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बागलकोट में कर्नाटक मंदिर महासंघ द्वारा प्रादेशिक मंदिर अधिवेशन संपन्न
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मंदिरों के जीर्णोद्धार और रखरखाव हेतु बजट में निधि देने की मांग

बागलकोट (कर्नाटक) – कर्नाटक मंदिर महासंघ के राज्य समन्वयक श्री मोहन गौड़ा ने मांग की है कि कर्नाटक सरकार राज्य के बजट में मंदिरों के जीर्णोद्धार और रखरखाव के लिए पर्याप्त निधि उपलब्ध कराए।
शनिवार, 17 मई 2026 को बागलकोट में आयोजित कर्नाटक मंदिर महासंघ के प्रादेशिक मंदिर अधिवेशन में बोलते हुए श्री मोहन गौड़ा ने धार्मिक बंदोबस्ती विभाग के अंतर्गत आने वाले अनेक ‘सी-ग्रेड’ मंदिरों की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जहां सरकार वक्फ बोर्ड, हज भवन, मस्जिदों के मौलवियों के वेतन तथा अन्य संबंधित कार्यों के लिए हजारों करोड़ रुपये जारी करती है, वहीं अनेक मंदिरों में सफेदी और रंगाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है।
श्री गौड़ा ने यह भी बताया कि लगभग 4,170 मंदिर सरकारी अभिलेखों से लापता हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में चार लाख से अधिक मंदिर सरकारी नियंत्रण में हैं, जहां व्यापक भ्रष्टाचार हो रहा है तथा मंदिरों की निधि का आर्थिक शोषण हेतु दुरुपयोग किया जा रहा है।
तिरुपति लड्डू प्रसाद विवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लड्डू प्रसाद तैयार करते समय उसमें कथित रूप से पशु-चरबी मिलाए जाने से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। अधिवेशन में यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि ऐसे सभी मंदिर भक्तों को सौंप दिए जाएं, जिससे उनका बेहतर प्रशासन हो सके।
उद्घाटन समारोह

इस अधिवेशन का उद्घाटन चिक्कगलागली के श्रद्धानंद आश्रम के श्री जनार्दन स्वामीजी तथा वेदब्रह्म श्री दुंडय्यास्वामी हिरेमठ ने दीप प्रज्वलित कर किया। दोनों वक्ताओं ने धर्मप्रसार में मंदिरों की भूमिका पर विशेष बल दिया।
पुजारियों ने उपेक्षा पर जताई चिंता

मुचकंडी स्थित श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी श्री प्रभुस्वामी सरगणाचारी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मंदिरों को पर्यटन केंद्रों में परिवर्तित किया जा रहा है, जिसके कारण वहां भक्तों की अपेक्षा पर्यटकों की संख्या अधिक हो गई है। उन्होंने धार्मिक बंदोबस्ती विभाग की मंदिर संबंधी समस्याओं के प्रति उदासीनता की भी आलोचना की तथा कहा कि पुजारियों को पिछले तीन वर्षों से “तस्तिक” आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हुई है।
‘लव जिहाद’ रोकने हेतु धार्मिक शिक्षा की आवश्यकता

हिंदू जनजागृति समिति के राज्य समन्वयक श्री गुरुप्रसाद गौड़ा ने कहा कि बढ़ती ‘लव जिहाद’ की घटनाओं का सामना करने के लिए मंदिरों में हिंदू युवतियों और युवाओं को धार्मिक शिक्षा दी जानी चाहिए।
कानूनी मार्गदर्शन और चर्चाएं
अधिवक्ता बालदेव सन्नक्की ने वक्फ बोर्ड और मंदिर प्रशासन से संबंधित कानूनी पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया, जबकि अधिवक्ता नारायण याजी ने मंदिर संबंधी विषयों पर सुझाव और कानूनी जानकारी प्रदान की। मंदिरों की रक्षा तथा धर्मप्रसार में उनकी भूमिका पर समूह चर्चाएं भी आयोजित की गईं।
इस अधिवेशन में बागलकोट, बेलगावी, विजयपुरा और कलबुर्गी जिलों से 150 से अधिक न्यासी, पुजारी, मंदिर प्रतिनिधि और पदाधिकारी उपस्थित रहे।








