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छात्रों के ‘डिजिटल व्यसन’ को रोकने के लिए ‘स्क्रीन टाइम’ पर प्रतिबंध लगाएं – हिन्दू जनजागृति समिति

मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से मांग

पणजी – छात्रों में बढते ‘डिजिटल व्यसन’ को रोकने के लिए गोवा में कर्नाटक राज्य की तर्ज पर ‘स्क्रीन टाइम’ पर प्रतिबंध लगाया जाए, ऐसी मांग हिंदू जनजागृति समिति ने गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से एक ज्ञापन के माध्यम से की है। समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने यह ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में अधिवक्ता रूपेश गावस और श्री प्रमोद नाणोस्कर उपस्थित थे।

बाएं से अधिवक्ता रूपेश गावस और श्री प्रमोद नाणोस्कर

छात्रों में बढती डिजिटल लत की समस्या को नियंत्रित करने के लिए समिति ने गोवा सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • छात्रों के हित में डिजिटल उपयोग से संबंधित नीति तैयार की जाए।
  • पढाई के अलावा छात्रों का ‘स्क्रीन टाइम’ प्रतिदिन 1 घंटे तक सीमित रखा जाए और शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए।
  • प्रत्येक स्कूल अपनी स्वयं की ‘डिजिटल उपयोग नीति’ बनाए।
  • इंटरनेट के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न चिंता, नींद की कमी और एकाग्रता की समस्या के समाधान हेतु स्कूलों में प्रभावी काउंसलिंग व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
  • छात्रों को साइबर बुलिंग (सोशल मीडिया या गेम्स के माध्यम से परेशान करना, धमकाना या अपमानित करना), गोपनीयता और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के बारे में शिक्षित किया जाए।
  • 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़े नियम बनाए जाएं और घरों में ‘नो-फोन ज़ोन’ (जहां मोबाइल का उपयोग प्रतिबंधित हो) निर्धारित किए जाएं।
  • बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाए।

गोवा सरकार भी 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के विषय पर विचार कर रही है और इसके लिए एक समिति का गठन किया गया है। हिंदू जनजागृति समिति ने आशा व्यक्त की है कि सरकार ‘स्क्रीन टाइम’ पर प्रतिबंध लगाने की उनकी मांग को स्वीकार करेगी।

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