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बिंदी-तिलक की मनाही, हिजाब को अनुमति.. Lenskart के सांप्रदायिक ड्रेस कोड के चलते ट्विटर पर ट्रेंड हुआ #BoycottLenskart

मुंबई : सोशल मीडिया पर इन दिनों आईवियर रिटेलर ब्रांड लेंसकार्ट (Lenskart) को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। Lenskart के एक वायरल दस्तावेज ने कंपनी की वर्कप्लेस पॉलिसी को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। हिन्दू संगठनों ने Lenskart के फाउंडर पियूष बंसल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

इस दस्तावेज में कंपनी के स्टोर कर्मचारियों के लिए ड्रेस और ग्रूमिंग से जुड़े नियम बताए गए थे। वायरल दस्तावेज में कर्मचारियों को लेकर जारी कथित गाइडलाइन में कहा गया है कि स्टोर में काम करने वाले कर्मचारी ड्यूटी के दौरान काले रंग का हिजाब पहन सकते हैं। इसके साथ ही काली पगड़ी पहनने की भी इजाजत दी गई है। लेकिन इसी दस्तावेज में यह भी लिखा था कि बिंदी और तिलक जैसे मजहबी निशानों को लगाकर आने की इजाजत नहीं होगी। 

 खास तौर पर इसमें साफ तौर पर कहा गया था कि “मजहबी टीका, तिलक, बिंदी या स्टिकर की इजाजत नहीं है” । लोगों का कहना था कि अगर एक तरफ कुछ मजहबी लिबास और प्रतीकों के इस्तेमाल की इजाजत दी जा रही है, तो दूसरी तरफ बिंदी और तिलक पर रोक क्यों लगाई जा रही है। इस असमानता को लेकर सोशल मीडिया पर कंपनी की आलोचना तेज हो गई और मामला काफी तूल पकड़ने लगा। 

लेंसकार्ट कंपनी के कर्मचारियों के लिए जारी किए गए ‘स्टाइल गाइड’ को लेकर फिल्म निर्माता- निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उन्होंने लोगों से कंपनी के बायकॉट की अपील की है। उन्होंने कहा कि कंपनी हिजाब को अनुमति दे रही है लेकिन हिंदू कर्मचारियों के पारंपरिक चिह्नों जैसे बिंदी, तिलक और कलावा पर पूरी तरह बैन लगा रही है।

अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, ‘पीयूष बंसल अपने कर्मचारियों से यही कहते हैं कि हिजाब तो ठीक है, लेकिन बिंदी, तिलक, कलावा नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि यह लेंसकार्ट के स्टाइल गाइड का 11वां पन्ना है, जो कंपनी के कर्मचारियों के लिए बनाया गया है। अशोक पंडित ने सवाल उठाया कि हिंदू-बहुल भारत में ऐसी कंपनी जो ज्यादातर हिंदू कर्मचारियों और ग्राहकों पर निर्भर है, वह हिंदू प्रतीकों पर प्रतिबंध क्यों लगा रही है?’ 

सोशल मीडिया पर आई सवालों की बाढ़

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर सवाल उठाए हैं। अशोक पंडित ने कंपनी के स्टाइल गाइड में दिए सख्त नियम के पन्ने को भी शेयर किया, जिसमें लिखा है-अगर कर्मचारी हिजाब पहनते हैं तो उसका रंग काला होना चाहिए। कंपनी हिजाब पहनने की अनुमति देती है। हिजाब मीडियम चेस्ट कवरेज का होना चाहिए और उससे कंपनी का लोगो नहीं ढकना चाहिए। पगड़ी पहनने की अनुमति है, लेकिन वह भी सिर्फ काले रंग की होनी चाहिए। धार्मिक टीका, तिलक, बिंदी या स्टिकर लगाने की इजाजत नहीं है। वहीं, मेहंदी लगाने की भी मनाही है। खास मौके पर भी सिर्फ 10 दिन तक मैनेजमेंट की मंजूरी के बाद ही लगाई जा सकती है।

कंपनी के स्टाइल गाइड के अनुसार किसी भी तरह की टोपी या हैट पहनने पर भी रोक है। कंपनी ने कुछ अन्य नियम भी दिए हैं जैसे स्टोर पर ब्लू टॉर्च और स्प्रे बोतल साथ रखना, बाल अस्त-व्यस्त होने पर हेयर नेट का इस्तेमाल, टैटू छिपाने के लिए काली फिटेड टी-शर्ट आदि।

लोग बोले- कार्पोरेट जिहाद

अशोक पंडित ने इस नीति को हिंदू भावनाओं के प्रति असंवेदनशील बताते हुए कहा कि हिंदू-बहुल देश में हिंदू कर्मचारियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला यह दृष्टिकोण गलत है। उन्होंने लोगों से लेंसकार्ट प्रोडक्ट्स का बायकॉट करने की अपील की है। जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, ‘कॉर्पोरेट जिहाद अब व्यापक बन गया है।। टीसीएस के बाद अब लेंसकार्ट भी सवालों के घेरे में, हिजाब, पगड़ी की अनुमति है लेकिन कलावा, बिंदी की नहीं। सिन्दूर दिखाई नहीं देना चाहिए।

‘हिजाब पहन सकते हैं’?

लेखिका शेफाली वैद्य ने भी यह स्क्रीनशॉट शेयर किया और इस कथित पॉलिसी पर सवाल उठाए। उनकी पोस्ट से यह संकेत मिला कि कंपनी के अंदरूनी नियम धार्मिक प्रतीकों के साथ अलग तरह से पेश आते हैं। उन्होंने लिखा, ‘तो मैंने पुष्टि कर ली है, यह सच है। पियूष बंसल अपने कर्मचारियों से यही कहते हैं कि हिजाब ठीक है, लेकिन बिंदी/तिलक/कलावा नहीं। यह बात लेंसकार्ट जैसी कंपनी के लिए है, जो हिंदू-बहुल भारत में मौजूद है, जहां ज़्यादातर कर्मचारी और ग्राहक हिंदू हैं।’

संस्थापक पीयूष बंसल ने दी उपरी सफाइॅ

विवाद गहराने पर लेंसकार्ट के संस्थापक पीयूष बंसल ने कहा कि, वायरल हो रहा दस्तावेज एक पुराना इंटरनल ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट है, न कि वर्तमान HR पॉलिसी। उन्होंने कहा, “इस दस्तावेज में बिंदी और तिलक के बारे में जो लाइनें लिखी थीं, वे गलत थीं और वे हमारे मूल्यों को नहीं दर्शातीं। हमने इसे 17 फरवरी को ही हटा दिया था, इससे बहुत पहले कि यह सार्वजनिक चर्चा का विषय बनता।” 

बंसल ने स्वीकार किया कि CEO होने के नाते यह उनकी जिम्मेदारी थी कि वे ऐसी त्रुटियों को पहले पकड़ें। 

इसपर शेफाली वैद्य ने पलटवार करते हुए कहा कि, जो दस्तावेज उन्होंने शेयर किया है, वह फरवरी 2026 का है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह इतना हालिया है, तो इसे ‘पुराना’ कैसे कहा जा सकता है?

यूजर्स ने मांग की है कि लेंसकार्ट अपनी वर्तमान और संशोधित पॉलिसी को सार्वजनिक करे ताकि पारदर्शिता बनी रहे। फिलहाल, पीयूष बंसल ने अपनी टीम को सभी ट्रेनिंग मटेरियल्स की कड़ी समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं और व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी करने का वादा किया है।

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