‘सुराज्य अभियान’ की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कडा संज्ञान
सोलापुर जिले की जीवनरेखा मानी जानेवाली उजनी बांध में भीषण जलप्रदूषण और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य आपातकाल पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीर रुख अपनाया है। ‘सुराज्य अभियान’ द्वारा दायर की गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए, आयोग ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के अध्यक्ष और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग के सदस्य श्री प्रियंक कानूनगो ने मामले की गहन जांच करने और अगले दो सप्ताह के भीतर ‘कार्रवाई रिपोर्ट’ (Action Taken Report) पेश करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
‘सुराज्य अभियान’द्वारा आयोग के समक्ष प्रस्तुत प्रमाणों के अनुसार, उजनी के पानी में मैंगनीज का स्तर 2.56 mg/L पाया गया है, जो सुरक्षित सीमा से 51 गुना अधिक है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अपनी रिपोर्ट में यह चौंकानेवाला स्वीकारोक्ति है कि पुणे और सोलापुर शहरों से प्रतिदिन लगभग 4,262 मिलियन लीटर बिना उपचारित (untreated) सीवेज सीधे बांध में छोड़ा जा रहा है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) की रिपोर्ट के अनुसार, यह पानी मानव उपभोग के लिए ‘अत्यंत असुरक्षित’ है और इसमें TDS का स्तर 700 ppm तक पहुंच गया है।
सुराज्य अभियान के महाराष्ट्र राज्य समन्वयक श्री. अभिषेक मुरुकटे ने कहा, “यह केवल पर्यावरणीय प्रदूषण नहीं है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त ‘जीवन के अधिकार’ का उल्लंघन है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रदूषण के गंभीर प्रमाण होने के बावजूद प्रशासन ने कोई स्वास्थ्य चेतावनी जारी नहीं की और न ही प्रभावित 28 गांवों के लिए पीने के पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की, जो सरकारी अधिकारियों की अक्षम्य लापरवाही है।
सुराज्य अभियान की मांगें
प्रभावित नागरिकों की तत्काल ‘ब्लड-मेटल स्क्रीनिंग’ (रक्त में भारी धातुओं की जांच) की जाए |
लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और ‘चिकित्सा मुआवजा कोष’ स्थापित किया जाए।
प्रभावित गांवों को तत्काल स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
प्रसिद्धीपत्रक में उल्लेख किया गया है कि, नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा और पर्यावरणीय न्याय के लिए सुराज्य अभियान अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।








