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शरद पवार के ‘वैकुंठगमन’ संबंधी अनादरपूर्ण वक्तव्य पर कड़ी कार्रवाई हों – हिन्दू जनजागृति समिति

संतों के इतिहास तथा वारकरी अस्मिता का अपमान करने का आरोप !

मुंबई – जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज के ३७५ वें वैकुंठगमन समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस शरद पवार पक्ष के प्रमुख शरद पवार द्वारा दिए गए विवादित वक्तव्य के विरोध में हिन्दू जनजागृति समिति ने मुख्यमंत्री तथा गृहमंत्री से कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है । बराबर आषाढी वारी के पवित्र समय में हिन्दू एवं वारकरी समाज की भावनाएं आहत करने का आरोप ज्ञापन में लगाया गया है । पुणे के आकुर्डी में हुए विशेष कार्यक्रम में शरद पवार ने कहा था, ‘‘आज के समय में वैकुंठगमन वगैरा कहना मुझे स्वीकार नहीं है । एक विशिष्ट वर्ग ने अपने कृत्यों को छिपाने के लिए ये बातें थोपीं तथा उन्हें सच मानने जैसा किया ।’’ इस पर समिति ने तीव्र आपत्ति जताई ।

ज्ञापन में आगे कहा गया है कि :

१. जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज का सदेह वैकुंठगमन केवल एक भावनात्मक श्रद्धा नहीं है, अपितु यह घटना वारकरी परंपरा एवं संत साहित्य का पवित्र मूल (केंद्र बिंदु) है । संत बहिणाबाई, संत निळोबाराय के अभंगों में, साथ ही महिपतीबुवा के ‘भक्तविजय’ तथा ‘भक्तलीलामृत’ जैसे प्रामाणिक ग्रंथों में इसका सविस्तर वर्णन किया गया है ।

२. स्वयं को प्रगतिशील (पुरोगामी) और तर्कवादी दिखाने की होड में राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर संतों के इतिहास एवं वारकरी अस्मिता को तोड-मरोड कर प्रस्तुत किया जाता है ।

३. शरद पवार ने इससे पहले भी वारकरी संप्रदाय पर आपत्ति जताते हुए उन्हें धर्मांध ठहराने का प्रयास किया था एवं हिन्दू देवताओं के विषय में आपत्तिजनक बयान देनेवालों को मूक सहमति दी थी ।

४. ‘बार-बार हिन्दू धर्म तथा वारकरी संप्रदाय की श्रद्धा को कुचलने का अधिकार किसी को भी नहीं दिया गया है’, ऐसी संतप्त प्रतिक्रिया वारकरी संगठन एवं विचारक व्यक्त कर रहे हैं ।

५. ‘इस संपूर्ण पृष्ठभूमि पर शरद पवार अपने वैकुंठगमन संबंधी विवादित वक्तव्य को तुरंत वापस लें एवं समस्त वारकरी संप्रदाय, विठ्ठल भक्त तथा हिन्दू भाइयों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगें’, ऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समिति ने की है ।

६. महाराष्ट्र के सामाजिक सौहार्द को बिगाडने व समाज में जानबूझकर वैचारिक दरार (तनाव) उत्पन्न करने का प्रयास करने के प्रकरण में गृह मंत्रालय तथा राज्य शासन इसकी गंभीर संज्ञान लेकर उचित कानूनी जांच एवं कठोर कार्रवाई करे, ऐसी आग्रही विनंती मुख्यमंत्री तथा गृहमंत्री से की गई है ।

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