झूठ फैलाकर बदनामी करने की साजिश नहीं रुकी तो मानहानि का मामला दर्ज करने की चेतावनी

पणजी – ‘गोमंतक टीवी’ पर सेंट फ्रांसिस ज़ेवियर विषय पर चर्चा के दौरान हिंदू जनजागृति समिति के गोवा राज्य प्रवक्ता डॉ. मनोज सोलंकी द्वारा रखे गए विचारों को अत्यंत गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। इस पर समिति ने अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है।
डॉ. सोलंकी ने स्पष्ट किया कि, “हिंदू जनजागृति समिति किसी भी जाति-आधारित व्यवस्था का समर्थन नहीं करती। मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा। मेरी और समिति की ऐसी कोई भूमिका नहीं है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान ने कहा है – ‘चातुर्वर्ण्यं मया सृष्ट्यं गुणकर्मविभागशः’, अर्थात् वर्ण व्यवस्था गुण और कर्म के आधार पर है। हम जन्म आधारित नहीं, बल्कि गुण-कर्म आधारित व्यवस्था को मानते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि “मेरे इंटरव्यू का पूरा वीडियो ‘गोमंतक’ द्वारा दिखाया जाना चाहिए। मेरे वक्तव्य को काटकर और तोड़कर दिखाया गया है। झूठ फैलाकर मेरी और समिति की बदनामी बंद की जाए, अन्यथा मैं मानहानि का मामला दर्ज करूंगा।”
समिति ने अपने वक्तव्य में कहा कि, “सोशल मीडिया पर पूरी चर्चा दिखाने के बजाय केवल 27 सेकंड का एक हिस्सा प्रसारित कर मूल वक्तव्य का विपर्यास करना एक दुर्भावनापूर्ण कृत्य है। डॉ. सोलंकी ने कहीं भी किसी जाति का उल्लेख नहीं किया, बल्कि केवल भगवद्गीता के चौथे अध्याय के 13वें श्लोक के आधार पर वर्ण व्यवस्था ‘गुण’ और ‘कर्म’ पर आधारित है, यह स्पष्ट किया था। क्या आलोचकों को भगवद्गीता मान्य नहीं है?”
डॉ. सोलंकी ने अपने भाषण में यह भी स्पष्ट कहा था कि “सभी वर्ण समान हैं” और मनुष्य का वर्ण उसके कर्म से निर्धारित होता है। इसे समझाने के लिए उन्होंने महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण दिया, जो साधना के बल पर ऋषि बने। इस ऐतिहासिक संदर्भ को तोड़-मरोड़कर हिंदू समाज में फूट डालने की साजिश रची जा रही है।
समिति ने आगे कहा कि, “हिंदुओं में धर्म के प्रति अज्ञान का लाभ उठाकर कुछ लेखक और तथाकथित शोधकर्ता समाज में विभाजन करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में समिति धर्मशिक्षण का कार्य कर रही है।”
साथ ही यह भी प्रश्न उठाया गया कि, “जो लोग यह कहते हैं कि गोवा और कोंकण भूमि भगवान परशुराम द्वारा निर्मित नहीं है, उन पर जनता कितना विश्वास करे?”
चर्चा के दौरान अन्य वक्ताओं द्वारा जानबूझकर ब्राह्मण विरोध फैलाने का प्रयास भी किया गया, जिसे समिति ने अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया। शूद्र वर्ण की साधना पर तात्त्विक चर्चा को गलत तरीके से प्रस्तुत कर समाज में तनाव उत्पन्न करने का प्रयास किया गया।
अंत में समिति ने जनता से अपील की है कि, “अधूरी या संपादित वीडियो क्लिप्स पर विश्वास न करें, बल्कि पूरा सत्य जानें।”
साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि ऐसी बदनामी आगे भी जारी रही, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।








