
कोल्हापुर – करवीर निवासिनी श्री महालक्ष्मी देवी मंदिर केवल महाराष्ट्र ही नहीं, अपितु संपूर्ण भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आस्था केंद्र और स्थापत्य विरासत स्मारक है। मंदिर के विभिन्न भागों में उपलब्ध शिलालेख, शिल्पपट्टिकाएं, वास्तु अवशेष तथा स्थापत्य विशेषताएं केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, अपितु इतिहास, पुरातत्त्व, अभिलेखशास्त्र और कला इतिहास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए मंदिर के संरक्षण एवं संवर्धन की प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय विरासत संरक्षण सिद्धांतों, भारतीय पुरातात्विक मानकों तथा शास्त्रोक्त संरक्षण पद्धतियों का कठोरता से पालन किया जाए, इस मांग को लेकर सकल हिंदू समाज की ओर से निवासी उपजिलाधिकारी गजानन गुरव को ज्ञापन सौंपा गया।
इस अवसर पर हिंदू एकता आंदोलन के शहराध्यक्ष श्री गजानन तोडकर, शिवसेना के उपजिलाप्रमुख श्री उदय भोसले, हिंदू जनजागृति समिति के श्री शिवानंद स्वामी, महाराजा प्रतिष्ठान के संस्थापक श्री निरंजन शिंदे, नमो नमो के जिलाध्यक्ष श्री विक्रम जरग, मराठा तितुका मेळवावा के श्री योगेश केरकर, हिंदू महासभा के जिलाध्यक्ष श्री राजेंद्र तोरस्कर, श्री अभिजीत पाटील सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

श्री महालक्ष्मी देवी मंदिर में चल रहे संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों के संबंध में प्रमुख मांगें
1. मंदिर परिसर में ऐतिहासिक एवं अभिलेखीय दृष्टि से महत्वपूर्ण शिलालेखों के संरक्षण के लिए आवश्यक अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था, संरक्षक आवरण (कवर) अथवा वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पर्याप्त रूप से लागू होती हुई दिखाई नहीं दे रही है।
2. यदि संरक्षण कार्यों के दौरान इन शिलालेखों अथवा मूल स्थापत्य अवयवों को कोई क्षति पहुंचती है, तो यह सांस्कृतिक विरासत के लिए अत्यंत गंभीर विषय होगा। इसलिए यह जानकारी सार्वजनिक की जाए कि यह संरक्षण एवं संवर्धन परियोजना किस तकनीकी योजना, किन संरक्षण सिद्धांतों तथा किस विशेषज्ञ समिति के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है।
3. मंदिर के संरक्षण एवं संवर्धन से संबंधित विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर), तकनीकी योजना, अपनाई जाने वाली संरक्षण पद्धतियाँ, उपयोग में लाई जाने वाली सामग्री तथा संरक्षण के बाद मंदिर के अपेक्षित स्वरूप की जानकारी श्रद्धालुओं, शोधकर्ताओं, विरासत संरक्षण विशेषज्ञों तथा आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराई जाए।
4. मंदिर के सामने स्थित गरुड़ मंडप के संरक्षण कार्य के दौरान आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई, जिसके कारण मंडप का मूल भाग उखड़ गया और आज भी उस कार्य को दोबारा करना पड़ रहा है। गरुड़ मंडप के मूल पत्थरों के उखड़ने की घटना गंभीर है। साथ ही मंदिर परिसर में कार्य करते समय अनेक प्राचीन मंदिरों और शिल्पीय अवशेषों के मिलने की संभावना है, इसलिए उनके संरक्षण और सुरक्षा के लिए भी उचित एवं वैज्ञानिक उपाय किए जाएं।








