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हिन्दुओं पर हो रहे अन्याय रोकने के लिए हिंदवी स्वराज्य जैसा हिन्दू राष्ट्र ही चाहिए ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति

‘सनातन राष्ट्र भूमिका’ इस विषय पर बोलते समय सेक्युलरवाद की आड में हिन्दुओं का होनेवाला दमन किया उजागर !

रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति
रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति

भारत मंडपम्, देहली – आज भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लेख है कि,‘यह देश सेक्युलर है’: परंतु संविधान की धारा २५ के अनुसार पंथ के आधार पर भेदभाव किया गया है । अर्थात अल्पसंख्यकों के लिए अलग नियम, अलग प्रावधान आदि किया गया है । सेक्युलर देश में ऐसे भेदभाव का क्या काम ? कांग्रेसकृत यह विरोधाभास १०० करोड हिन्दुओं के साथ किया गया धोखा है । इस प्रश्न के साथ हिन्दुओं पर विविध प्रकार से होनेवाले अन्याय रोकने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज के धर्माधिष्ठित हिन्दवी स्वराज्य जैसा हिन्दू राष्ट्र स्थापित करना, यही रामबाण उपाय है । इसके लिए सक्रिय होने का संकल्प करने के लिए ही यह ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ है, ऐसा क्षात्रतेजवर्धक वक्तव्य हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने दिया । १४ दिसंबर को वे ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में ‘सनातन राष्ट्र की मांग के पीछे की भूमिका’ इस विषय पर बोल रहे थे । इस समय श्री. शिंदे ने अन्यायी सेक्युलरवाद का पर्दाफाश किया तथा उपस्थित धर्मप्रेमियों को इस सूत्र के बारे में अंतर्मुख किया ।

इस समय व्यासपिठ पर छत्तीसगढ के शदाणी दरबार के नौंवे पीठाधीश्वर प.पू. युधिष्ठिरलालजी महाराज, विश्व हिन्दू परिषद के महामंत्री श्री विज्ञानानंद स्वामीजी, ‘पावन चिंतनधारा आश्रम’ के संस्थापक पू. पवन सिन्हा, ‘सेव कल्चर सेव भारत फाऊंडेशन’ के संस्थापक एवं पूर्व सूचना आयुक्त श्री. उदय माहुरकर, सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारीणियां श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी और श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी उपस्थित थीं ।

भारत के मूर्खतापूर्ण सेक्युलरवाद का श्री. रमेश शिंदे ने किया पर्दाफाश !

१. संविधान बनाते समय ‘सेक्युलर’ शब्द उसमें अंतर्भूत करने की सूचना आई थी । इसपर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने स्पष्ट कहा था, ‘भारत का संचालन सुयोग्य पद्धति से हो, इसलिए संविधान बनाया जा रहा है । संविधान कोई व्यक्तिगत घोषणापत्र नहीं है । ‘सेक्युलर’ शब्द का अंतर्भाव करने से संविधान का लचीलापन (उपयोग क्षमता) ही समाप्त हो जाएगा । इसलिए विदेश से आया ‘सेक्युलरवाद’ भारतीय संविधान में अंतर्भूत न करें ।’ ऐसा होते हुए भी इंदिरा गांधी ने वर्ष १९७६ में ४६ वा संविधान सुधार कर ‘सेक्युलर’ शब्द घुसेडा और संविधान के उस पन्ने पर  दिनांक भी पुराना ही रखा । यह हिन्दुओं के साथ किया गया बडा धोखा है ।

२. ‘जमियत उलेमा-ए-हिंद’ के मौलाना महमूंद मदनी कहते हैं, ‘‘वर्ष १९४० में नेहरू समिति ने ‘जमियत’ के पदाधिकारियों को स्वतंत्र भारतीय राज्य मुसलमानों के हितसंबंध संजोएगा, ऐसे अर्थ की मांगों को सहमति दर्शाई थी । पाकिस्तान स्वतंत्र होने पर जब भारत ‘हिन्दू राष्ट्र’ बनने जा रहा था, तब हम सभी गांधी-नेहरू से मिले । उन्हें आग्रहपूर्वक बताया कि १९४० के वचनानुसार भारत में मुसलमानाें का हित संजोनेवाला ‘सेक्युलर’ राज्य चाहिए । उन्होंने यह स्वीकार किया ।’’ इससे स्पष्ट होता है कि भारत में सेक्युलरवाद कैसे आया । यहां ध्यान में लेने जैसा सूत्र यह है कि बॅरिस्टर जिन्ना ने स्वतंत्र देश की मांग की । इस मांग का स्वीकार किया जाने के उपरांत भी दिए गए ‘मुसलमान हित का राज्य’, इस विकल्प को निरस्त करना चाहिए था; परंतु कांग्रेस ने वैसा न कर हिन्दुओं की पीठ में खंजर भोंक दिया !

