महाराणा प्रताप का आदर्श सामने रखकर धर्मरक्षा के लिए तत्पर हों! – सौ. भक्ति डाफळे, हिंदू जनजागृती समिति

सातारा – हिंदू सूर्य महाराणा प्रताप वास्तविक रूप में धर्मवीर थे। उस समय के समकालीन राजाओं ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली थी; परंतु हिंदू सूर्य महाराणा प्रताप ने किसी भी प्रकार का समझौता न करते हुए देव, देश और धर्म के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। व्यक्तिगत सुख को तिनके के समान मानकर उन्होंने स्वाभिमान से जंगल में रहना पसंद किया। हमें भी महाराणा प्रताप की तरह देव, देश और धर्म की रक्षा के लिए तत्पर होना चाहिए, ऐसा आह्वान हिंदू जनजागृती समिति की सौ. भक्ति डाफळे ने किया। वे यहाँ के बसाप्पा पेठ में हिंदू सूर्य महाराणा प्रताप की जयंती के अवसर पर आयोजित एक जनसभा में बोल रही थीं। इस अवसर पर मंच पर अखिल भारतीय हिंदू महासभा के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता दत्तात्रय सणस, ‘श्री महाराणा प्रताप जयंती उत्सव समिति’ के संजय परदेशी आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

सौ. डाफळे ने आगे कहा, ‘‘पहले भी महिलाएं असुरक्षित थीं। चित्तौड़गढ़ और रानी पद्मिनी का जाज्वल्य इतिहास हमारे सामने उभर कर आता है। क्रूरकर्मा अलाउद्दीन खिलजी का स्पर्श अपने शरीर को न हो; इसलिए रानी पद्मिनी ने १६ हजार महिलाओं के साथ जौहर किया था। आज धर्मशिक्षा के अभाव के कारण हमारी बेटियां धर्मांधों के ‘लव जिहाद’ जैसे छलावे और प्रेम के ‘षड्यंत्र’ का शिकार हो रही हैं। आगे चलकर उनसे विवाह कर उनका जबरन धर्मांतरण कराया जाता है। ऐसे एक नहीं, बल्कि अनेक उदाहरण हमें देखने को मिलते हैं। यदि इन परिस्थितियों से बचना है, तो धर्मशिक्षा लेना और संगठित होना अत्यंत आवश्यक है।’’








