रत्नागिरी में आंदोलन द्वारा मांग
पुनर्विकास के नाम पर ‘सावरकर सदन’ को ध्वस्त नहीं होने देंगे!

रत्नागिरी : स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों के महामेरु स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर के दादर, मुंबई (शिवाजी पार्क) स्थित ऐतिहासिक ‘सावरकर सदन’ पर पुनर्विकास के नाम पर बिल्डर लॉबी द्वारा इसे ध्वस्त किए जाने का संकट मंडरा रहा है। इस ऐतिहासिक धरोहर को जमींदोज होने से बचाने और इसे ‘राष्ट्रीय स्मारक’ के रूप में संरक्षित करने के लिए आज हिंदू जनजागृति समिति और समविचारी संगठनों की ओर से यहां के जयस्तंभ पर तीव्र आंदोलन किया गया।

इस आंदोलन में श्री. राजेश आयरे (अध्यक्ष, शिक्षक परिषद रत्नागिरी), श्री. नीलेश आखाडे (रत्नागिरी शहर महासचिव, भाजपा), श्री. संदीप नाचणकर (जिला उपाध्यक्ष, भाजपा, दक्षिण रत्नागिरी), श्री. संजय जोशी (महाराष्ट्र संगठक, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ), श्री. अनंत आगाशे (अध्यक्ष, कुवारबाव पंचक्रोशी ब्राह्मण सभा), श्री. शैलेश बेर्डे (रत्नागिरी शहर उपाध्यक्ष, भाजपा), श्री. गणेश गायकवाड (जिलाध्यक्ष, श्रीशिवप्रतिष्ठान हिंदुस्तान, रत्नागिरी), अधिवक्ता श्री. सचिन रेमणे (विश्व हिंदू परिषद, धर्मप्रसार विभाग प्रमुख), श्री. समीर करमरकर (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ), सौ. शुभांगी मुळ्ये (सनातन संस्था) सहित कई सावरकर-प्रेमी संगठनों और नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर नागरिकों ने सावरकर जी के गगनभेदी जयघोष से पूरा परिसर गुंजा दिया और ‘सावरकर सदन बचाओ’ के नारे लगाए।
आंदोलन के दौरान हिंदू जनजागृति समिति के जिला समन्वयक श्री. गोविंद भारद्वाज ने कहा कि, “जिन्ना हाउस को संरक्षण, तो फिर सावरकर सदन पर ढहने की नौबत क्यों? भारत के विभाजन और लाखों हिंदुओं के नरसंहार के लिए जिम्मेदार मोहम्मद अली जिन्ना का मुंबई स्थित ‘जिन्ना हाउस’ स्वतंत्र भारत में सुरक्षित रहता है; परंतु अखंड भारत के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले स्वातंत्र्यवीर सावरकर के निवास स्थान को पुनर्विकास के नाम पर ढहाने की नौबत आ रही है, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”
केंद्र सरकार ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का लंदन स्थित घर करोड़ों रुपये खर्च करके अपने अधिकार में लिया, साथ ही इंदु मिल की भूमि पर भव्य स्मारक का निर्माण किया जा रहा है। उसी तर्ज पर, स्वा. सावरकर जिस ‘सावरकर सदन’ में लगभग 4 दशकों (वर्ष 1938 से 1966) तक रहे, उसका भी सरकार को तुरंत अधिग्रहण करना चाहिए। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने वर्ष 2010 में ही इस इमारत को विरासत (Heritage) सूची में शामिल करने की सिफारिश महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग को भेजी थी; परंतु पिछले 15 वर्षों में सरकार ने इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। इसी का फायदा उठाकर बिल्डर लॉबी इस ऐतिहासिक धरोहर को हड़पने का प्रयास कर रही है।
आंदोलनकारियों द्वारा सरकार से की गई प्रमुख मांगें
सरकार ‘सावरकर सदन’ को पुनर्विकास के चंगुल से बचाने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करे और इस इमारत को ‘राष्ट्रीय स्मारक’ में परिवर्तित करे। इस संपत्ति का स्वामित्व सरकार स्वयं अपने हाथ में ले और वहां सावरकर जी की पांडुलिपियों, पत्रों का एक भव्य संग्रहालय, अनुसंधान केंद्र तथा डिजिटल लाइब्रेरी विकसित करे। वर्तमान महायुति सरकार ने हमेशा स्वा. सावरकर के विचारों का गौरव किया है। साथ ही, केंद्र की भाजपा सरकार ने अंडमान हवाई अड्डे का नाम सावरकर जी के नाम पर रखा, संसद में उनका तैलचित्र लगाया और 100 रुपये का स्वा. सावरकर स्मारक सिक्का भी जारी किया है। इसलिए, इस धरोहर के संरक्षण के लिए विशेष कोष (फंड) का प्रावधान कर सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा इसी सरकार से है।
यदि सरकार ने इस ऐतिहासिक वास्तु के संरक्षण के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए, तो पूरे महाराष्ट्र में सावरकर-प्रेमी जनता को साथ लेकर इस आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा, ऐसा संकल्प अंत में समिति की ओर से व्यक्त किया गया।








