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श्री तुळजाभवानी मंदिर की सहस्रों एकड भूमि के संदर्भ में महाराष्ट्र मंदिर महासंघ द्वारा दिए गए ज्ञापन का प्रभाव !
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१५ दिनों में प्रतिवेदन (रिपोर्ट) प्रस्तुत करने का आदेश

धाराशिव : महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री सुनील घनवट ने श्री तुळजाभवानी देवी मंदिर के स्वामित्व वाली सहस्रों एकड भूमि के घोटाले की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था । इस विषय की गहन जांच कर देवस्थान की समस्त भूमि तत्काल मंदिर के नियंत्रण में लेने के विषय में उन्होंने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को एक ज्ञापन सौंपा था । इस संदर्भ में धाराशिव के जिलाधिकारी श्री कीर्ति पुजार ने एक ३ सदस्यीय समिति का गठन किया है । इसमें अपर जिलाधिकारी श्रीमती ज्योति पाटिल को अध्यक्ष, उपविभागीय अधिकारी ओंकार देशमुख को सदस्य-सचिव, तथा शासकीय अधिवक्ता (सरकारी वकील) महेंद्र देशमुख को सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है । जिलाधिकारी द्वारा दिए गए आदेश में उल्लेख किया गया है कि यह समिति २५ जून को दिए गए ज्ञापन के परिप्रेक्ष्य में समस्त अभिलेखों (दस्तावेजों) का सत्यापन कर गहन जांच करे तथा १५ दिनों में अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करे ।
तुळजाभवानी भूमि घोटाले के विषय में मंदिर प्रशासन अनभिज्ञ, आखिर प्रशासन किसे बचा रहा है? – मंदिर महासंघ
९ जुलाई २०२६
तुलजापुर मंदिर प्रशासन का स्पष्टीकरण यानी ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’!
भूमि घोटाले के प्रमाण सरकार के पास उपलब्ध !

धाराशिव : महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, निजाम सरकार ने श्री तुलजाभवानी मंदिर संस्थान को 1668.14 हेक्टेयर (अर्थात 4,122.07 एकड़) भूमि दी थी। लेकिन इस बात की जानकारी तुलजापुर मंदिर संस्थान को न होना, प्रशासन की लचर और गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली का सबसे बड़ा उदाहरण है। मंदिर प्रशासन खुद के पास केवल 400 एकड़ भूमि होने का दावा करके अपनी घोर अक्षमता पर पर्दा डाल रहा है। “400 एकड़ का आंकड़ा आगे करके मंदिर प्रशासन आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रहा है?” यह सवाल उठाते हुए महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के कानूनी सलाहकार और तुलजापुर मंदिर घोटाले के विरुद्ध कानूनी लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता (पू.) सुरेश कुलकर्णी ने दृढ़ संकल्प व्यक्त किया कि मंदिर की भूमि वापस पाने और करोड़ों भक्तों की आस्था की रक्षा के लिए वे अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
वे धाराशिव में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित कर रहे थे। इस प्रेसवार्ता में मंदिर महासंघ के सोलापुर-धाराशिव जिला संगठक श्री विनोद रसाल, हिंदू जनजागृति समिति के श्री अरविंद पानसरे, राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति के जिला संयोजक एडवोकेट सतीश गाजुल और सनातन संस्था के श्री हीरालाल तिवारी उपस्थित थे।
एडवोकेट (पू.) सुरेश कुलकर्णी ने आगे कहा, “जब हमने हिंदू जनजागृति समिति की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ में जनहित याचिका (क्र. 21/2018) दायर की थी, तब हमने राजस्व व वन विभाग, गृह विभाग, विधि व न्याय विभाग, जिलाधिकारी और श्री तुलजापुर देवस्थान ट्रस्ट—इन पांच लोगों को पक्षकार बनाया था। उसी समय धाराशिव के जिलाधिकारी ने तुलजापुर भूमि घोटाले की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। उसमें विधि व न्याय विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव एम.एन. गिलानी (जो बाद में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने) का 1668.14 हेक्टेयर भूमि घोटाले से संबंधित पत्र भी संलग्न था। तब पक्षकार होने के बावजूद तुलजापुर मंदिर प्रशासन ने आपत्ति जताकर न्यायालय में हलफनामा (Affidavit) क्यों नहीं दायर किया?”
मंदिर की जमीनों में घोटाला हुआ है, यह केवल मंदिर महासंघ नहीं कह रहा है, बल्कि राज्य सरकार ने स्वयं इसे आधिकारिक दस्तावेजों में स्वीकार किया है। इन दस्तावेजों पर विधि व न्याय विभाग के प्रधान सचिव और मंत्री के हस्ताक्षर हैं। न्यायालय में प्रतिवादी होने के बावजूद मंदिर प्रशासन को इसकी जानकारी कैसे नहीं है? जनता को मंदिर प्रशासन से इसका जवाब मांगना चाहिए।

