हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति की जिलाधिकारी से मांग
राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से घातक गतिविधियों का समर्थन करनेवालों का उद्देश्य उजागर हो ! – समिति की भूमिका

अकोला – लद्दाख में सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के विरोध में अकोला में ४ अक्टूबर को निकाले गए मोमबत्ती मोर्चा के संबंध में जांच की जानी चाहिए, यह मांग ‘हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति’ की ओर से एक ज्ञापन के माध्यम से जिलाधिकारी वर्षा मीना से की गई।
इस ज्ञापन में यह उल्लेख है कि सोनम वांगचुक को लेह-लद्दाख में हिंसक आंदोलन के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत बंदी बनाया गया । उनकी संस्थाओं पर विदेशों से प्राप्त निधि के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर सीबीआई (CBI) जांच चल रही है । ऐसी स्थिति में, अकोला में उनके समर्थन में निकाला गया मोर्चा संदिग्ध है ।
समिति ने ज्ञापन में कहा है कि लेह-लद्दाख जैसे दूरदराज के क्षेत्र की घटना पर अकोला में विरोध मोर्चा निकालना, यह विचारणीय है । कौन-सी अदृश्य शक्तियां इन संगठनों को प्रेरणा दे रही हैं ? यह उजागर होना चाहिए, साथ ही जांच की मांग होनी चाहिए ।
समिति ने प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर तुरंत जांच करने की मांग की है:
१. जांच इस दृष्टि से की जाए जिससे मोर्चे में भाग लेनेवाले संगठनों का उद्देश्य उजागर हो ।
२. यदि मोर्चा निकालकर राज्य में कानून और व्यवस्था बिगाडने का किसी का कुटिल उद्देश्य हो, तो उन्हें तुरंत रोका जाए ।
३. क्या राज्य के बाहर से या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे कोई प्रयास हो रहे हैं ? इस संदर्भ में भी जांच होनी चाहिए ।
४. यह राष्ट्रद्रोही लहर अन्य गांवों, राज्यों में न फैले, इस दृष्टि से आवश्यक उपाय किए जाएं ।
५. जांच के अंत में यदि कुटिल उद्देश्य सिद्ध होते हैं, तो संबंधितों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए ।








