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जयपुर में तोडे गए रोजगारेश्वर महादेव मंदिर से बेरोजगारों को मिलता था रोजगार !

 

नई दिल्‍ली : कहा जाता है क‌ि विकास के लिए लोगों को आस्‍था और संस्कृति का बलिदान करना पड़ता है, इसका ताजा उदाहरण मिला जयपुर में। जहां मेट्रो की राह से बाधाएं दूर करने के लिए शहर के प्रमुख मंदिरों को एक झटके में ही नेस्तनाबूद कर दिया गया।

इनमें सबसे प्रमुख मंदिर था रोजगारेश्वर महादेव मंदिर। जयपुर मेट्रो के लिए भीमकाय क्रेन द्वारा तोड़े गए जिस मंदिर की फोटो सबसे ज्यादा मीडिया और सोशल मीडिया पर छाई रही वह रोजगारेश्वर मंदिर की ही थीं।

रोजगारेश्वर मंदिर को लेकर जयपुर में आस्‍था का ये आलम ‌था कि अभी तक मंदिरों के ध्वस्तीकरण के दौरान चुप्पी साधे बैठे शहरवासियों के सब्र का बांध एक झटके में ही टूट गया। लोग सड़कों पर उतर आए।

आश्चर्यजनक रूप से प्रशासन के इस कदम के विरोध में भाजपा का मातृत्व संगठन आरएसएस भी शहरवासियों के समर्थन में आ गया। यही कारण रहा कि राजस्‍थान सरकार को रोजगारेश्वर मंदिर सहित कुल २२ मंदिरों को दोबारा निर्मित कराने का निर्णय लेना पड़ा।

आइए प्रकाश डालते हैं रोजगारेश्वर मंदिर की महिमा पर जहां रोज सैकडों लोग रोजगार की आस लेकर पहुंचते थे।

बिना मंदिर में दर्शन किए इंटरव्यू देने नहीं जाते थे लोग

पिंक सिटी जयपुर की छोटी चौपड़ में स्थित रोजगारेश्वर मंदिर करीब ढाई सौ साल पुराना बताया जाता है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव यहां आने वाले बेरोजगार लोगों की रोजगार की मुराद पूरी करते हैं। सोमवार के दिन यहां भक्‍तों का तांता लगा रहता है।

जयपुर का यह मंदिर लोगों में जबरदस्त आस्‍था का केन्द्र था। कहा जाता है कि शहर के लोग कहीं इंटरव्यू देने जाने से पहले इस मंदिर में भगवान रोजगारेश्वर महादेव का दर्शन किए बगैर नहीं जाते थे। महादेव का आशीर्वाद लेकर ही लोग नौकरी तलाशने निकलते थे।

यही कारण था कि प्रशासन ने लोगों के विरोध को देखते हुए इस मंदिर को तोड़ने सुबह साढ़े चार बजे ही काम शुरू कर दिया था। लेकिन इसका पता चलते ही भारी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए।

हालांकि पुलिस पूरी तैयारी से पहुंची थी, नतीजतन भारी भरकम पुलिस फोर्स के चलते श्रद्धालुओं की एक न चल सकी। प्रशासन की यही दबंगई उसके लिए गले की फांस बन गई और इसके विरोध में आंदोलन शुरू हो गया।

जयपुर में मंदिरों को तोड़े जाने के बढते विरोध और चक्का जाम के बाद अब राजस्थान सरकार कुछ अति प्राचीन मंदिरों को उनके मूल स्थान पर फिर से बनवाने के लिए राजी हो गई है।

ये मंदिर कथित रूप से मेट्रो कॉरिडोर के बीच में पड़ने के कारण हटाए गए थे। इसके लिए मंदिर संघर्ष समिति ने करीब दो हफ़्ते पहले चक्का जाम किया था। इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का पूरा समर्थन था।

मिला सकारात्मक परिणाम

समिति के प्रवक्ता विवेक गुप्त के मुताबिक़ इस आंदोलन का सकारात्मक परिणाम सामने आया है । सरकार के साथ संवाद से सभी मांगों पर सहमति बनी है, जयपुर में मेट्रो रेल का निर्माण कार्य।

शहर में पुराने मंदिर तोड़े जाने पर संघ और जनता की तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। समिति के संयोजक बद्री नारायण चौधरी ने बीबीसी को बताया, “समिति के सभी बिंदुओं पर सहमति बनी है पर सरकार ने उचित कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय माँगा है।”

स्रोत : Amarujala

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