श्री तुलजाभवानी मंदिर की 4,122.07 एकड़ भूमि घोटाले का विवरण:
1. तुलजाभवानी ट्रस्ट के नाम पर 1374.87 हेक्टेयर (लगभग 3,397 एकड़) भूमि का मालिकाना हक होने के बावजूद, इसका प्रत्यक्ष कब्जा चार मठों के निजी व्यक्तियों के पास है और प्रशासन के पास इसका कोई कानूनी स्पष्टीकरण नहीं है। असल में, यह भूमि उस समय मठों को मंदिर की विभिन्न सेवाएं करने के लिए ‘सनद’ के रूप में दी गई थी। लेकिन आज उन जमीनों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो चुका है।
2. जगदंबा ट्रस्ट के नाम पर मौजूद 163.12 हेक्टेयर (लगभग 403 एकड़) भूमि को तत्कालीन उप-जिलाधिकारी ने मंदिर ट्रस्ट को अंधेरे में रखकर गैरकानूनी तरीके से निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया।
3. देवस्थान की जमीन पर ‘काश्तकारी कानून’ (कुळ कायदा) लागू नहीं होता, इसके बावजूद 25.51 हेक्टेयर भूमि में से 3.04 एकड़ भूमि को ‘संरक्षित काश्तकार’ घोषित कर बिक्री पत्र (दिनांक 21.07.1981) के माध्यम से बेच दिया गया।
4. एक हेड क्लर्क (अव्वल कारकून) ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर गैरकानूनी तरीके से 105.64 हेक्टेयर (लगभग 261 एकड़) भूमि 73 व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दी।
5. अपसिंगा (तालुका तुलजापुर) में गट क्रमांक 357/3 और 357/4 की जमीन 15 अक्टूबर 1975 और 1979 की अवैध फेरफार प्रविष्टियां दिखाकर हस्तांतरित कर दी गई। वहीं उफला (जिला धाराशिव) में गट क्रमांक 107 की 64 हेक्टेयर (158 एकड़) भूमि को अवैध रूप से हड़प लिया गया।
प्रशासन का खिलवाड़ और करोड़ों भक्तों से विश्वासघात: हैरानी की बात यह है कि जमीन घोटालों में शामिल संबंधित क्लर्क और अन्य कनिष्ठ कर्मचारियों को कार्रवाई के नाम पर नौकरी से निकाल दिया गया था; लेकिन कुछ समय बाद उन्हें वापस सरकारी सेवा में ले लिया गया। अगर प्रशासन का काम ऐसा ही है, तो हड़पी गई हजारों एकड़ जमीन मंदिर को वापस कैसे मिलेगी? क्या बिना बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप के एक क्लर्क मंदिर की 261 एकड़ जमीन दूसरों को दे सकता है? यह पूरी मिलीभगत करोड़ों भक्तों के साथ खुला विश्वासघात है।
ऐसा ही एक मामला ‘पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान प्रबंधन समिति’ के संबंध में भी सामने आया था, जहां देवस्थान के स्वामित्व वाली 25,000 एकड़ भूमि में से लगभग 8,000 एकड़ भूमि का आधिकारिक रिकॉर्ड ही गायब कर दिया गया है। पंढरपुर देवस्थान के पास भी 1,200 एकड़ जमीन होने के बावजूद मंदिर को उससे एक रुपये की भी आय नहीं हो रही थी। अंततः हिंदू जनजागृति समिति और हिंदू विधिज्ञ परिषद ने कानूनी लड़ाई लड़कर वह 1,200 एकड़ जमीन वापस मंदिर को दिलाई।
तुलजापुर मामले में भी मंदिर की भूमि हड़पने वालों और दानपेटी लूटने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर हम सुप्रीम कोर्ट तक गए हैं। जब तक यह पूरी 4,122.07 एकड़ भूमि अतिक्रमण मुक्त होकर मंदिर के पूर्ण नियंत्रण में नहीं आ जाती, तब तक हमारी यह कानूनी लड़ाई इसी तरह जारी रहेगी!
9 जुलाई
महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के प्रयासों को सफलता : तुलजाभवानी देवी की 4000 एकड भूमि के महाघोटाले की गहन जांच करने के निर्देश
राजस्व मंत्री के जिलाधिकारी को निर्देश!

