
कोल्हापुर में कॉ. पानसरे की हत्या के मामले में, बिना किसी ठोस सबूत के और कोई आपराधिक पृष्ठभूमि न होने वाले निर्दोष हिंदुत्ववादी युवाओं को गिरफ्तार कर हिंदुओं को आतंकवादी ठहराने का प्रयास किया गया। इस मामले को 10 वर्ष हो जाने के उपरांत, कोल्हापुर के वामपंथी-पुरोगामी गुटों द्वारा दबाव बनाकर मुकदमा लंबा खींचकर इन युवाओं को जेल में ही सड़ाने की साजिश चल रही थी; लेकिन मुंबई उच्च न्यायालय की कोल्हापुर सर्किट बेंच ने आज इस मामले के अंतिम 3 संदिग्धों को जमानत दे दी, जिससे उनकी यह षडयंत्र विफल हो गई।
कोम्रेड गोविंद #पानसरे हत्याकांड प्रकरणातील तिन्ही हिंदुत्वनिष्ठ आरोपींना डॉ. विरेंद्रसिंह तावडे (ईएनटी तज्ज्ञ व माजी समिती कार्यकर्ता), श्री. अमोल कळे आणि श्री. शरद कलस्कर यांना #कोल्हापूर खंडपीठ, #मुंबई उच्च न्यायालयाने जामीन मंजूर केला आहे.
गेल्या १० वर्षांपासून… pic.twitter.com/6bnjCmZOyM
— HinduJagrutiOrg (@HinduJagrutiOrg) October 14, 2025
इन संदिग्धों में पूर्व में हिंदू जनजागृति समिति का कार्य देखने वाले और कान-नाक-गला विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्रसिंह तावडे भी शामिल हैं। उनके साथ श्री. अमोल काले और शरद कलस्कर जैसे हिंदुत्वनिष्ठों को भी जमानत मिल गई है। ‘जमानत नियम है; जेल अपवाद है’, इस तरह का वाक्य न्यायाधीशों ने कई फैसलों में उपयोग किया है; लेकिन इस मामले में सबूत न होने के उपरांत इन हिंदुत्वनिष्ठों को वर्षों तक जेल में सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। इसके विरुद्ध लड़ने वाले कई प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं ने अथक प्रयास कर उनका सही पक्ष प्रस्तुत किया और उनके साथ हुए अन्याय को माननीय न्यायालय के संज्ञान में लाया। हिंदू जनजागृति समिति की ओर से हम उन सभी अधिवक्ताओं का भी अभिनंदन करते हैं। दिवाली के त्योहार से पहले यह खबर समस्त हिंदुत्वनिष्ठों के लिए एक आनंदवार्ता है।








