
अजमेर (राजस्थान) – हिंदुओं को लंबे समय से भ्रामक और विकृत कथानकों में उलझाकर प्रस्तुत किया गया है। ऐसी स्थिति से बाहर निकलकर सत्य इतिहास और धर्माधारित आदर्शों को स्वीकार करना समय की आवश्यकता है, ऐसा मार्गदर्शन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शन सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे ने किया।
यह मार्गदर्शन अजमेर के गुलाब बाड़ी स्थित शालीग्राम मंदि में ‘आदेश सेवा समिति’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में किया गया। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा राजस्थान और मध्यप्रदेश के समन्वयक श्री आनंद जाखोटिया उपस्थित थे।

हिन्दू झूठे षड्यंत्र के शिकार!
सद्गुरु डॉ. पिंगळे ने कहा कि “घर का भेदी लंका ढहाए” जैसी कहावतों को विश्वासघात के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता में लंकादहन अधर्म का नाश था, न कि घर का विनाश। प्रभु श्रीराम के आदर्शों के अनुसार विभीषण ने धर्म का पक्ष लेकर सत्य का मार्ग अपनाया, जो सनातन धर्म की मूल भावना को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि, “जो जीता वही सिकंदर” जैसी मानसिकता से बाहर निकलकर राष्ट्रनायक, जैसे चंद्रगुप्त मौर्य को आदर्श मानने की आवश्यकता है, जिन्होंने राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए कार्य किया।
मार्गदर्शन में उन्होंने कहा कि, माता-पिता को संस्कारों की शुरुआत अपने घर से करनी चाहिए। बच्चों को नियमित रूप से संस्कारवर्ग से जोडना चाहिए, जिससे उनके चरित्र निर्माण में सहायता मिले।
उन्होंने स्पष्ट किया कि, सनातन धर्म की प्रत्येक परंपरा शास्त्र और विज्ञान पर आधारित है। यदि उसे समझकर जीवन में अपनाया जाए, तो शरीर, मन और जीवन से जुड़ी अनेक समस्याओं का समाधान संभव है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी ने धर्मजागृति और संस्कार संवर्धन के लिए सक्रिय रहने का संकल्प व्यक्त किया।








