राज्य शिक्षा निदेशालय शिकायत निवारण प्रणाली शुरू करने के दिए आदेश

निजी स्कूलों द्वारा शैक्षणिक सामग्री के नाम पर अभिभावकों की होने वाली आर्थिक लूट को रोकने के लिए ‘सुराज्य अभियान’ द्वारा चलाए गए अभियान को बड़ी सफलता मिली है। स्कूल ‘किसी विशिष्ट दुकान से ही स्कूल ड्रेस (यूनिफॉर्म), कॉपियाँ या शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए मजबूर न करें’, इसके लिए शिक्षा निदेशालय ने 15 अप्रैल 2026 को एक कड़ा परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया है। इस आदेश की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें केवल नियम नहीं बताए गए हैं, बल्कि एक सक्षम शिकायत निवारण प्रणाली को सक्रिय करने के आदेश भी दिए गए हैं।
Schools can’t force purchases from specific vendors!
Maharashtra school education department issues a fresh circular directing all schools not to compel parents to buy uniforms, textbooks or other materials from specific shops or through the school pic.twitter.com/kJBsFwQVVd
— Surajya Abhiyan (@SurajyaAbhiyan) April 16, 2026
‘सुराज्य अभियान’ ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। सुराज्य अभियान के महाराष्ट्र राज्य समन्वयक श्री. अभिषेक मुरुकटे ने इस अवसर पर कहा कि ऐसी ही पारदर्शी व्यवस्था देश के सभी राज्यों और सभी शिक्षा बोर्डों (CBSE/ICSE) में लागू करने की मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री. धर्मेंद्र प्रधान से पत्र के माध्यम से की गई है।
स्कूलों के लिए परिपत्र में अनिवार्य बातें क्या हैं?
राज्य शिक्षा निदेशालय ने परिपत्र के माध्यम से आदेश दिया है कि उनके अधिकार क्षेत्र के सभी स्कूल शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से ड्रेस और अन्य शैक्षणिक सामग्री किसी विशिष्ट दुकान या स्कूल से ही खरीदने की अनिवार्यता न करने के संबंध में तत्काल प्रस्ताव (Resolution) पारित करें। साथ ही निम्नलिखित बातें अनिवार्य की गई हैं:
- नोडल अधिकारियों की नियुक्ति: इस संबंध में प्राप्त होने वाली शिकायतों के लिए अपने कार्यालय का ई-मेल आईडी सार्वजनिक करें और संबंधित विषय के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करें।
- स्कूल प्रबंधन समिति का प्रस्ताव: इस परिपत्र की जानकारी उनके अधिकार क्षेत्र के सभी प्रबंधन और सभी माध्यमों के स्कूलों तक पहुँचाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार की कार्रवाई करें।
- प्रत्यक्ष शिकायत सुविधा: इस संबंध में शिकायत मिलने पर शिक्षा अधिकारी/प्रशासन अधिकारी उसकी जाँच करें और तथ्य पाए जाने पर संबंधित स्कूल के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करें।
अभिभावकों से सुराज्य अभियान की अपील “केवल नियम होना पर्याप्त नहीं है, उनका प्रभावी क्रियान्वयन ही सच्चा सुशासन है!” यह विचार व्यक्त करते हुए सुराज्य अभियान के महाराष्ट्र राज्य समन्वयक श्री. अभिषेक मुरुकटे ने कहा कि, “स्कूलों की मनमानी के खिलाफ 11 जून 2004 का सरकारी निर्णय (GR) अस्तित्व में होने के बावजूद, प्रभावी क्रियान्वयन और व्यवस्था के अभाव में अभिभावकों की लूट जारी थी। सुराज्य अभियान के निरंतर प्रयासों के कारण अब ये ‘कागजी नियम’ धरातल पर उतरेंगे। महाराष्ट्र में अब शिकायत निवारण का मार्ग खुल गया है, इसलिए अभिभावक बिना डरे नोडल अधिकारियों को या ई-मेल द्वारा साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराएं। अभिभावक इस संदर्भ में सुराज्य अभियान से भी संपर्क कर सकते हैं। स्कूल व्यावसायिक केंद्र नहीं बल्कि ज्ञान का पवित्र मंदिर हैं, इस सिद्धांत को बनाए रखने के लिए अभिभावकों का जागरूक होना आवश्यक है।”
अभियान की राष्ट्रीय व्याप्ति के बारे में श्री. मुरुकटे ने आगे कहा कि, “महाराष्ट्र का यह आदेश एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। भारत के कुछ अन्य राज्यों ने भी इसी तरह के कदम उठाए हैं; लेकिन यह संकट पूरे देश में फैला हुआ है और कई केंद्रीय बोर्डों (CBSE/ICSE) के स्कूल राज्य के नियमों को नहीं मानते हैं। इसलिए हमने केंद्रीय शिक्षा सचिव और शिक्षा मंत्री श्री. धर्मेंद्र प्रधान से मांग की है कि पूरे देश के लिए एक समान ‘नेशनल एडवाइजरी’ जारी की जाए, ताकि किसी भी राज्य के अभिभावकों की आर्थिक लूट न हो।”
निजी स्कूल यूनिफॉर्म और पुस्तकें विद्यालय से ही खरीदने को बाध्य न करें – जिला परिषद शिक्षा विभाग
१२ अप्रैल २०२६
अन्यथा मान्यता रद्द करने की चेतावनी
पुणे – अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालयों में छात्रों को यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तकें केवल विद्यालय से ही खरीदने के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए। ऐसा करने पर विद्यालय की मान्यता रद्द करने की सिफारिश की जाएगी, ऐसी चेतावनी जिला परिषद शिक्षा विभाग ने दी है।
जिले के कई विद्यालयों के विरूद्ध शिकायतें मिली हैं, कि वे छात्रों को यूनिफॉर्म और किताबें विद्यालय से ही खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से विद्यालय अभिभावकों से अधिक पैसे वसूलते हैं।
नियम के अनुसार हर 2 साल में अधिकतम 15% तक ही शुल्क वृद्धि की अनुमति है, लेकिन कुछ विद्यालय इससे अधिक बढ़ोतरी कर रहे हैं।
यदि ऐसी जबरदस्ती की जाती है, तो अभिभावक जिला परिषद से संपर्क करें, ऐसा आवाहन प्राथमिक शिक्षा अधिकारी संजय नाईकडे ने किया है।
सुराज्य अभियान की ओर से भी हो रही है अनिवार्यता रद्द करने की मांग
‘सुराज्य अभियान’के अंतर्गत अभी तक जलगांव, बीड, लातुर, धाराशिव, कोल्हापुर, पुणे, नासिक, अकोला, सातारा, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग आदि १३ से अधिक जिलों में स्थानीय शिक्षाधिकारियों को ज्ञापन प्रस्तुत किए गए हैं । उनमें से अनेक अधिकारियों ने इस पर तत्काल कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है तथा कुछ स्थानों पर आदेश एवं सूचनापत्र प्रसारित किए गए हैं । अभी तक जलगांव, नासिक, सोलापुर, बीड एवं लातुर के शिक्षाधिकारियों ने आदेश प्रसारित किया है । बीड में स्थानीय अधिवक्ता भी इस अभियान में सक्रियतापूर्वक सहभागी हुए हैं ।








