न्यू अशोक नगर (दिल्ली) में ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ उत्साह के साथ संपन्न

नई दिल्ली – “भारत कभी विश्वगुरु था और विश्व के ३५ प्रतिशत व्यापार पर हमारा नियंत्रण था। आध्यात्मिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से हम विश्व की महाशक्ति थे; परंतु आज स्थिति इसके विपरीत है। विश्व की तीसरी सबसे बडी जनसंख्या होने के बाद भी यदि हिंदू समाज संघर्ष कर रहा है, तो इसका एकमात्र कारण ‘स्वबोध’ और ‘शत्रुबोध’ का अभाव है,” ऐसा ओजस्वी प्रतिपादन हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले जी ने किया।
दिल्ली के न्यू अशोक नगर में आयोजित ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ में उपस्थित धर्मप्रेमियों को वे संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने हिंदुओं को अपनी गौरवशाली परंपराओं की ओर लौटने और राष्ट्र की रक्षा हेतु संगठित होने का आह्वान किया।


सद्गुरु डॉ. पिंगले जी द्वारा प्रतिपादित कुछ महत्वपूर्ण सूत्र:
धर्मांतरण और षड्यंत्रों का संकट: उन्होंने सचेत किया कि विदेशी आक्रांताओं और वर्तमान में चल रहे विभिन्न षड्यंत्रों ने हमारी जड़ों को कमजोर किया है। अपनी अस्मिता बचाने के लिए हिंदू समाज को अब जागना ही होगा।
पश्चिमी अंधानुकरण का त्याग करें: समाज को विदेशी संस्कृति और कैलेंडर के प्रभाव से बाहर निकलना चाहिए। अपने उत्सव और जन्मदिन भारतीय परंपराओं के अनुसार मनाकर ही हम अपनी संस्कृति का संरक्षण कर सकते हैं।
प्रभु श्रीराम का आदर्श: जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने धर्म की स्थापना की, उसी प्रकार प्रत्येक हिंदू को अपने जीवन में धर्म का आचरण करना चाहिए।
एकजुटता ही समाधान: जब तक हिंदू समाज संगठित होकर अपनी शक्ति नहीं पहचानता, तब तक राष्ट्र को पुनः विश्वगुरु बनाना संभव नहीं है।
इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में स्थानीय धर्मप्रेमी, विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने धर्मरक्षा और राष्ट्रसेवा का संकल्प लिया।








