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हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे के हाथों ‘प्रज्ञापुरी´ पुरस्कारों का वितरण

‘प्रज्ञापुरी ज्ञानपीठ अक्कलकोट’ की ओर से दिया जानेवाला ‘प्रज्ञापुरी पुरस्कार समारोह’ संपन्न !

श्रीबगलामुखी जप महासंकल्प, सुदर्शन याग, श्रीवल्लभ गणपति याग और समृद्धि याग संपन्न !

पुरस्कार विजेताओं के साथ सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे और श्री. प्रसाद पंडित (गुरुजी)

गोकर्ण (कर्नाटक) – ‘प्रज्ञापुरी ज्ञानपीठ ट्रस्ट, अक्कलकोट’ द्वारा आयोजित ‘गोकर्ण शिविर २०२५’ २० से २२ अगस्त की अवधि में संपन्न हुआ । इस शिविर में २२ अगस्त को ‘प्रज्ञापुरी पुरस्कार’ वितरण समारोह का आयोजन किया गया । ये पुरस्कार हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे के हाथों से श्री. अक्षय अर्जुन पारगे, पुणे के श्री. रामनाथ किसनराव सोनवणे, मुंबई के श्री. आनंदीप्रसाद अनंत करंबेळकर (गुरुजी) और पुणे की श्रीमती शुभांगी अतुल चव्हाण को प्रदान किए गए । यह कार्यक्रम गोदावरी इंटरनेशनल होटल, गोकर्ण में संपन्न हुआ । इस अवसर पर मंच पर श्री दत्तस्वामी आध्यात्मिक गुरुपीठ, अक्कलकोट (निर्माणाधीन) के पीठासन धर्माधिकारी श्री. प्रसाद पंडित (गुरुजी), ‘प्रज्ञापुरी ट्रस्ट’ के पूर्व प्रमुख ट्रस्टी श्री. संतोष साठे, संस्था की ट्रस्टी श्रीमती वर्षा प्रसाद पंडित, खेड (जिला पुणे) कृषि उत्पन्न बाजार समिति के संचालक श्री. अनुराग जैद उपस्थित थे । इस कार्यक्रम में ‘प्रज्ञापुरी ज्ञानपीठ ट्रस्ट’ के कई साधक-साधिकाएं और हिन्दू धर्मनिष्ठ उपस्थित थे ।

श्रावण मास में गोकर्ण के श्रीमहागणपति, आत्मलिंग दर्शन के अंतर्गत, सभी महाबाधा दोष निवारण और हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य में सूक्ष्म बाधाओं को दूर करने के लिए, पाप परिहार के लिए हेमाद्री संकल्प, प्रायश्चित तिलहोम, श्री बगलामुखी जप महासंकल्प, तंत्र वटुकभैरव, उच्चाटन और सुदर्शन याग, श्रीवल्लभ गणपति याग, समृद्धि याग किए गए । हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य में सूक्ष्म कठिनाइयों के निवारण हेतु केरल-कर्नाटक पद्धति से अष्टमंगल चिंतन आश्लेषा बलि और गोकर्ण महाबळेश्वर (आत्मलिंग) पर सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे के हाथों सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की आयुवृद्धि के लिए एकादशनी रुद्र अभिषेक प्रार्थना, साथ ही केरल-कर्नाटक के तांत्रिक पुरोहित और महाराष्ट्र के सात्विक वैदिक पुरोहितों द्वारा श्री बगलामुखी जप महासंकल्प के अनुसार अनुष्ठान के साथ महापूर्णाहुति पूर्ण की गई ।

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