भारत की नई पीढी के सामने सनातन धर्म की वैज्ञानिकता, व्यावहारिकता और आवश्यकता को प्रस्तुत करना आवश्यक ! – आनंद जाखोटिया, हिन्दू जनजागृति समिति

कोटा (राजस्थान) – धर्म केवल पूजा पद्धति तक ही सीमित नहीं है, अपितु वह परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराता है । धर्म हमें सिखाता है कि देव, ऋषि, पितर और समाज के प्रति हमारा दायित्व क्या है । हमारे पूर्वजों ने अपने दायित्व को बहुत अच्छी तरह निभाया; परंतु आज समाज इन मूल्यों को भूलने लगा है । समाज में बढता स्वार्थ और तनाव इस बात का परिणाम है कि हमारे जीवन से धर्म लुप्त हो रहा है । यदि सनातन धर्म की वैज्ञानिकता, उसकी व्यावहारिकता और आवश्यकता नई पीढी के सामने रखी जाए, तो यह स्थिति निश्चित रूप से बदल सकती है । हिन्दू जनजागृति समिति इसी दिशा में कार्य कर रही है, ऐसा उद्बोधन हिन्दू जनजागृति समिति के मध्यप्रदेश और राजस्थान समन्वयक श्री. आनंद जाखोटिया ने किया । कोटा में आयोजित महाराष्ट्रीय समाज के दीपावली मिलन समारोह में, वे ‘तनावग्रस्त विश्व के लिए सनातन जीवनशैली ही उपाय है’ विषय पर बोल रहे थे ।
पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होळकर सभागार में हुए इस कार्यक्रम में, वक्ता विशाल उपाध्याय ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताया । इस अवसर पर महाराष्ट्रीय समाज के अध्यक्ष श्री. अनिल खांडेकर, सचिव भावना काळे, न्यासी (ट्रस्टी) श्री सतीश लेले और श्री हरिश खांडेकर उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन अमोल चावरेकर ने किया ।








