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छत्रपति शिवाजी महाराजजी के तेजस्वी आदर्श को सामने रखकर, राष्ट्रद्रोही शक्तियों के विरुद्ध दिल्ली में ‘शंखनाद’ ! – रमेश शिंदे

‘उदय इंडिया’ यू ट्यूब चैनल पर विशेष भेंटवार्ता (इंटरव्यू)

बाएँ से बोलते हुए श्री. रमेश शिंदे और श्री. अंशुमान आनंद
बाएँ से बोलते हुए श्री. रमेश शिंदे और श्री. अंशुमान आनंद

नई दिल्ली – ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ (धर्म की रक्षा करने वाले की धर्म, अर्थात् ईश्वर, रक्षा करता है) इस उक्ति के अनुसार, राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए सनातन संस्था की ओर से दिल्ली के प्रतिष्ठित ‘भारत मंडपम्’ में १३ और १४ दिसंबर को ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का आयोजन किया गया है ।

सनातन संस्था की रजत जयंती (२५वीं वर्षगांठ) के उपलक्ष्य में आयोजित यह कार्यक्रम राष्ट्रद्रोही शक्तियों के विरुद्ध एक प्रखर ‘शंखनाद’ (एक जोरदार घोषणा) सिद्ध होगा, ऐसा हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने ‘उदय इंडिया’ यू ट्यूब चैनल को दिए एक विशेष भेंटवार्ता में बताया । चैनल के श्री. अंशुमान आनंद ने यह भेंटवार्ता ली ।

‘राजधानी के असुरक्षित वातावरण में राष्ट्र रक्षा का जागरण’ इस महोत्सव के उद्देश्य के बारे में बात करते हुए श्री. रमेश शिंदे ने कहा कि आज दिल्ली जैसी राजधानी में दंगे करवाए जाते हैं, बम विस्फोट करनेवाले देशद्रोही पाए जाते हैं । लाल किले के पास हाल ही में हुए बम विस्फोट में ‘अल फलाह’ विश्वविद्यालय से पढे हुए मुस्लिम डॉक्टर सम्मिलित थे ।

ऐसे असुरक्षित वातावरण में केवल चर्चा न करते हुए, अपितु ठोस कार्रवाई योग्य उपाय सुझाने के लिए यह महोत्सव आयोजित किया गया है । अंग्रेजों ने वर्ष १८८५ में ‘शस्त्रास्त्र कानून’ (वेपन्स एक्ट) लाकर हिन्दुओं को नि:शस्त्र कर दिया था, वह मानसिकता आज भी कायम है । इस पृष्ठभूमि पर, हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श सामने रखकर यह महोत्सव संपन्न होगा ।

१३ दिसंबर को ‘संस्कृति रक्षा’ (संस्कृति की रक्षा) और १४ दिसंबर को ‘राष्ट्र सुरक्षा’ (राष्ट्र की सुरक्षा) इन विषयों पर अनेक मंत्री, सेना के पूर्व अधिकारी, विचारक और गणमान्य व्यक्ति मार्गदर्शन करेंगे ।

‘सव्यसाची गुरुकुलम्’ की युवतियों की शौर्यगाथा !

आज के समय में बच्चे परीक्षा के तनाव में रहते हैं; किंतु, छत्रपति शिवाजी महाराजजी के काल में बचपन में ही शस्त्र-विद्या में पारंगत (निपुण) कैसे हुआ जाता था ? यह दिखाने के लिए कोल्हापुर स्थित ‘सव्यसाची गुरुकुलम्’ के विद्यार्थी उपस्थित रहेंगे । विशेष बात यह है कि इसमें अनेक युवतियां और रणरागिनियां (वीरांगनाएं) पारंपरिक शस्त्रों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन करेंगी ।

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