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पाकिस्तान में शार्ली एब्दो के हमलावरों को दी गई श्रद्धांजलि

माघ कृष्ण पक्ष एकादशी, कलियुग वर्ष ५११६

आतंकवाद का  समर्थक करनेवाला पाक !

                                 पाक में क्वाची बंधुओं के समर्थन में रैली

पेशावर : पिछले सप्ताह फ्रांस की व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो पर हुए हमले की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है लेकिन पाकिस्तान में कई लोग इस घटना को अंजाम देने वालों के समर्थन में सड़कों पर उतरे। मंगलवार को पेशावर में दर्जनों लोग यह हमला करने वाले भाइयों को श्रद्धांजलि देने उतरे। हमला करने वाले शरीफ और सईद क्वाची को कुछ दिन बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मार गिराया था।

स्थानीय धर्मगुरु मौलाना पीर मोहम्मद चिश्ती के नेतृत्व में करीब ६० लोगों ने शरीफ और सईद क्वाची के लिए प्रार्थना की। क्वाची बंधुओं ने ही ७ जनवरी को शार्ली एब्दो के दफ्तर पर हमला कर वहां काम करने वाले कई लोगों सहित १२ लोगों को मार डाला था। श्रद्धांजलि देने वाले क्वाची बंधुओं को ‘शहीद’ कहते हुए ‘एब्दो पब्लिकेशन मुर्दाबाद’ और ‘सईद क्वाची अमर रहे, शरीफ क्वाची अमर रहे’ जैसे नारे लगा रहे थे। चिश्ती ने कहा, ‘इन दो भाइयों ने दुनिया के सभी मुस्लिमों का कर्ज चुकाया है और इसके लिए हम उन्हें सलाम करते हैं।’

भले ही यह प्रदर्शन आकार में छोटा था लेकिन इससे साफ दिखता है कि कैसे मुस्लिम वर्ल्ड के कुछ हिस्सों में पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों को लेकर गुस्सा है। पाकिस्तान में जहां ईशनिंदा कानून काफी कड़े हैं पैगंबर का अपमान करने पर मौत की सजा होती है।

लाहौर के पंजाब यूनिवर्सिटी में इस्लामिक स्टडीज के प्रफेसर औरंगजेब अलहाफी का कहना है कि उन्होंने इस प्रार्थना में धार्मिक ड्यूटी के तहत हिस्सा लिया। अलहाफी ने कहा, ‘अगर होलोकॉस्ट (जर्मनी में नाजियों द्वारा यहूदियों के जनसंहार) का जिक्र आते ही अभिव्यक्ति की आजादी खत्म हो जाती है तो इसे पैगंबर के सम्मान की बात पर भी खत्म हो जाना चाहिए।’

पाकिस्तान में फिलहाल १४ लोग ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा का इंतजार कर रहे हैं। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि ईशनिंदा कानूनों के जरिए अधिकांशत: अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है या आपसी रंजिश मिटाने के लिए हो रहा है।

इस बीच शार्ली एब्दो ने कहा है कि वह अपने अगले कवर फिर पैगंबर का कार्टून छापेगी। इस कार्टून में रोते हुए पैगंबर दिखेंगे जिनके हाथों में तख्ती होगी और लिखा होगा ‘मैं हूं शार्ली।’

स्त्रोत : नवभारत टाईम्स 

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