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हिंदू जनजागृति समिति और महाराष्ट्र राज्य मंदिर महासंघ की ओर से शासन व प्रशासन को विभिन्न मांगों का ज्ञापन प्रस्तुत

मदरसा आधुनिकीकरण, ‘कॉर्पोरेट जिहाद’, पाठ्यपुस्तकों से मराठा साम्राज्य का नक्शा हटाना और पैसे देकर दर्शन जैसी व्यवस्थाओं पर कार्रवाई की मांग

नायब तहसीलदार अमरसिंह जाधव को ज्ञापन सौंपते समय (बाएं से) सतीश डिंगे-सामंत, शिवराम परब, मंगेश सोनार, वासुदेव सडवेलकर, चंद्रशेखर तुळसकर और आनंद नाईक उपस्थित थे

कुडाळ – हिंदू जनजागृति समिति और महाराष्ट्र राज्य मंदिर महासंघ की ओर से सिंधुदुर्ग जिले में शासन और प्रशासन के समक्ष विभिन्न महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। इन मांगों से संबंधित ज्ञापन कुडाळ तहसीलदार कार्यालय में प्रस्तुत किए गए, जिन्हें नायब तहसीलदार अमरसिंह जाधव ने स्वीकार किया। यह ज्ञापन मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, गृह राज्य मंत्री, जिलाधिकारी, जिला पुलिस अधीक्षक तथा स्थानीय प्रशासन को भेजे जाने हेतु सौंपा गया।

ज्ञापन में कहा गया कि डॉ. जाकिर हुसैन मदरसा आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत राज्य के 308 मदरसों को दिए गए लगभग 50 लाख रुपये के अनुदान को तत्काल रोका जाए और संविधान के समानता के सिद्धांत की रक्षा की जाए। साथ ही, नाशिक सहित अन्य शहरों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कथित ‘कॉर्पोरेट जिहाद’, हिंदू महिलाओं पर अत्याचार और धार्मिक दबाव के मामलों में कठोर कार्रवाई की मांग की गई।

इसके अतिरिक्त एनसीईआरटी की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक से हटाए गए मराठा साम्राज्य के नक्शे को पुनः शामिल करने की मांग की गई। मंदिरों में ‘पेड दर्शन’ (पैसे देकर दर्शन) की व्यवस्था समाप्त करने तथा मंदिरों के ट्रस्ट में राजनीतिक पदाधिकारियों के बजाय श्रद्धालु भक्तों की नियुक्ति करने की भी मांग रखी गई।

इस अवसर पर आनंद नाईक, चंद्रशेखर तुळसकर, शिवराम परब, सतीश सामंत डिंगे, वासुदेव सडवेलकर, मंगेश सोनार, आरती कोपदार, सुमित्रा जाधव, श्रावणी जाधव, मनाली सोनार, नीता पाटिल सहित अनेक धर्मप्रेमी उपस्थित थे। प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो समिति पूरे राज्य में लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन करेगी।

‘कॉर्पोरेट जिहाद’ के संबंध में कार्रवाई की मांग को लेकर नायब तहसीलदार अमरसिंह जाधव को ज्ञापन सौंपते समय (बाएं से) श्रीमती सुमित्रा जाधव, श्रीमती आरती कोपदार, कुमारी श्रावणी जाधव, श्रीमती मनाली सोनार और श्रीमती नीता पाटिल उपस्थित थीं।

प्रमुख मांगें

1. मदरसों को मिलने वाले अनुदान पर रोक

ज्ञापन में कहा गया कि, उत्तर प्रदेश की तर्ज पर महाराष्ट्र के सभी मदरसों का सर्वेक्षण किया जाए और आर्थिक अनियमितताओं तथा फर्जी छात्र संख्या की जांच की जाए। यदि सरकार धार्मिक शिक्षा के लिए अनुदान देती है, तो समानता के सिद्धांत के अनुसार वेद पाठशालाओं, वारकरी शिक्षा संस्थानों और अन्य हिंदू धार्मिक संस्थाओं को भी जनसंख्या के अनुपात में आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। साथ ही, मदरसों में क्या पढ़ाया जाता है, इसकी नियमित जांच शिक्षा विभाग और खुफिया एजेंसियों द्वारा की जाए।

2. ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ और अपराधों की जांच

नाशिक में कथित ‘लव जिहाद’ से जुड़े मामले की गंभीरता को देखते हुए, राज्य के आपराधिक अन्वेषण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विशेष जांच दल गठित कर समयबद्ध जांच करने की मांग की गई। जिन संस्थानों में महिलाओं पर अत्याचार या धार्मिक दबाव के मामले सामने आए हैं, उनके व्यापार लाइसेंस रद्द करने और संबंधित शाखाओं की जांच करने की मांग भी रखी गई।

3. मराठा साम्राज्य का नक्शा पुनः शामिल किया जाए

कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक से हटाए गए मराठा साम्राज्य के नक्शे को वापस शामिल करने की मांग की गई। साथ ही, इस निर्णय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई। मुगलों के अनावश्यक महिमामंडन को रोककर भारतीय राजाओं के शौर्य को उचित स्थान देने पर जोर दिया गया।

4. मंदिरों में ‘पेड दर्शन’ बंद किया जाए

ज्ञापन में कहा गया कि मंदिरों में सशुल्क दर्शन की व्यवस्था गलत है, जिससे श्रद्धालुओं के बीच भेदभाव उत्पन्न होता है। आर्थिक रूप से कमजोर भक्तों के लिए यह अन्यायपूर्ण है, क्योंकि वे धन के अभाव में दर्शन से वंचित रह जाते हैं। इसे धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए तुरंत बंद करने की मांग की गई।

अंत में कहा गया कि इन सभी मांगों पर शासन को प्राथमिकता से निर्णय लेना चाहिए, अन्यथा आगे व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।

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