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हिन्दू जनजागृति समिति की कर्नाटक के मुख्यमंत्री को कानूनी नोटिस

मैसूर दशहरा उत्सव के लिए कर्नाटक सरकार ने बानु मुश्ताक को निमंत्रण देने का प्रकरण

बेंगलुरु (कर्नाटक) – हिन्दूद्वेषी कन्नड लेखिका बानु मुश्ताक को मैसूर दशहरा महोत्सव का निमंत्रण दिए जाने पर कर्नाटक में हिन्दुओं में आक्रोश की भावना है । एक ओर भाजपा के नेता और पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा ने उच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट (दाखिल) की है, वहीं अब हिन्दू जनजागृति समिति ने भी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया तथा कन्नड और संस्कृति विभाग के मुख्य सचिव को कानूनी नोटिस भेजी है । कर्नाटक समिति के राज्य प्रवक्ता श्री मोहन गौडा ने ‘सनातन प्रभात’ को यह जानकारी दी ।

इस संदर्भ में निकाले गए प्रेस विज्ञप्ति से श्री गौडा ने कहा कि,

१. मैसूर दशहरा केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, अपितु हिन्दुओं का एक पवित्र पर्व है ।

२. परंपरा के अनुसार देवी चामुंडेश्वरी की उपस्थिति में दीपों की रोशनी, पुष्पांजलि, हल्दी -कुमकुम और पूजा- अर्चना कर कार्यक्रम का उद्घाटन होता आया है ।

३. वर्ष २०२३ में हुए साहित्य सम्मेलन में बानु मुश्ताक ने हिन्दुओं की पूज्य देवी भुवनेश्वरी (कन्नडम्मा) का अपमान किया था । हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के बाद भी उन्होंने आज तक क्षमा नहीं मांगी है ।

४. ऐसे व्यक्ति को दशहरे के उद्घाटन का मान देना और सरकार की ओर से १० लाख रुपए का पारितोषिक देना, यह हिन्दुओं की धार्मिक-सांस्कृतिक भावनाओं का अपमान है ।

हिन्दू जनजागृति समिति की मांगें इस प्रकार हैं…

१. बानु मुश्ताक को दिया गया उद्घाटन का निमंत्रण तत्काल वापस लिया जाए ।

२. अन्यथा ‘उद्घाटन हिन्दू धार्मिक परंपरा के अनुसार ही होगा’, इसका सरकार को लिखित आश्वासन ( गारंटी ) देना चाहिए ।

३. कन्नड, कन्नडम्मा और कर्नाटक की परंपरा का पवित्रत्व बनाए रखा जाए ।

सरकार को चेतावनी

७ दिनों के भीतर कार्यवाही न होने पर समिति कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट करेगी, साथ ही आपराधिक और जनहित याचिका भी प्रविष्ट करने के लिए समिति कटिबद्ध है, ऐसा श्री गौडा ने कहा।

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