सांगली में श्री दुर्गामाता दौड का समापन

सांगली – पाश्चात्य और वाम विचारधारा के तथाकथित हिन्दू प्रगतिशीलता और सुधारवाद के नाम पर देश के शत्रु बन गए हैं । जो आतंकवादियों का आश्रयस्थल है, उस पाकिस्तान और पाकिस्तानी मानसिकता के लोगों को सबक सिखाना है । इसीलिए धारकरियों का जन्म हुआ है और यही अपने जीवन का ध्येय है, ऐसा आह्वान श्री शिवप्रतिष्ठान हिन्दुस्तान के संस्थापक पू. संभाजीराव भिडेगुरुजी ने दशहरे के दिन श्री दुर्गामाता दौड के समापन समारोह में किया ।

राष्ट्र के उद्धार का कार्य करने के लिए ही हिन्दुओं का जन्म हुआ है !
पू. संभाजीराव भिडेगुरुजी आगे बोले, ‘‘छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की शपथ लेने के पश्चात जीवनभर स्वयं के जीवन का प्रत्येक क्षण स्वराज्य के लिए ही व्यतीत किया । अफजल खान की अंतडियां बाहर निकाली, कई शत्रुओं को समाप्त किया । वे ५ पातशाहियों पर भारी पडे और उन्होंने स्वराज्य निर्माण किया । छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ श्री भवानी माता का आशीर्वाद था । यह ध्यान में रखकर हम भी अपना सर्वस्व दांव पर लगा देेंगे ।
शत्रु कौन है ? मित्र कौन है ? और शत्रुबोध क्या है ? हमारे राष्ट्र का, हमारे धर्म का, हमारे समाज का निश्चितरूप से शत्रु कौन है ?, इसका बोध नहीं, ऐसा दुर्बल हमारा हिन्दू समाज है । ऐसे समाज को दिशा देकर उसे राष्ट्र के उद्धार के लिए सक्षम करना, यह हमारा प्रथम कर्तव्य है ।

पू. संभाजीराव भिडेगुरुजी ने घोषित किया कि वर्ष २०२६ की श्री शिवप्रतिष्ठान हिन्दुस्तान की गढ-किला मुहिम श्री लोहगड से श्री भीमगढ मार्ग से राजमती गढ़ तक, इसप्रकार होनेवाली है !
सन्दर्भ : सनातन प्रभात








