

केरल हाईकोर्ट ने दो मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनकर परीक्षा देने की इजाजत दी थी लेकिन ड्रेस कोड के नियमों में दखल देने से इनकार कर दिया था। इसी दौरान सर्वाेच्च न्यायालय में भी पीआईएल दायर की गई।

स्त्रोत : दैनिक भास्कर

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