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जम्मू-कश्मीर : सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों में आतंकवादियों और अलगाववादियों का महिमामंडन करती पुस्तकें

पुस्तक में आतंकवादी मकबूल भट को ‘शहीद’ तथा अलगाववादियों को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ बताया गया

श्रीनगर (कश्मीर) – एक ओर सरकार राज्य में सामान्य स्थिति होने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर नई पीढी को हिंसा का महिमामंडन करने वाली सामग्री उपलब्ध कराए जाने की घटना सामने आई है । जम्मू-कश्मीर की समग्र शिक्षा नीति के अंतर्गत स्कूलों के पुस्तकालयों में उपलब्ध कराई गई ‘ग्रेट एंड लेजेंडरी पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर’ नामक पुस्तक में आतंकवादी मकबूल भट को ‘शहीद’ तथा अलगाववादी नेताओं को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है । यह पुस्तक ओबेरॉय बुक्स सर्विसेज नामक निजी प्रकाशन संस्था द्वारा प्रकाशित की गई है, जिसके लेखक हिलाल अहमद तथा संतोष मीणा हैं ।

१. जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स फोरम ने यह पुस्तक सार्वजनिक करते हुए राज्य सरकार की मंशा पर प्रश्न उठाए हैं तथा संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है ।

२. फोरम के उपाध्यक्ष रघु मेहता तथा ट्रस्टी दीपक कपूर ने बताया कि पुस्तक में आतंकवादी मकबूल भट को ‘शहीद-ए-आजम’ तथा अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर अहमद शाह, मसरत आलम तथा मौलवी फारूक को ‘कश्मीर के स्वतंत्रता सेनानी’ के रूप में चित्रित किया गया है ।

३. राज्य सरकार ने समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत शैक्षणिक वर्ष २०२५-२६ के लिए यह पुस्तक खरीदी एवं राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों में उपलब्ध कराई ।

४. पुस्तक में मकबूल भट पर आधारित एक अध्याय में भारत को ‘आक्रमणकारी’ बताया गया है । साथ ही यह भी लिखा गया है कि मकबूल ने कश्मीर की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया।

५. जबकि वास्तविकता यह है कि मकबूल भट को तत्कालीन अपराध अन्वेषण विभाग के पुलिस अधिकारी अमर चंद तथा एक भारतीय राजनयिक की हत्या के कारण ११ फरवरी १९८४ को फांसी दी गई थी ।

आठ शिक्षा अधिकारी निलंबित, जांच के आदेश

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई दो पुस्तकों में अलगाववाद से जुड़ी सामग्री पाए जाने के बाद बड़ी कार्रवाई की है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग ने आठ शिक्षा अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और एक संविदा कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। साथ ही मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने शनिवार को दो विवादित प्रकाशनों में अलगाववादियों का कथित तौर पर महिमामंडन करने के मामले में FIR दर्ज की और छापेमारी शुरू कर दी है।

प्रशासन ने कहा कि चयन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और उचित जांच नहीं की गई, जिससे ऐसी सामग्री वाली किताबें स्कूलों तक पहुंच गईं। इसे सरकारी कर्मचारियों की गंभीर चूक माना गया है।

निलंबित अधिकारियों में समग्र शिक्षा के कोऑर्डिनेटर लाइब्रेरी, असिस्टेंट कोऑर्डिनेटर, विभिन्न जिलों के प्रिंसिपल और लेक्चरर सहित कुल आठ अधिकारी शामिल हैं। सभी को निलंबन अवधि में प्रशासनिक विभाग से संबद्ध रखा जाएगा।

इसके अलावा एक संविदा कंप्यूटर सहायक को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया है। प्रशासन ने संबंधित लेखकों और प्रकाशकों को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया है और उनके द्वारा प्रकाशित सभी सामग्री को केंद्र शासित प्रदेश से वापस लेने के निर्देश दिए हैं।

संपादकीय टिप्पणी
इससे स्पष्ट होता है कि कश्मीर से अनुच्छेद ३७० हटाए जाने के बाद भी नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार तथा प्रशासन की आतंकवादियों तथा अलगाववादियों का महिमामंडन करने की प्रवृत्ति समाप्त नहीं हुई है । यदि कश्मीर में पुनः आतंकवाद एवं अलगाववाद बढे, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
— संपादक, हिंदू जनजागृति समिति
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