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‘मनाचे श्लोक’ चलचित्र के नाम में बदलाव किया जाएगा !

  • हिंदुत्वनिष्ठों की संघटित शक्ति के सामने निर्माता एवं निर्देशक झुके !

  • चलचित्र का प्रदर्शन बंद करने के बाद निर्माता एवं निर्देशक जाग गए !

  • अब यह चलचित्र नए नाम से प्रदर्शित किया जाएगा !

पुणे – ‘मनाचे श्लोक’ यह चलचित्र १० अक्टूबर को प्रदर्शित हुआ था । इस चित्र में ‘विवाहबाह्य संबंध कैसे बनाए रखें ?’, इसका वर्णन है; परंतु उसे समर्थ रामदासस्वामी के ‘मनाचे श्लोक’ इस पवित्र ग्रंथ का नाम देकर उसकी अवमानना हुई है । जिससे श्री समर्थ रामदासस्वामी का अपमान हो रहा है, इस कारण हिन्दू जनता ने प्रदर्शन से पहले ही विरोध किया। हिन्दुजनजागृति समिति, समस्त हिन्दू आघाडी जैसी संस्थाओं ने ‘यह चलचित्र हम नहीं दिखाने देंगे’, ऐसी चेतावनी भी दी । फिर भी यह चित्र चलचित्रगृहों में दिखाया गया। १० अक्टूबर को पुणे के दो स्थानों पर हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं ने इस चलचित्र का प्रदर्शन बाधित किया । अतः अब चलचित्र के निर्देशक मृण्मयी देशपांडे ने यह घोषणा की है कि, ‘मनाचे श्लोक’ नामक हमारा चलचित्र पुनः प्रदर्शित किया जाएगा, तथा इसके शीर्षक में परिवर्तन किया जाएगा ।

मृण्मयी देशपांडे ने सामाजिक माध्यमों पर पोस्ट कर लिखा है कि, ‘मनाचे श्लोक’ इस हमारे चित्र के प्रदर्शन के कारण कल एवं आज पुणे, संभाजीनगर तथा पश्चिम महाराष्ट्र में जो घटनाएं हुई हैं, वे अत्यंत दुःखद हैं। इस संपूर्ण घटनाक्रम को देखकर हम इस चलचित्र के प्रदर्शन को संपूर्ण महाराष्ट्र में स्थगित कर रहे हैं एवं नये नाम से १६ अक्टूबर को पुनः प्रदर्शित कर रहे हैं, ऐसा इस निवेदन में कहा है।

‘समर्थ सेवा मंडल’ की ओर से प्रदर्शन स्थगित करने की मांग !

चलचित्र के शीर्षक के कारण हिन्दू धर्म तथा संस्कृति से संबंधित व्यक्तियों की धार्मिक भावना आहत हुई है । साथ ही, ‘मनाचे श्लोक’ शब्द का प्रयोग समर्थ रामदासस्वामी के अनेक अनुयायियों का अनादर करने के समान है । इसलिए, चलचित्र का प्रमाणपत्र तथा प्रदर्शन स्थगित करने की मांग सज्जनगढ के समर्थ सेवा मंडल की ओर से उच्च न्यायालय में की गई थी; परंतु उच्च न्यायालय ने इस चलचित्र के प्रदर्शन को अनुमति दी । अतः यह चलचित्र प्रदर्शित किया गया ।

संपादकीय भूमिका

‘हिन्दुओं के संघटित प्रयास से धर्म के विरुद्ध होने वाले किसी भी अपमान को कैसे रोका जा सकता है ?’, इसका यह उत्तम उदाहरण है । यदि हिन्दू इसी प्रकार संघटित एवं जागरूक रहे, तो हिन्दू धर्म पर आघात करने का साहस किसी को नहीं होगा !


फिल्म का नाम नहीं बदला तो हिंदू समाज फिल्म प्रदर्शित नहीं होने देगा! – हिंदू जनजागृति समिति की चेतावनी

७ अक्टूबर २०२५

‘मनाचे श्लोक’ नामक फिल्म संत साहित्य का अपमान!

मुंबई : राष्ट्रसंत श्री समर्थ रामदास स्वामी महाराज द्वारा रचित पवित्र धार्मिक ग्रंथ ‘मनाचे श्लोक’ के नाम का उपयोग करके उसी शीर्षक से मराठी फिल्म का निर्माण करना, हिंदुओं की आस्था का बाजारीकरण करने जैसा है। यह समर्थ रामदास स्वामी का सीधा अपमान है। उच्चतम नैतिक मूल्य सिखाने वाले ग्रंथ के नाम का उपयोग केवल मनोरंजन, व्यावसायिक लाभ और सस्ती लोकप्रियता के लिए करना, करोड़ों श्रीरामभक्तों और समर्थभक्तों की धार्मिक भावनाओं को कुचलने जैसा है। संत परंपरा का यह अपमान हिंदू समाज कभी सहन नहीं करेगा। यदि इस फिल्म का नाम तत्काल नहीं बदला गया, तो हिंदू समाज सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा और फिल्म को प्रदर्शित नहीं होने देगा। सरकार और सेंसर बोर्ड इस पर तत्काल ध्यान दें और “मनाचे श्लोक” जैसे नाम को फिल्म के शीर्षक से हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें, यह मांग हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्य संगठक, श्री सुनील घनवट ने की है।

