अनेक शिवसेना कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में

कल्याण (जिला ठाणे) – ऐतिहासिक दुर्गाडी किले स्थित मंदिर में हिंदू श्रद्धालुओं को प्रवेश मिले तथा उन पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाएं, इस मांग को लेकर कल्याण के लाल चौकी क्षेत्र में किले के प्रवेशद्वार से कुछ दूरी पर शिवसेना और अन्य हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने घंटानाद आंदोलन किया। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए 200 पुलिसकर्मियों का बंदोबस्त किया गया था। दुर्गाडी की ओर जाने वाले शिवसैनिकों को पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। नमाज के दौरान पुलिस ने किसी भी शिवसैनिक को वहां जाने की अनुमति नहीं दी। पुलिस ने आंदोलन कर रहे शिवसैनिकों को हिरासत में लेकर उन्हें प्रतिबंधात्मक कार्रवाई हेतु पुलिस थाने पहुंचाया। उनके विरुद्ध मामला भी दर्ज किया गया।
Durgadi Protest : कल्याणच्या दुर्गाडी किल्ल्यावर नमाज? किल्ला परिसरात शिंदेंची शिवसेना आक्रमक#Durgadifort #Shivsena pic.twitter.com/RNHX15V8bz
— ABP माझा (@abpmajhatv) May 28, 2026
इस दौरान हिंदुओं ने “दुर्गाडी किला हमारे अधिकार का है” जैसे नारे लगाए। साथ ही सभी प्रदर्शनकारियों के हाथों में “हिंदू श्रद्धालुओं को श्री दुर्गादेवी मंदिर में प्रवेश मिलना ही चाहिए, यह हमारा अधिकार है” जैसे संदेश वाले फलक थे। सफेद कुर्तों और भगवा टोपियों के कारण वातावरण में वीरता और उत्साह का संचार हो रहा था।
क्या है पूरा मामला?
बकरी ईद के दिन दुर्गाडी देवी के दर्शन के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगाया जाता है। इस निर्णय का शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने विरोध किया था। वर्ष 1982 से उनके निर्देशानुसार शिवसेना के तत्कालीन जिला प्रमुख आनंद दिघे ने यहां घंटानाद आंदोलन शुरू किया था, जो आज भी जारी है। यह विवाद पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से चला आ रहा है।
स्रोत : सनातन प्रभात
28 मई
ठाणे जिले का दुर्गाडी किला बनी ‘दूसरी भोजशाला’, रास्ता रोककर पढी गई नमाज
-
किले पर ‘ईदगाह’ का निर्णय न्यायप्रविष्ट, फिर भी हुई नमाज
-
नमाज पढने के समय हिन्दुओं को किले के दुर्गादेवी मंदिर में प्रवेश निषेध

मुंबई – ठाणे जिले के कल्याण में स्थित दुर्गाडी किले पर कथित ‘ईदगाह’ का निर्णय न्यायप्रविष्ट है । ऐसा होने पर भी दुर्गाडी किले के बाहर सहस्रों मुसलमान विगत अनेक वर्षों से यहां का मार्ग अवरुद्ध कर नमाज पढते हैं । संतापजनक तथ्य यह है कि नमाज पढने के समय दुर्गाडी किले के दुर्गादेवी मंदिर में हिन्दुओं का प्रवेश निषेध कर दिया जाता है । भोजशाला में भी शुक्रवार को नमाज पढने के समय हिन्दुओं को सरस्वती माता की पूजा करने पर अब तक प्रतिबंध लगाया गया था । मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला हिन्दुओं की ही होने का निर्णय दिए जाने के पश्चात हिन्दू वहां अब प्रतिदिन पूजा-अर्चना कर सकते हैं ।
ईदगाह न होने के प्रमाण इस प्रकार हैं !
क्षोभजनक विषय यह है कि दुर्गाडी किले के श्री दुर्गादेवी मंदिर के भी मस्जिद होने का दावा मुसलमानों ने किया था ; परंतु किले की वास्तुकला मंदिर की ही है, ऐसा निर्णय न्यायालय ने दिया है । इसके साथ ही इस कथित ‘ईदगाह’ का विषय भी वर्तमान में कल्याण जिला न्यायालय में प्रविष्ट है । दुर्गाडी किले की इस दीवार के ‘ईदगाह’ होने का प्रलाप मुसलमान कर रहे हैं । ‘ईदगाह’ के दोनों ओर मीनारें होती हैं । वैसी मीनारें इस दिवार में नहीं हैं । ‘ईदगाह’ के मध्य में मुस्लिम धर्मगुरुओं का उद्बोधन करने के लिए स्थान होता है, वैसा स्थान भी इस दिवार के मध्य में नहीं है । ऐसा होने पर भी वर्षों से मुसलमानों की झुंडशाही के सम्मुख नतमस्तक होकर प्रशासन द्वारा मार्ग पर नमाज पढने को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है ।
पुलिस हिन्दुओं को मंदिर जाने से न रोके ! – शिवसेना
दुर्गाडी किले पर श्री दुर्गादेवी का मंदिर है । नमाज पढने के समय पुलिस मंदिर जाने से हिन्दुओं को रोकती है । मंदिर जाना हमारा धार्मिक अधिकार है । पुलिस हमें उससे न रोके । इसके विपरीत मार्ग अवरुद्ध कर अवैध रूप से नमाज पढनेवालों पर पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए, ऐसी मांग शिवसेना जिलाप्रमुख गोपाल लांडगे ने की ।








