धर्माभिमानी अधिवक्ताओं को वैचारिक संघर्ष के लिए तैयार होना चाहिए ! – सद्गुरु नीलेश सिंगबाळ, धर्मप्रचारक, हिंदू जनजागृति समिति

अयोध्या (उत्तर प्रदेश) – वर्तमान समय में हिंदुओं के विरोधियों ने एक वैचारिक युद्ध छेड दिया है। इसलिए बौद्धिक स्तर पर इस संघर्ष को जीतने के लिए ऐसे वैचारिक योद्धाओं की आवश्यकता है, जो भारतीय कानूनों का गहन अध्ययन करें और संविधान के प्रावधानों की उचित व्याख्या करते हुए हिंदुओं की कानूनी पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत करें। इस कारण सभी धर्माभिमानी अधिवक्ताओं को इस वैचारिक संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए। यह मार्गदर्शन हिंदू जनजागृति समिति के धर्मप्रचारक सद्गुरु नीलेश सिंगबाळ ने किया। वे ‘राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति’ द्वारा उत्तर प्रदेश के अयोध्या, प्रतापगढ़ और प्रयागराज में आयोजित अधिवक्ताओं की बैठकों को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर समिति के श्री विश्वनाथ कुलकर्णी और श्रीमती प्राची जुवेकर भी उपस्थित थे। बैठकों में यह मांग रखी गई कि मुसलमानेतर महिलाओं को मुसलमान पुरुष से विवाह करने के लिए इस्लाम धर्म स्वीकार करना पड़ता है; परंतु यदि किसी कारणवश उन्हें तलाक लेना हो, तो उन्हें लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस्लामी प्रावधानों के अनुसार यदि कोई महिला अपने मूल धर्म में वापस लौटती है, तो विवाह स्वतः निरस्त हो जाता है।
इसी आधार पर ऐसी मुसलमानेतर महिलाओं के लिए तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ऐसी मांग इन बैठकों में की गई। साथ ही इस मांग को देशभर से समर्थन प्राप्त करने का संकल्प भी लिया गया।
इन बैठकों में अयोध्या के ‘मिल्कीपूर बार एसोसिएशन’ के अध्यक्ष अधिवक्ता पवन कुमार शुक्ला, अधिवक्ता अमरजीत सिंह, अधिवक्ता घनश्याम मौर्य, प्रतापगढ़ के अधिवक्ता नीरज तिवारी तथा प्रयागराज के अधिवक्ता ज्ञानेंद्र मिश्रा और अधिवक्ता धरणीधर पांडे सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित थे।