३. यदि आज भारत सेक्युलर है, तो केवल हिन्दुओं के मंदिर अधिग्रहित क्यों किए जाते है ? तमिलनाडु में मंदिराें पर दिया जलाने का भी शासन विरोध क्यों करता है ?

४. कुछ समय पहले कर्नाटक शासन ने ‘विद्वेषी वक्तव्याें’ के विरूद्ध की अधिसूचना को सहमति दर्शाई । आज देश में केवल हिन्दुत्वनिष्ठाें पर ही ‘विद्वेषी वक्तव्याें’ के अपराध प्रविष्ट किए जाते है; परंतु ‘सर तन से जुदा’ जैसी (सिरच्छेद जैसी) घोषणाएं विद्वेषी वक्तव्याें में क्यों नहीं आती ? उदयनिधी स्टॅलिन हिन्दू धर्म को उखाडकर फेंक देने की भाषा करते है; परंतु उसे ‘विद्वेषी वक्तव्य’ नहीं माना जाता । कर्नाटक के कांग्रेस के मंत्री प्रियांक खर्गे हिन्दू धर्मविरोधी वक्तव्य देते हैं, तब भी उनपर कार्यवाही नहीं होती । इसका अर्थ यही है कि यहां के कानून केवल हिन्दुओं के दमन के लिए ही उपयोग में लाए जाते हैं ।

५. कुछ वर्ष पूर्व लोकसभा में ‘लक्ष्यित हिंसा प्रतिबंधक अधिसूचना’ लाई गई थी । इसमें अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए बहुसंख्यकों पर प्रतिबंध लानेवाली धाराएं थी । इस अधिसूचना को निरस्त करना पडा, तब भी ‘हिन्दुओं पर अन्याय करनेवाले और हिन्दुओं का शोषण करनेवाले कानून और प्रावधान, अर्थात भारतीय सेक्युलरवाद’ ऐसी स्थिति है ।

६. वहां बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ९९ प्रतिशत मुसलमानाें को ‘अन्य पीछडी जातियों’ में अंतर्भूत किया है । आज देश में हिन्दुओं की केवल ६१ जातियां, तो मुसलमानाें की १७९ जातियां अन्य पीछडी जातियों में समाविष्ट हैं । अर्थात हिन्दूविरोधी राज्यकर्ताओं के माध्यम से हिन्दुओं के संविधान प्रद‍त्त अधिकार भी आज छिन लिए जा रहे हैं ।

७. यह सब रोकने के लिए, हिन्दुओं का खरा हित साधने के लिए ‘वसुधैव कुटुम्बकम् ।’ इस वचन पर श्रद्धा रखनेवाला, किसी की भी चापलूसी न कर सभी के साथ समान आचरण करनेवाला, गद्दार को शिवछत्रपति देते थे, वैसा दंड देनेवाला धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र स्थापित करना, यही खरा उपाय है । इसका संकल्प करने के लिए ही यह शंखनाद महोत्सव है !

क्षणिकाएं

१. श्री. रमेश शिंदे ने कहा कि, ‘भारत मंडपम्’ में हिन्दू राष्ट्र से संबंधित ऐसा महोत्सव संपन्न होना, एक ऐतिहासिक क्षण है ।

२. श्री. शिंदे ने ऐसा भी प्रश्न उपस्थित किया कि, आज हम ‘वन्दे मातरम् ।’ इस राष्ट्रीय गीत का शतकोत्तर सुवर्णमहोत्सव मना रहे हैं, तब भी आज के जो अहिन्दू लोकप्रतिनिधी सांसद में राष्ट्रीय गीत के समय उठकर खडे नहीं होते, उनपर कार्यवाही कब होगी ? ‘राष्ट्रपिता गांधी’ को वंदन करना उन्हें स्वीकार है, तो भारतमाता को वंदन करना स्वीकार क्यों नहीं है ?

३. इस समय संविधान की प्रस्तावना में किए परिवर्तन, ‘जमियत उलेमा-ए-हिन्द’ का इतिहास,  मौलाना मदनी के वक्तव्यों का लघुचलचित्र बडे पर्दे पर दिखाया गया, इसलिए अत्यंत अल्प समय में यह विषय सभी को समझना सरल हो गया ।

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