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शरिया के अनुरूप अब हलाल प्रमाणित ‘टाटा एथिकल फंड’ की योजना आई सामने !

  • हिन्दू बहुल भारत में प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा मुसलमानों के तुष्टीकरण का प्रयास !

  • ३० वर्षों से चल रही है यह योजना !

नई दिल्ली – नासिक स्थित ‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज’ में घटित घृणास्पद प्रकरण से ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ का विकृत स्वरूप विश्व के सामने आया है । अब इसी टाटा संस्थान की ‘टाटा एथिकल फंड’ नामक ‘म्यूचुअल फंड’ श्रेणी की निवेश योजना शरिया कानून का पालन कर रही है, अर्थात इसके हलाल प्रमाणित होने का तथ्य उजागर हुआ है । सामाजिक माध्यमों पर इस विषय में चर्चा प्रारंभ हो गई है । यह योजना हिन्दुओं पर भी थोपी जा रही है, जिसके कारण हिन्दुओं में भारी रोष व्याप्त है ।

‘टाटा एथिकल फंड’ शरिया के अनुरूप कैसे है?, इसे समझें !

‘टाटा म्यूचुअल फंड’ के जालपृष्ठ (वेबसाइट) पर ‘टाटा एथिकल फंड’ की समस्त सुविधाओं का विवरण स्पष्ट किया गया है । उसमें उल्लेख है कि :

१. इस्लाम के अनुसार मदिरा, तंबाकू, द्यूत (जुआ) अथवा ब्याज दर पर आधारित ऋण जैसे निवेश माध्यमों में धन का विनियोग करना ‘हराम’ (इस्लाम विरुद्ध) माना गया है । ‘टाटा एथिकल फंड’ इन वस्तुओं में धन का निवेश नहीं करता है । यह ‘टाटा एथिकल फंड’ योजना हिन्दुओं के लिए भी उपलब्ध है ।

२. ‘टाटा एथिकल फंड’ यह संस्थान सूचना प्रौद्योगिकी, औषधि निर्माण (फार्मा) तथा निर्माण व्यवसाय में धन का निवेश करता है । ‘इस माध्यम से आपका धन हलाल प्रमाणित बनता है’, ऐसा आश्वासन भी ‘टाटा’ द्वारा दिया गया है ।

शरिया के अनुसार ऐसी निवेश योजनाएं टाटा संस्थान के अतिरिक्त ‘टॉरस म्यूचुअल फंड’, ‘निप्पॉन इंडिया’, ‘क्वांटम एथिकल फंड’ आदि संस्थान भी संचालित कर रहे हैं ।

सांख्यिकी से समझें ‘टाटा एथिकल फंड’ के इस भयावह षड्यंत्र की वास्तविकता !

१. भारत में शरिया के आधार पर चलने वाली सबसे बडी ‘म्यूचुअल फंड’ योजना ।

२. वर्ष १९९६ में हुआ था शुभारंभ ।

३. ३ सहस्र ७३९ करोड रुपयों का निवेश (१९ अप्रैल २०२६ तक) ।

४. २५ प्रतिशत राशि (फंड) का सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों में निवेश ।

५. ‘टाटा एथिकल फंड’ का सर्वाधिक उपयोग करने वाले प्रथम ५ संस्थान – इन्फोसिस (८ प्रतिशत), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (५.४१ प्रतिशत), टेक महिंद्रा (३.६१ प्रतिशत), हिन्दुस्तान यूनिलीवर (३.४५ प्रतिशत) तथा जिंदाल स्टील (२.९५ प्रतिशत) ।

६. विशेष तथ्य यह है कि भारत के प्रतिष्ठित ‘आईआईटी’ एवं ‘आईआईएम’ से शिक्षित अभिनव शर्मा नामक हिन्दू अधिकारी इस फंड का प्रबंधन देखते हैं । ऐसे ‘धर्मनिरपेक्ष’ हिन्दुओं को इन विषयों से कोई लेना देना नहीं होता, यह ध्यान देने योग्य है ।

भारतीय इस योजना का विरोध कैसे करें ?

१. सरकार द्वारा संस्थान पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए भारतीयों को सरकार पर दबाव बनाना चाहिए ।

२. यदि टाटा संस्थान इस योजना को वापस नहीं लेता, तो भारतीयों को इसके शेयर (अंश) बेचकर उस जानकारी को सामाजिक माध्यमों द्वारा विश्व के सामने लाना चाहिए । आर्थिक नियंत्रण करने से ही ये ‘कॉर्पोरेट जिहादी’ मार्ग पर आते हैं, इसे भूलना नहीं चाहिए ।

३. ‘टाटा म्यूचुअल फंड’ के पास वैध मार्ग से अपना विरोध दर्ज कराने हेतु संपर्क करें :
    (०२२) ६२८२ ७७७७, (०२२) ६६५७ ८२८२ (सोमवार से शनिवार प्रातः ९ से सायं ५.३०)
    टोल फ्री क्रमांक : १८०० २२० १०१
    ई-मेल : [email protected]

संपादकीय टिप्पणी
  • नासिक स्थित ‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज’ में हिन्दुओं के धर्मांतरण का षड्यंत्र रचे जाने की बात सामने आई है । अब यही प्रतिष्ठित संस्थान हिन्दू बहुल देश में इस्लाम प्रेरित निवेश पद्धतियों को अंगीकार कर रहा है । ऐसी पद्धतियों को रोकने के लिए अब हिन्दुओं को संगठित होकर सरकार पर दबाव बनाकर ऐसी योजनाओं पर प्रतिबंध लगवाना चाहिए !
  • हिन्दू बहुल भारत में हलाल प्रमाणित निवेश योजनाओं का क्या प्रयोजन ? क्या ऐसा होने के लिए भारत कोई इस्लामी देश है ? ऐसी योजनाओं को लेशमात्र भी स्थान न देने वाला हिन्दू राष्ट्र इसके लिए नितांत आवश्यक है !
— संपादक, हिंदू जनजागृति समिति

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