जलगांव में हिन्दुओं की ऐतिहासिक एकजुटता!

जलगांव – माथे पर तिलक, हाथों में भगवा ध्वज और मुख से ‘जय श्रीराम’ का जयघोष करते हुए यहां आयोजित हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा में हजारों हिन्दुओं ने हिन्दू राष्ट्र स्थापना का उद्घोष किया। मान्यवर वक्ताओं ने हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज के मावलों की तरह बनने का आह्वान किया और उपस्थित धर्माभिमानी हिन्दुओं ने धर्मकार्य में योगदान देने की प्रतिज्ञा कर उसका समर्थन किया। संतों की वंदनीय उपस्थिति तथा विभिन्न संगठनों के धर्माभिमानी हिन्दू, हिन्दुत्वनिष्ठ जनप्रतिनिधि और समस्त हिन्दू धर्मप्रेमियों की सहभागिता से मानराज पार्क स्थित श्रीराम मंदिर संस्थान के मैदान में 1 फरवरी को यह हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा संपन्न हुई। हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित इस सभा में पद, पक्ष और संगठन के भेद से ऊपर उठकर हजारों हिन्दुओं ने हिन्दुत्व का हुंकार भरा।



महामंडलेश्वर जनार्दनगिरि महाराजजी, सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी एवं सद्गुरु स्वाती खाडयेजी की वंदनीय उपस्थिति रही। साथ ही लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज सिंहा (सेवानिवृत्त), हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता श्री वीरेंद्र इचलकरंजीकर और हिन्दू जनजागृति समिति के उत्तर महाराष्ट्र समन्वयक श्री प्रशांत जुवेकर प्रमुख अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित थे।
सभा की शुरुआत शंखनाद से हुई। श्री गणेश और ग्रामदेवता प्रभु श्रीराम का पूजन किया गया। इसके पश्चात मान्यवरों के करकमलों से दीप प्रज्वलन कर सभा का शुभारंभ हुआ। ‘प्रौढप्रताप पुरंदर, क्षत्रिय कुलावतंस…’ जैसे जयघोष के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज की अर्ध प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित किया गया। वेदमूर्ति श्रीराम जोशी, महेंद्र जोशी और पराग जोशी ने वेदमंत्रों का उच्चारण किया। इसके बाद वेदमूर्ति और वक्ताओं का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन श्री सतीश कोचरेकर ने किया।
हिन्दू राष्ट्र के नाम पर हंगामा करने वाले ‘मुंब्रा हरा करेंगे’ कहने पर चुप! – सद्गुरु स्वाती खाडये, धर्मप्रचारक, सनातन संस्था

हिन्दू राष्ट्र की बात करते ही हिन्दू विरोधी और तथाकथित प्रगतिशील लोग हंगामा करने लगते हैं; लेकिन ‘मुंब्रा हरा करेंगे’ कहने पर यही लोग चुप रहते हैं। हिन्दू राष्ट्र कोई नई संकल्पना नहीं है, बल्कि यह भारत का मूल स्वरूप है। त्रेतायुग का रामराज्य, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा स्थापित धर्मराज्य, कृष्णदेवराय का विजयनगर साम्राज्य और छत्रपति शिवाजी महाराज का हिंदवी स्वराज्य – ये सभी सनातन राष्ट्र के ही रूप हैं। जब लिखित संविधान नहीं था, तब धर्म के नियम ही संविधान थे। वर्तमान समय संक्रमण काल है, इसलिए रामराज्य की सुबह को कोई रोक नहीं सकता। जैसे रामराज्य की स्थापना में वानर सेना ने भूमिका निभाई थी, वैसे ही आज प्रत्येक हिन्दू को अपने कौशल, तन-मन-धन के साथ हिन्दू राष्ट्र स्थापना के लिए समर्पित होना होगा।
हिन्दुओं को दबाव की नीति अपनानी होगी! – प्रशांत जुवेकर, हिन्दू जनजागृति समिति
यदि हिन्दुओं की श्रद्धा को पैरों तले कुचला जा रहा हो, हिन्दू हित के कानून बनने में विलंब हो रहा हो और हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने में शासन-प्रशासन टालमटोल कर रहा हो, तो इसे रोकने के लिए हिन्दुओं को दबाव की नीति अपनानी होगी। ‘कोई और हमारे आंसू पोंछेगा’ इस भ्रम में हिन्दू समाज न रहे। केवल जागरूक और संगठित होना पर्याप्त नहीं, बल्कि सभी प्रकार के जिहाद को समाप्त करने हेतु सक्षम और क्रियाशील बनना आवश्यक है।
झलकियां
- हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी के अवसर पर उनके प्रखर विचारों पर आधारित ध्वनिचित्रफीत दिखाई गई।
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शुभकामनाएं दी गई।
- लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज कुमार सिंहा (सेवानिवृत्त) की शौर्यगाथा पर आधारित ध्वनिचित्रफीत दिखाई गई।
अधर्म का प्रतिकार ही मोक्ष का मार्ग! – लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज सिंहा (सेवानिवृत्त)

पितामह भीष्म ने जीवनभर आदर्श जीवन जिया, लेकिन कौरव सभा में द्रौपदी के वस्त्रहरण का विरोध नहीं किया, इसलिए वे भी पाप के भागी बने। इसके विपरीत, जटायु पक्षी होते हुए भी उसने रावण के अधर्म का विरोध किया और श्रीराम की गोद में उसे मृत्यु प्राप्त हुई। जीवन में कितने भी पुण्य कर्म किए हों, यदि अधर्म का प्रतिकार नहीं किया तो पुण्य का क्षय हो जाता है। अधर्म का प्रतिकार ही मोक्ष का माध्यम है। श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता में अर्जुन को यही संदेश दिया था और कलियुग में भी यही मार्ग हिन्दुओं के लिए पथप्रदर्शक है।
माता-बहनों से आह्वान – धर्म के लिए लडने वालों के लिए प्रार्थना करें! – अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर

जब छत्रपति शिवाजी महाराज अफजलखान का वध करने गए थे, तब उनकी पत्नी सईबाई अस्वस्थ थीं; फिर भी उन्होंने शिवाजी महाराज को रोका नहीं। उनका विचार था – ‘पहले हिंदवी स्वराज्य’। आज भी हमें सईबाई और माता जिजाऊ जैसी माताओं और बहनों की आवश्यकता है। जैसे आप अपने पति की रक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं, वैसे ही हिन्दू धर्म के लिए संघर्ष करने वालों के लिए भी प्रार्थना करें। मन में हिन्दू राष्ट्र स्थापना की ज्वाला प्रज्वलित रखें, क्योंकि हिन्दू राष्ट्र यूं ही नहीं मिलेगा, उसके लिए बलिदान देना होगा।








