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वारकरी संप्रदाय में ‘घुसपैठिया’ तय करने का अधिकार विकास लवांडे और राष्ट्रवादी को किसने दिया? – हिंदु जनजागृती समिती

विकास लवांडे को तत्काल गिरफ्तार करें ! – हिंदुत्वनिष्ठों की मांग

बाएँ से सर्वश्री संजय ठाकूर, अधिवक्ता पप्पू मोरवाल, अरविंद देठे, सुनील घनवट, हरिभक्त परायण उमेश महाराज आर्य, राजू मंजुळेकर, उदय महा और श्रीकांत पिसोळकर।

अकोला – राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता विकास लवांडे ने वारकरी संप्रदाय के 20 ‘घुसपैठिये’ लोगों की सूची प्रसारित कर स्वयं की और उनके पार्टी की वैचारिक दिवालियापन घोषित की है। विठ्ठल की भक्ति का एक भाग होने वाली वारी, जिसे 800 वर्षों से अधिक का संतों का वारसा प्राप्त है, उसमें अमुक लोग ‘घुसपैठिये’ हैं, यह तय करने का अधिकार विकास लवांडे और उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को किसने दिया? इस संदर्भ में पंढरपुर में हुई पत्रकार परिषद में वारकरी संप्रदाय की ओर से विभिन्न ह.भ.प. महाराज ने एकत्र आकर भूमिका स्पष्ट की है। हिंदु जनजागृती समिती सहित सभी हिंदुत्वनिष्ठ संगठन वारकरी संप्रदाय की इस भूमिका का समर्थन करते हैं। वारकरी संप्रदाय पर किए गए आरोप यह हिंदु संतों पर, हिंदुत्व पर, धर्म पर किए गए आरोप हैं, ऐसा ही हम मानते हैं। यह आरोप लगाकर हिंदु समाज में फूट डालने और संत परंपरा का अपमान करने के षड्यंत्रपूर्वक किए गए प्रयास का हम निषेध करते हैं, साथ ही ‘विकास लवांडे को तत्काल गिरफ्तार करें’, ऐसी इस पत्रकार परिषद के माध्यम से हम शासन से मांग करते हैं, ऐसी भूमिका हिंदु जनजागृती समिती के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ संगठक श्री. सुनील घनवट ने इस समय रखी।

इस अवसर पर हिंदु जनजागृती समिती के विदर्भ समन्वयक श्री. श्रीकांत पिसोळकर, हिंदु राष्ट्र समन्वय समिती के संयोजक श्री. उदय महा, विश्व हिंदु परिषद के जिला अध्यक्ष श्री. राजूभाऊ मंजुळेकर, पुरातन महादेव मंदिर के अध्यक्ष श्री. अरविंद देठे, वारकरी संप्रदाय के ह.भ.प. उमेश महाराज, हिंदू महासभा के अध्यक्ष श्री श्रीराम पांडे उपस्थित थे।

‘अर्बन नक्सलवादी’, ‘अंधश्रद्धा निर्मूलनवाले’, ‘तथाकथित प्रगतिशील’ इन असली घुसपैठियों पर राष्ट्रवादी का मौन!

वास्तव में पिछले कुछ वर्षों से वारी में नियोजनबद्ध तरीके से ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिती’, ‘तथाकथित प्रगतिशील’ के माध्यम से ‘अर्बन नक्सलवादियों’ ने घुसपैठ की है। ‘अल्ला देवे, अल्ला दिलावे…’ जैसे अभंगों को गलत तरीके से तोड़-मरोड़ कर दिखाकर वारी को ‘सेक्युलर’ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। ‘संविधान दिंडी’ निकालकर जो वारकरी संविधान के अनुसार ही आचरण करते हैं, उन्हें सिखाने का प्रयास करते हैं। कभी ईद के दिन ‘संविधानिक ईद’ या क्रिसमस के समय ‘संविधानिक क्रिसमस’ जैसे उपक्रम चलाते समय यह मंडली दिखती है क्या? इसके विपरीत संतों के अभंगों का स्वतः को चाहिए वैसा अर्थ निकालकर हिंदु समाज को दिशाभूल करने वाली मंडली की वारी में भरमार हो गई है। यह असली ‘घुसपैठ’ है। इस पर राष्ट्रवादी के नेता सुविधाजनक रूप से मौन साधते हैं।

वारी यह हमारी संत परंपरा का, विठ्ठल की भक्ति का भाग है। वारी ‘सेक्युलर’ न होकर वह ‘धार्मिक परंपरा’ है। इन परंपराओं पर आघात करने के लिए हो रहे प्रत्येक प्रयास को हमें विफल करना चाहिए। प्रत्येक वारकरी बांधव, ह.भ.प., सहित प्रत्येक श्रद्धालु हिंदू को इसमें पहल करनी चाहिए। अपने धर्म पर होने वाले आघातों के विरोध में आवाज उठाने के लिए संगठित होना चाहिए, ऐसा आवाहन हम करते हैं। साथ ही हम सभी हिंदुत्वनिष्ठ संगठन वारकरी संप्रदाय की परंपरा अबाधित रखने के लिए, साथ ही वारी में ‘अर्बन नक्सलवादियों’ की घुसपैठ को रोकने के लिए कटिबद्ध हैं। हमारी राज्य सरकार से मांग है कि, विकास लवांडे यदि वारकरी संप्रदाय की सार्वजनिक क्षमा नहीं मांगते हैं, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए।

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