मुंबई – लाखों हिंदू श्रद्धालुओं की कुलदेवी तुलजापुर स्थित श्री तुलजाभवानी देवी की 4 हजार 121 एकड़ से अधिक की इनामी भूमि के अवैध हस्तांतरण और बिक्री मामले की अब राज्य सरकार द्वारा जांच की जाएगी। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक श्री सुनील घनवट द्वारा सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने धाराशिव के जिलाधिकारी को इस संबंध में तुरंत एक जांच समिति गठित कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। तत्कालीन निजाम सरकार ने श्री तुलजाभवानी देवी को 1 हजार 666.14 हेक्टेयर यानी लगभग 4 हजार 121.14 एकड़ भूमि इनाम के रूप में दी थी। कानूनन इस जमीन की खरीद-बिक्री नहीं की जा सकती और इस पर ‘किराया (कुळ) कानून’ भी लागू नहीं होता। इसके बावजूद, राजस्व अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों की मिलीभगत से हजारों एकड़ जमीन हड़पने का आरोप है।

श्री तुलजाभवानी संस्थान के नाम पर कागजों में 3 हजार 397 एकड़ भूमि दर्ज है, लेकिन इसका वास्तविक कब्जा चार मठों से जुड़े निजी व्यक्तियों के पास है। इसके अलावा, जगदंबा न्यास (ट्रस्ट) के नाम पर दर्ज 403 एकड़ जमीन को मुख्य न्यास को अंधेरे में रखकर सीधे निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया गया। कानून का उल्लंघन करते हुए 63.03 एकड़ जमीन में से कुछ हिस्से को ‘संरक्षित किरायेदार’ (प्रोटेक्टेड टेनेंट) दिखाकर अवैध रूप से बेच दिया गया, जबकि एक क्लर्क (अव्वल कारकून) ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए 261 एकड़ जमीन को 73 निजी व्यक्तियों के नाम पर 7/12 (भूलेख) पर दर्ज कर दिया। इसके अतिरिक्त, अपसिंगा और उफला गांवों की 158 एकड़ जमीन को अवैध रूप से फेरबदल (म्यूटेशन) करके हड़प लिया गया है।
📍तुळजापूर
🚨 महाराष्ट्र मंदिर महासंघाच्या पाठपुराव्याला मोठे यश!
🙏 तुळजापूर येथील श्री तुळजाभवानी देवीच्या ४,१२१ एकर इनामी जमिनीच्या कथित महाघोटाळ्याची सखोल चौकशी करण्याचे निर्देश महसूलमंत्री Chandrashekhar Bawankule यांनी जिल्हाधिकाऱ्यांना दिले.@Ramesh_hjs pic.twitter.com/ws75eN4uEv
— Mandir Mahasangh (@mandirmahasangh) July 1, 2026
इस मामले में शामिल सभी संबंधितों के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए! – सुनील घनवट, राष्ट्रीय समन्वयक, मंदिर महासंघ

इस मामले में अवैध हस्तांतरण में शामिल तत्कालीन उपजिलाधिकारी, न्यासियों (ट्रस्टी) और अन्य संबंधित प्रभावशाली लोगों के खिलाफ तुरंत मामले दर्ज किए जाने चाहिए, यह महासंघ की मांग है। सरकार को अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए सभी अवैध खरीद-बिक्री के दस्तावेजों और 7/12 की प्रविष्टियों को तुरंत रद्द करना चाहिए, तथा पूरी 1 हजार 666.14 हेक्टेयर भूमि को फिर से श्री तुलजाभवानी मंदिर के प्रत्यक्ष नियंत्रण में लाना चाहिए, यह हमारी पुरजोर मांग है।