श्री सुनील घनवट ने आगे कहा, “इस संदर्भ में समिति की ओर से सरकार और सेंसर बोर्ड को एक ज्ञापन दिया है और संबंधित पक्षों को कानूनी नोटिस भी भेजा जाएगा। क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कोई कुरान या बाइबिल जैसे पवित्र ग्रंथों के नामों का उपयोग करके फिल्म बनाने का साहस करेगा? और यदि कोई करता भी है, तो क्या सेंसर बोर्ड उसे अनुमति देगा? फिर केवल हिंदुओं की ही धार्मिक भावनाओं को बार-बार क्यों ठेस पहुँचाई जाती है? पूर्व में, ‘द डा विंची कोड’ और ‘विश्वरूपम’ जैसी फिल्मों द्वारा क्रमशः ईसाई और मुस्लिम समुदायों की भावनाओं को आहत करने के कारण कई राज्यों में उनके प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। यदि इस फिल्म के मामले में भी कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होती है, तो इसके लिए पूरी तरह से फिल्म के निर्माता, निर्देशक और सेंसर बोर्ड जिम्मेदार होंगे।”

श्री घनवट ने आगे कहा, “सर्वोच्च न्यायालय ने लाल बाबू प्रियदर्शी बनाम अमृतपाल सिंह [(2015) 16 SCC 795] के मामले में स्पष्ट किया है कि ‘रामायण’ जैसे पवित्र ग्रंथों के नामों का व्यावसायिक लाभ के लिए एकाधिकार के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता। इस सिद्धांत के अनुसार, ‘मनाचे श्लोक’ जैसे धर्मग्रंथ का नाम फिल्म के लिए उपयोग करना कानून और नैतिकता के विरुद्ध है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के अनुसार, जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना एक गंभीर, संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है; साथ ही, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम 1952 की धारा 5-B के अनुसार, सामाजिक सद्भाव और नैतिकता को खतरे में डालने वाली किसी भी फिल्म को प्रमाणित न करने की जिम्मेदारी सेंसर बोर्ड की है।”

अंत में, श्री घनवट ने कहा कि ‘मनाचे श्लोक’ शीर्षक को फिल्म से तुरंत और बिना शर्त वापस लिया जाना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारों को भविष्य में धार्मिक प्रतीकों के ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिए एक कठोर कानून बनाना चाहिए।

ज्ञापन (मराठी भाषा)


‘मनाचे श्लोक’ यह मराठी फिल्म प्रदर्शित नहीं होने देंगे ! – मिलिंद एकबोटे, समस्त हिन्दू आघाडी

(बाएं से) श्री. सचिन घुले, श्री. पराग गोखले, श्री. मिलिंद एकबोटे
(बाएं से) श्री. सचिन घुले, श्री. पराग गोखले, श्री. मिलिंद एकबोटे

पुणे – मराठी फिल्म ‘मनाचे श्लोक’ के विरोध में नहीं हैं, अपितु फिल्म के नाम के विरोध में हैं । यह फिल्म प्रदर्शित नहीं होने दी जाएगी । छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदासस्वामी के बीच अच्छे संबंध थे । महाराष्ट्र का कोई भी शिवभक्त समर्थ रामदासस्वामी के महाकाव्य ‘मनाचे श्लोक’ के पवित्र शब्दों का अनादर नहीं होने देगा, ऐसे स्पष्ट मत समस्त हिन्दू आघाडी के कार्याध्यक्ष मिलिंद एकबोटे ने व्यक्त किए । वे ८ अक्टूबर को ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ की ओर से आयोजित पत्रकार परिषद में बोल रहे थे ।

श्री. एकबोटे ने आगे कहा कि, ‘मनाचे श्लोक’, यह अत्यंत पवित्र रचना है । उसके प्रति पूरे महाराष्ट्र में श्रद्धा है ।

यह फिल्म ‘मनाचे श्लोक’ को खंडित करनेवाली है, क्योंकि यह फिल्म ‘लव इन रिलेशनशिप’ (बिना विवाह के एक साथ रहना) पर आधारित है । इसलिए, यह विवाह संस्था और कुटुंब व्यवस्था को खंडित करनेवाली और उन्हें नष्ट करनेवाली है । उन्हें ‘मनाचे श्लोक’ शब्द का उपयोग ही नहीं करना चाहिए था । समाज ने कुछ बातों को माना है, उन्हें पूज्य स्थान पर रखा है और उनके प्रति श्रद्धा रखी है । वहां स्वतंत्रता का प्रश्न ही नहीं आता ।

९ अक्टूबर को पुणे शहर में सकल हिन्दू समाज की ओर से शहर के प्रत्येक श्री हनुमान मंदिर में फिल्म के विरोध में शाम ५ से ७ बजे के बीच महाआरती का आयोजन किया गया है । इस दौरान श्रद्धालुओं को इस फिल्म के बारे में जानकारी दी जाएगी और विरोध व्यक्त किया जाएगा ।

श्री मिलिंद एकबोटे ने कहा कि १० अक्टूबर को फिल्म प्रदर्शित नहीं होने दी जाएगी । प्रत्येक सिनेमा हॉल के सामने कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे ।

इस पत्रकार परिषद को हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. पराग गोखले और हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति के श्री. सचिन घुले ने भी संबोधित किया ।

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